Saturday , 25 November 2017
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‘मैंने कभी परिणाम के बारे में नहीं सोचा’

india-teamदुबई। मैदान पर बेहद ठंडे दिमाग से खेलने के अपने अंदाज के कारण कूल खिताब पाने वाले पूर्व कप्तान महेंद्र ङ्क्षसह धोनी आलोचनाओं से बिलकुल भी चिंतित नहीं रहते हैं और उनका कहना है कि सबका अपना-अपना नजरिया होता है।
भारतीय टीम के स्टार विकेटकीपर बल्लेबाज महेंद्र ङ्क्षसह धोनी ने संयुक्त अरब अमीरात में अपनी पहली वैश्विक क्रिकेट अकादमी शुरू करने के मौके पर पहली बार अपनी आलोचनाओं पर खुलकर जवाब दिए जिसमें उनका कूल अंदाज साफ नजर आया। उन्होंने कहा, सभी के अपने-अपने विचार होते हैं और उनका सम्मान करना चाहिए।
दरअसल पूर्व क्रिकेटरों अजीत आगरकर और वीवीएस लक्ष्मण ने धोनी की ट््वंटी 20 में भूमिका पर सवाल उठाये थे। धोनी ने न्यूजीलैंड के खिलाफ सीरीज के दूसरे ट््वंटी-20 मैच में 26 रन बाउंड्री के जरिए सिर्फ पांच गेंदों में ही बटोरे थे, जिसमें तीन छक्के और दो चौके शामिल थे। लेकिन शेष 32 गेंदों में वह सिर्फ 23 रन ही बना पाए थे।
तब भारत के पूर्व तेज गेंदबाज आगरकर ने कहा था कि टी-20 में अब भारत को और विकल्पों के बारे में सोचना चाहिए। आगरकर के अलावा लक्ष्मण ने भी सवाल उठाते हुए टीम मैनेजमेंट से दूसरा विकल्प तलाशने पर जोर दिया था हालांकि टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली और टीम के कोच रवि शास्त्री ने खुलकर सामने आते हुए उनका बचाव किया था लेकिन धोनी इस मामले पर खामोश रहे थे।
धोनी से जब इस मुद्दे पर सवाल दागे गए तो उन्होंने अपनी चुप्पी तोड़ते कहा, हर व्यक्ति का अपना-अपना नजरिया होता है और हमें उसका सम्मान करना चाहिए। मैं आलोचनाओं से चिंतित नहीं होता। मेरा मानना है कि नतीजों से ज्यादा प्रक्रिया जरूरी है। मैंने कभी परिणाम के बारे में नहीं सोचा। मैंने हमेशा सही करने पर विचार किया, चाहे बात 10 रनों की जरूरत की हो, पांच की हो या फिर 14 रनों की।
भारत को दो विश्व कप जिता चुके धोनी ने कहा, भारतीय क्रिकेट टीम का हिस्सा होना ही मेरे लिए सबसे बड़ी प्रेरणा है। ऐसे कई क्रिकेटर हुए, जिनमें जन्मजात प्रतिभा नहीं थी लेकिन फिर भी वे काफी आगे गए। ऐसा सिर्फ जुनून और मेहनत की वजह से हुआ। हर क्रिकेटर को देश के लिए खेलने का मौका नहीं मिलता।
उन्होंने कहा कि कुछ लोग एक साल ही क्रिकेट खेल पाते हैं तो कुछ लोगों का करियर 20 साल तक चलता है। उन्होंने कहा, मान लीजिए आपकी ङ्क्षजदगी 70 साल की है, इस तरह 10-15 साल उसके आगे कुछ नहीं है लेकिन यही वह समय होता है जब आप गर्व से कह सकते हैं कि हम अपने देश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। सबसे बड़ी प्रेरणा भारतीय क्रिकेट टीम का हिस्सा होना है।
जब उनसे हेलिकॉप्टर शॉट के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वह नहीं चाहते कि युवा ऐसे शॉट््स की कोशिश करें, क्योंकि इससे उनके घायल होने की संभावना है। धोनी ने कहा, यह मैंने टेनिस बॉल से खेलते हुए सीखा है। यह मुश्किल है। टेनिस बॉल से अगर बल्ले के निचले हिस्से पर गेंद लगे तो वह दूर तक जाती है। लेकिन असली क्रिकेट में इस शॉट को बल्ले के बीचोबीच से मारना पड़ता है। मैं नहीं चाहता कि युवा इसे खेलें, क्योंकि इससे उन्हें चोट लग सकती है।
धोनी क्रिकेट अकादमी में भारत से कोच आकर बच्चों को प्रशिक्षण देंगे। धोनी ने उत्साही प्रशिक्षुओं और उनके माता-पिता की मौजूदगी में इसे लांच किया। अकादमी में नियमित आधार पर मैचों का आयोजन किया जाएगा। कोङ्क्षचग स्टाफ की अगुवाई मुंबई के पूर्व गेंदबाज विशाल महादिक करेंगे।
धोनी ने इस मौके पर कहा, इसका हिस्सा बनकर मैं बहुत खुश हूं और इसे कामयाब बनाने में अपनी ओर से पूरा प्रयास करूंगा। क्रिकेट को योगदान देना मेरा सपना रहा है और यह उस दिशा में पहला कदम है।

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