Monday , 24 July 2017
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देशी विदेशी मदिरा की लॉटरी के दौरान लगा मेला

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चित्तौडगढ़। आबकारी विभाग द्वारा आगामी वित्तीय वर्ष के लिये जिले में 206 देशी शराब व 20 अंग्रेजी शराब की दुकानों के लिये सोमवार को पन्ना ट्यूरिष्ट बेंगलों परिसर के मीरा मेरिज गार्डन में निकाली लोटरी के दौरान मेले सा माहोल देखने को मिला। देशी शराब की 206 दुकानों के लिये 10 हजार 560 तथा अंग्रेजी मदिरा की 20 दूकानों के लिये 2494 आवेदन पत्रों की लौटरी निकाली गई। जिला आबकारी अधिकारी राजेन्द्र कुमार बंजारा के अनुसार जिला कलक्टर इन्द्रजीत सिंह, पुलिस अधीक्षक प्रसन्न कुमार खमेसरा व समिति सदस्य सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के सहायक निदेशक ओम प्रकाश तोषनीवाल की मौजूदगी में निकाली गई लोटरी के दौरान अतिरिक्त कलक्टर राकेश कुमार, व अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राजन दुश्यन्त भी मौजूद थे। सर्वप्रथम विदेशी मदिरा की दुकानों के लिये निकाली गई लोटरी में पहला भाग्यशाली प्रकाश नामक व्यक्ति रहा। लोटरी का निर्धारित समय प्रात: 11 बजे का तय था लेकिन आवेदक प्रात: 9 बजे से ही मौके पर पहुंचने शुरू हो गये। लोटरी परिसर में बढ़ती भीड़़ को देखते हुए यातायात पुलिस द्वारा प्रताप सर्कल से लेकर हेमु कॉलोनी सर्कल तक के मार्ग को अवरूद्ध कर स्टेशन की ओर से यातायात व्यवस्था की गई। लोटरी स्थल पर सुरक्षा की दृष्टि से पर्याप्त मात्रा में पुलिस व मेवाड़ भील कोर के साथ ही आबकारी गार्ड भी तैनात किये गये थे। देशी विदेशी मदिरा की लोटरी में जिन भाग्यशाली लोगों के नाम निकले उनके चेहरे खिल गये। लेकिन अधिकांश लोगों को निराश भी लौटना पड़़ा। देशी विदेशी मदिरा के लिये आबकारी विभाग को कुल 13 हजार 54 आवेदन ऑनलाईन प्राप्त हुए जिससे विभाग को 26 करोड़ 88 लाख रूपये की राजस्व प्राप्ति हुई। जबकि 226 भाग्यशाली लोगों के बाद 12 हजार 828 आवेदक निराश हुए।
शराब बंदी के लिये एक ओर मतदान तो दूसरी ओर लोटरी
शराब खराब है, और नशा जीवन को बरबाद करने वाला है। इसी भावना के साथ प्रदेश की दूसरी ग्राम पंचायत के रूप में आमेर तहसील की रोजदा ग्राम पंचायत में शराब बंदी के लिये तीन चौथाई मतदान कर ग्रामीणों ने अपनी पंचायत को जहां शराब मुक्ति दिलाई वहीं सरकार को करोड़ो रूपये की आय के लिये प्रतिवर्ष देशी विदेशी मदिरा की दुकानों के आवंटन के लिये ऑनलाईन आवेदन से ही जहां करोड़ो की आय हो जाती है। वहीं शराब के व्यापार के दौरान होने वाली आय इससे कई गुना अधिक होती है। इसी कारण प्रदेश में मदरा व्यवसाय फलफूल रहा है।

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