Friday , 24 November 2017
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लाड्र्स में इतिहास दोहराने उतरेंगी भारतीय महिलाएं

लंदन। वर्ष 1983 में कपिल देव की कप्तानी में जिस तरह पुरूष टीम ने आईसीसी विश्वकप खिताब जीत इतिहास रचा था उसे लाड्र्स के इसी मैदान पर दोहराने से अब देश की महिला क्रिकेट टीम बस एक कदम की दूरी पर है।
मिताली राज की कप्तानी वाली भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने मात्र दूसरी ही बार आईसीसी विश्वकप के फाइनल में प्रवेश किया है जहां उसके सामने रविवार को तीन बार की चैंपियन इंग्लैंड की चुनौती होगी। भारत ने वर्ष 2005 में पहली बार विश्वकप फाइनल में जगह बनाई थी जहां वह आस्ट्रेलिया से हारकर उपविजेता रही थी।
महिला टीम का यह टूर्नामेंट में सबसे अच्छा प्रदर्शन था लेकिन इस बार उससे एक कदम आगे बढ़कर पहली बार खिताब हासिल कर भारतीय महिला क्रिकेट इतिहास के स्वर्णिम युग की शुरूआत करने की अपेक्षा है। पुरूष टीम के लिये कपिल 1983 में लाड्र्स के इसी मैदान पर पहले विश्वविजेता कप्तान बने तो अब मिताली पर भी क्रिकेट के ‘मक्काÓ लाड्र्स मैदान पर पहली बार महिला टीम इंडिया को विश्व विजेता बनाने की जिम्मेदारी है।
भारतीय महिला टीम ने न सिर्फ पिछले कुछ वर्षों में अपने प्रदर्शन से अपने अलग रास्ते बनाये हैं बल्कि मौजूदा टूर्नामेंट में भी वह शुरूआत से लाजवाब प्रदर्शन की बदौलत शीर्ष टीमों में शुमार रही। भारत ने यहां अपनी शुरूआत ही इंग्लैंड के खिलाफ 35 रन की जीत से शुरू की थी और अब उसे विश्वकप का समापन भी मेजबान इंग्लैंड पर जीत से करना होगा।
भारत ने इंग्लैंड को 35 रन, वेस्टइंडीज को 7 विकेट, पाकिस्तान को 95 रन, श्रीलंका को 16 रन से हराकर लगातार चार मैच जीते। उसे दक्षिण अफ्रीका और आस्ट्रेलिया से फिर दो मैचों में शिकस्त मिली लेकिन उसने कमाल की वापसी करते हुये ‘करो या मरोÓ के मैच में न्यूजीलैंड को 186 रन से हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया और फिर छह बार की चैंपियन आस्ट्रेलिया को 36 रन से रोमांचक मैच में हराकर फाइनल में जगह पक्की कर ली।
टीम मिताली के इस टूर्नामेंट में कमाल प्रदर्शन का यादगार मुकाबला निश्चित ही उसकी सबसे सफल टीम आस्ट्रेलिया के खिलाफ सेमीफाइनल जीत रही जिसमें 28 वर्षीय मध्यक्रम की बल्लेबाज हरमनप्रीत कौर को रातों रात स्टार बना दिया। हरमन की नाबाद 171 रन की बेजोड़ पारी ने न सिर्फ भारतीय क्रिकेट जगत को महिला क्रिकेट की ओर ध्यान लगाने के लिये मजबूर कर दिया बल्कि यह भी संकेत दिया कि यह टीम हमारी स्टार पुरूष टीम से किसी मायने में पीछे नहीं है।
टीम इंडिया अपनी इस जीत के बाद आत्मविश्वास से ओतप्रोत है और कप्तान मिताली तो फाइनल से पहले इंग्लैंड को सतर्क भी कर चुकी हैं। भारतीय महिला टीम इंग्लैंड को टूर्नामेंट में हरा चुकी है और यह भी इसकी एक वजह है। हालांकि टीम इंडिया को यह भी याद रखना होगा कि मेजबान टीम ने पहला मैच हारने के बाद जबरदस्त वापसी की और तालिका में शीर्ष पर रही।
इंग्लैंड ने वर्ष 1973 में सबसे पहले अंकों के आधार पर विश्वकप खिताब जीता और उसके बाद वर्ष 1993 में न्यूजीलैंड और वर्ष 2009 में भी न्यूजीलैंड को हराकर विश्वकप जीता। लेकिन भारत अब तक केवल दूसरी बार ही फाइनल में पहुंचा है और कभी भी विश्वकप खिताब नहीं जीता है।

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