Thursday , 18 January 2018
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प्याज के छिलकों से तैयार होगी ग्रीन एनर्जी

खडग़पुर। आंखों में आंसू लाने वाले प्याज के छिलके अब हमारे लिए ग्रीन एनर्जी तैयार करने में मददगार साबित होंगे। आईआईटी खडग़पुर ने दक्षिण कोरिया के वैज्ञानिकों के साथ मिलकर इस दिशा में महत्वपूर्ण खोज को सफलतापूर्वक अंजाम देते हुए इसके लिए अत्याधुनिक डिवाइस तैयार कर ली है।
नैनोजेनरेटर का किया निर्माण
आईआईटी खडग़पुर के साथ मिलकर दक्षिण कोरिया के पोहांग विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने बायोमेडिकल एप्लीकेशंस के लिए प्याज की त्वचा (छिलके), जिसे सामान्यता कचरा समझकर फेंक दिया जाता है, से स्व संचालित एनर्जी हार्वेस्टर (नैनोजेनरेटर) का निर्माण किया है। यही नैनोजेनरेटर बैटरी के बिना ही विद्युत व मैकेनिकल स्नोतों से विद्युत शक्ति में निर्मित ऊर्जा को परिवर्तित करते हैं।
कई प्रकार की यांत्रिक ऊर्जा पैदा करने में सक्षम
इस प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे आईआईटी खडग़पुर में मैटेरियल साइंस विभाग के प्राध्यापक प्रो. बीबी खटुवा कहते हैं कि नैनोजेनरेटर कई प्रकार की यांत्रिक ऊर्जा पैदा करने में सक्षम हैं, जिसमें शरीर की गति, हवा प्रवाह और यहां तक कि मशीन कंपन भी शामिल हैं। वह बताते हैं कि एक सामान्य आकार वाली प्याज के छिलके से आधारित उपकरण 30 हरे रंग की एलईडी को मानवीय स्पर्श प्रतिक्रिया के साथ रोशन कर सकता है। यह आधुनिक विज्ञान व प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उभरती हुई प्रवृत्ति है, जिसे ग्रीन एनर्जी का स्नोत माना जाता है।
इतनी ऊर्जा होगी उत्पन्न
प्रो. खटुवा कहते हैं कि जब इस तरह के छह प्याज के छिलके नैनोजेनरेटर श्रृंखला में उपयोग किए जाते हैं, तो 106 वोल्ट की अधिकतम आउटपुट वोल्टेज (ऊर्जा) प्राप्त होती है, जो तत्काल 70 से अधिक संयुक्त एलईडी (लाल, हरे व नीले रंग) को रोशन करने में सक्षम होती है। यह ग्रामीण क्षेत्रों में अत्यधिक उपयोगी साबित हो सकती है।क्या है ग्रीन एनर्जी
ग्रीन एनर्जी एक ऐसा स्थायी स्नोत है, जो पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य दोनों के लिए हानिकारक नहीं है। वास्तव में ग्रीन एनर्जी प्राकृतिक अक्षय ऊर्जा स्नोतों जैसे सूर्य, पवन, जल, भूगर्भ और पादपों से उत्पन्न की जाती है। वर्तमान में जिस रफ्तार से जनसंख्या बढ़ रही है उसी रफ्तार से परंपरागत ईंधनों की खपत भी बढ़ रही है। ऐसे में ग्रीन एनर्जी को उनका वैकल्पिक स्रोत माना जा रहा है।

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