Sunday , 27 May 2018
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चैंपियंस ट्राफी-विश्वकप मेजबानी गंवा सकता भारत

नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड(बीसीसीआई) और भारत सरकार के बीच चल रहे मौजूदा कर विवाद को यदि नहीं सुलझाया गया तो भारत आईसीसी के दो बड़े टूर्नामेंटों वर्ष 2021 में चैंपियंस ट्राफी और 2023 में विश्वकप की मेजबानी को गंवा सकता है।
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने भारतीय बोर्ड और सरकार के बीच चल रहे कर विवाद के कारण अभी से नये वैकल्पिक स्थलों को ढूंढने पर भी विचार शुरू कर दिया है जो टूर्नामेंट के निर्धारित समय और वर्ष में इनकी मेजबानी कर सकते हैं जिसकी आखिरी बार मेजबानी इंग्लैंड ने की थी।
हालांकि आईसीसी ने जारी बयान में कहा है कि बीसीसीआई और उसका प्रबंधन मिलकर भारत सरकार से कर छूट देने को लेकर अभी भी बीच का हल निकालने पर बात कर रहा है। लेकिन साथ ही वैश्विक संस्था ने इसी समयावधि में वैकल्पिक स्थल तलाशने पर काम शुरू कर दिया है।
आईसीसी ने जारी बयान में कहा, बीसीसीआई ने भारत सरकार से आईसीसी चैंपियनशिपों के लिये कर छूट नहीं देने को लेकर चिंता जताई है जबकि आईसीसी और बोर्ड दोनों मिलकर कर छूट को लेकर प्रयास कर रहा है जो दुनियाभर में आईसीसी टूर्नामेंटों के लिये सामान्य प्रक्रिया है।
वैश्विक संस्था ने कहा कि बोर्ड ने सहमति जताई है कि बीसीसीआई के समर्थन वाला आईसीसी प्रबंधन भारत सरकार से आगे इस मामले पर हल निकालने के लिये बात करेगा। लेकिन इस बीच उसने 2021 में होने वाली चैंपियंस ट्राफी के लिये नये विकल्प तलाशने का काम शुरू कर दिया है।
भारत ने वर्ष 2016 में आईसीसी टूर्नामेंट और आईसीसी विश्वकप ट््वंटी 20 की मेजबानी की थी। हालांकि उस समय भी भारतीय बोर्ड को सरकार से किसी तरह की कर छूट नहीं मिली थी। लेकिन मौजूदा हालातों में आईसीसी के चैंपियंस ट्राफी के लिये वैकल्पिक स्थान तलाशने के कदम ने बीसीसीआई पर दबाव बना दिया है।
चैंपियंस ट्राफी भले ही तीन वर्ष दूर है लेकिन आईसीसी बोर्ड वर्ष 2016 ट््वंटी 20 विश्वकप के अनुभव के आधार पर अभी से वैकल्पिक स्थान तलाश रहा है क्योंकि उस समय भी भारत सरकार ने कर छूट नहीं दी थी जिससे आईसीसी को दो से तीन करोड़ डॉलर का नुकसान उठाना पड़ा था। समझा जाता है कि आईसीसी प्रसारण के अधिकार प्राप्त स्टार इंडिया ने उस समय भारत सरकार को 10 फीसदी कर के रूप में चुकाया था और आईसीसी को किये गये भुगतान से इस राशि को काट लिया था।
वहीं अब दो वर्ष से आईसीसी और बीसीसीआई फिर से सरकार को कर छूट के लिये अपील भेज रहा है लेकिन अभी इस पर कोई कदम नहीं उठाया गया है और न ही सरकार की ओर से इसे लेकर कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया दी गयी है। आईसीसी का मानना है कि यदि चैंपियंस ट्राफी और 2023 विश्वकप के लिये सरकार ने उन्हें कर छूट नहीं दी तो उसे 10 से 12.5 करोड़ डॉलर तक का नुकसान हो सकता है।
आईसीसी ने शुक्रवार को दुबई में हुई बैठक के बाद कहा कि यदि उसे इन टूर्नामेंटों के लिये भारत सरकार से कर छूट नहीं मिलती है तो उसके राजस्व पर असर पड़ेगा जिससे सबसे अधिक उसके पूर्णकालिक सदस्य प्रभावित हेांगे जिनमें आईसीसी की कमाई को वितरित किया जाता है।
आईसीसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डेविड रिचर्डसन और प्रबंधन को भारत की समयावधि के अनुसार वैकल्पिक स्थान ढूंढने के लिये निर्देश दिये हैं जिससे अब इन टूर्नामेंटों की मेजबानी के लिये श्रीलंका और बंगलादेश पर ध्यान केंद्रित हो गया है। हालांकि कोई भी नया स्थान अगले 12 से 16 महीने में ही ढूंढा जाएगा। वहीं भारत चैंपियंस ट्राफी की मे•ाबानी करेगा या नहीं इस पर आखिरी फैसला 2019 के अंत तक होगा।
शुक्रवार को हुई इस बैठक में बीसीसीआई के कार्यवाहक सचिव अमिताभ चौधरी ने भी हिस्सा लिया था। वहीं समझा जा रहा है कि आईसीसी ने भारत सरकार से अपनी बातचीत में इस पहलू को उजागर किया है कि जब भी किसी देश में ओलंपिक, विश्वकप, एथलेटिक्स चैंपियनशिप, यूईएफए जैसी वैश्विक चैंपियनशिप आयोजित की जाती हैं तो स्थानीय अर्थव्यवस्था पर उसके असर को देखते हुये सरकार की तरफ से खास छूट दी जाती है।
गौरतलब है कि वर्ष 2006 में हुई चैंपियंस ट्राफी और 2011 में हुये विश्वकप के दौरान सरकार ने इन टूर्नामेंटों के लिये कर छूट दी थी। उस समय आईसीसी प्रतिनिधियों में एहसान मनी और स्वर्गीय जगमोहन डालमिया ने इस मुद्दे पर सरकार से समझौता किया था जिसके बाद सरकार ने कर छूट को लेकर विधेयक पास किया था। वहीं 2010 राष्ट्रमंडल खेलों के लिये भी कर छूट दी गयी थी। हालांकि 2015 के बाद इस स्थिति में बदलाव आ गया।

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