Friday , 25 May 2018
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पीएम बोले तो पोषण मिशन याद आना चाहिए : मोदी

‘सास तय कर लें कि घर में बेटी चाहिए तो किसी में विरोध की ताकत नहीं’

झुंझुनूं। महिला दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी झुंझुनूं पहुंचे। यहां उन्होंने राष्ट्रीय पोषण मिशन की शुरूआत की। इस मौके पर उन्होंने झुंझुनूं जिले में लिंगानुपात बेहतर होने पर तारीफ की।
मोदी ने कहा, ये वीरों की भूमि है। इस जिले ने साबित कर दिया है कि युद्ध हो या अकाल हो, झुंझुनूं झुकना नहीं, लड़ना जानता है। जिस तरह बेटी बचाओ अभियान को आगे बढ़ाया जा रहा है, इससे देश को प्रेरणा मिलेगी। अगर सास तय कर लें कि घर में बेटी चाहिए तो किसी की ताकत नहीं है कि वो इसका विरोध करे। इसके साथ ही मोदी ने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान को विस्तार दिया। इस मौके पर मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया और केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी मौजूद रहीं।
‘झुंझुनूं ने मुझे यहां आने के लिए मजबूर कर दिया’
प्र.म. मोदी ने कहा, आज 8 मार्च को दुनिया अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाती है। इसे 100 साल हो गए हैं, लेकिन आज पूरा झुंझुनूं इससे जुड़ गया है। मैं ऐसे ही यहां नहीं आया हूं, कुछ सोच विचार करके आया हूं। आपने मुझे यहां आने के लिए मजबूर कर दिया है। जिस तरीके से झुंझुनूं ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान को आगे बढ़ाया, उससे मेरा मन कर गया कि यहां की मिट्टी को माथे पर लगाऊं।
‘झुंझुनूं झुकना नहीं, लड़ना जानता’
मोदी ने कहा, ये वीरों की भूमि है। इस जिले ने साबित कर दिया है कि युद्ध हो या अकाल हो, झुंझुनूं झुकना नहीं, लड़ना जानता है। जिस तरह बेटी बचाओ अभियान को आगे बढ़ाया जा रहा है, इससे देश को प्रेरणा मिलेगी। अगर सफलता मिलती है तो मन को संतोष होता है, लेकिन कई बार मन को दुख होता है कि जिस देश की महान परंपराएं, वेद से विवेकानंद तक सही दिशा में प्रबोधन। लेकिन क्या कारण है कि हमें अपने ही बेटी को बचाने में धन खर्च करना पड़ रहा है। बजट तय करना पड़ रहा है। इससे बड़ी कोई पीड़ा नहीं हो सकती है।
‘अब तय कर लें बेटा और बेटियां बराबर पढ़ेंगी’
प्र.म. मोदी ने कहा, सामाजिक बुराइयों के चलते हमने अपनी ही बेटियों की बलि चढ़ाना तय कर लिया। कई दशकों तक बेटियों को नकारते रहे, आज 4 से 5 पीढ़ियां जमा हुई हैं। कई सालों में जो घाटा हुआ, उसे पूरा करने में समय तो लगेगा, लेकिन तय कर लें कि बेटा और बेटियां बराबर पढ़ेंगी। जितने बेटे पैदा होंगे, उतनी ही बेटियां पैदा हों।
उन्होंने कहा, आज जिन जिलों को सम्मान दिया गया। वो बेटों के जैसे ही बेटियां को आगे बढ़ाने के लिए आगे आए हैं। इसे एक जन आंदोलन बनाना होगा। अगर सास ये तय कर लें कि घर में बेटी चाहिए तो किसी की ताकत नहीं है कि वो बेटियों का विरोध करे।
‘अच्छा लगता है कि बेटियां स्पेस टेक्नोलॉजी में कामयाबी हासिल करती हैं’
मोदी ने कहा, हमने हरियाणा, जहां बेटियां की संख्या काफी कम थी, वहीं से अभियान शुरू किया। कुछ लोगों ने कहा कि यहां से काम की शुरूआत करने पर विरोध होगा। लेकिन मैंने यहीं से अभियान शुरू करने का फैसला लिया। आज बेटी बोझ नहीं, वो तो पूरे परिवार की आन-बान-शान है। बेटियां स्पेस टेक्नोलॉजी में कामयाबी हासिल कर रही हैं। ओलिम्पिक में जब बेटियां गोल्ड मेडल लेकर आती हैं तो लोगों को इस पर गर्व होता है।
‘हम बच्चों को अच्छी आदतें सिखाएं’
प्र.म. ने कहा, जन्म के बाद अगर बच्चों को मां का दूध पीने मिले तो आगे उसकी कई बीमारियां दूर हो जाती हैं। अगर हम मां की रखवाली करेंगे तो उसके दूध से बच्चों में कुपोषण दूर हो जाएगा। (शेष पेज 8 पर)

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