Tuesday , 20 February 2018
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जिला कलेक्टर के पीडी खाते से 5.34 लाख कुर्क करने के आदेश

अदालत आदेश की अवहेलना करना जिला कलेक्टर एवं सीएमएचओ को पड़ा महंगा

rupeeयह था मामला बड़ावली गोगुंदा निवासी टीलाराम पुत्र भूरालाल गमेती ने राज्य सरकार जरिये जिला कलेक्टर, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी एवं प्रभारी अधिकारी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र उदयपुर के खिलाफ स्थाई लोक अदालत में परिवाद पेश किया था, जिसमें बताया कि 28 फरवरी 2012 को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पदराड़ा में पत्नी लच्छी देवी को दिखाया। वह ममता कार्ड धारक थी। उसकी संभावित प्रसव की तारीख 8 मई 2012 थी, लेकिन 20 अप्रेल 2012 को ही प्रसव हो गया और स्वस्थ शिशु को जन्म दिया।

प्लेसेंटा बाहर न आने से ऑपरेशन बीच में ही रोक दिया गया और उदयपुर एम.बी. चिकित्सालय के लिए रवाना कर दिया। फरियादी उसे जीप से लेकर उदयपुर एम.बी. चिकित्सालय के लिए रवाना हुआ, रास्ते में अपरान्ह 4.25 बजे उसकी मौत हो गई। इस मामले में परिवादी ने बताया कि पत्नी को पदराड़ा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से उदयपुर रवाना करने के दौरान उसकी हालत गम्भीर थी।

अत्यधिक मात्रा में रक्त स्त्राव हो रहा था, इसके बावजूद प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से पेरामेडिकल स्टाफ और एम्बुलेंस नहीं भेजी गई। जबकि प्रत्येक स्वास्थ्य केंद्र पर एम्बुलेंस होती है। प्री-डिलेवरी 20 दिन पूर्व हो रही थी तो ऐसे में सावधानी बरतते हुए उसे पहले ही उदयपुर भेज देना चाहिए था। रक्त स्त्राव रोकने के लिए भी उचित उपाय नहीं किए गए। इस संबंध में सायरा थाने में भी प्रकरण दर्ज कराया था। इस मामले में परिवादी ने मुख्यमंत्री सहायता कोष एवं जननी सुरक्षा कोष से दस लाख रूपए दिलाने की मांग की, जिस पर 22 जून 2017 को स्थाई लोक अदालत ने जिला कलेक्टर एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के खिलाफ आदेश देते हुए कहा कि दोनों पृथक-पृथक या संयुक्त रूप से पांच लाख रूपए परिवादी को दो माह में अदा करे और पांच हजार रूपए परिवाद व्यय के पृथक से अदा करे। निर्धारित समय पर राशि अदा करने पर 10 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा। उदयपुर। चिकित्सकों द्वारा प्री-डिलेवरी में लापरवाही बरतने से आदिवासी विवाहिता की अकाल मौत हो गई थी। इस मामले में स्थाई लोक अदालत ने जिला कलेक्टर एवं सीएमएचओ के खिलाफ आदेश पारित कर परिवादी को 5 लाख रूपए संयुक्त या पृथक रूप से अदा करने के आदेश दिए थे। साथ ही पांच हजार रूपए परिवाद व्यय के पृथक से अदा करने को कहा। इस आदेश की लम्बे समय तक पालना नहीं करने पर स्थाई लोक अदालत के दोनों सदस्यों ने जिला कलेक्टर द्वारा संचालित पीडी खाता 100 से 5 लाख 34 हजार 166 रूपए की राशि कुर्क करने के आदेश दिए।
स्थाई लोक अदालत ने 22 जून 2017 को जिला कलेक्टर व मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को आदेश दिया कि वे पृथक-पृथक या संयुक्त रूप से परिवादी टीलाराम गमेती को पांच लाख रूपए दो माह में अदा करे, साथ ही परिवाद व्यय के पांच हजार रूपए पृथक से दें। उक्त राशि निर्धारित अवधि में नहीं देने पर 10 प्रतिशत ब्याज देना होगा। अदालत के आदेश के बावजूद जिला कलेक्टर एवं सीएमएचओ ने नियमित तिथि पर भुगतान नहीं किया। इस पर परिवादी ने हकरसी का प्रार्थना पत्र पेश कर अदालत आदेशानुसार अवार्ड राशि दिलाए जाने का आग्रह किया। इस पर अदालत ने 13 अक्टूबर 2017 को जिला कलेक्टर एवं सीएमएचओ को नोटिस जारी किया। सीएमएचओ अदालत में उपस्थित हुए लेकिन जिला कलेक्टर नहीं आए, इस पर अदालत ने आदेश दिया कि परिवादी को ब्याज सहित 5 लाख 34 हजार 166 रूपए अदा करे। सीएमएचओ ने अदालत को बताया कि उक्त आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालय में स्थगन आदेश प्रस्तुत करने जा रहे है। इस दौरान 31 अक्टूबर 2017, 30 नवम्बर 2017 एवं 20 दिसम्बर 2017 को पेशी हुई। उस दौरान भी सीएमएचओ ने स्थगन आदेश पेश करने के लिए अवसर चाहा। स्थगन आदेश पेश नहीं किया, 20 दिसम्बर को विपक्षी की ओर से सीएमएचओ के साथ डॉ. एस.के. टांक भी अदालत में उपस्थित हुए। इस पर अदालत ने चेतावनी देते हुए कहा कि स्थगन आदेश पेश नहीं करने और राशि नहीं लौटाने पर बैंक खाता कुर्की कर दिया जाएगा। इसके बावजूद विपक्षियों द्वारा उच्च न्यायालय में स्थगन आदेश पेश नहीं किया। परिवादी ने 20 दिसम्बर 2017 को ही एक प्रार्थना पत्र अदालत में पेश किया जिसमें राजस्थान सरकार की ओर से जिला कलेक्टर का एसबीआई कोषालय शाखा उदयपुर का पीडी खाता संख्या 100 कुर्क करने का आवेदन किया।
पीडी खाता कुर्क करने के प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के बाद स्थाई लोक अदालत के सदस्य सुशील कोठारी एवं ब्रजेंद्र सेठ ने निस्तारण करते हुए फैसले में लिखा कि अदालत ने वर्णित परिस्थितियों में विपक्षी की ओर से न्यायालय अवार्ड की पालना में बरती गई शिथिलता एवं उच्च न्यायालय स्थगन आदेश लाने के लिए पर्याप्त अवसर दिए जाने के उपरान्त भी अवार्ड राशि की पालना को अनिश्चितकाल तक रोके जाने का कोई न्यायोचित कारण नहीं पाया। गत पेशी पर जिला कलेक्टर एवं सीएमएचओ को खाता कुर्क करवाने के लिए अवगत करा दिया था। राज्य सरकार की ओर से जिला कलेक्टर द्वारा संचालित किए जा रहे एसबीआई के कोषालय में पीडी खाता 100 में से परिवादी को देय राशि 5 लाख 34 हजार 166 रूपए को उपरोक्त खाते से कुर्क कर परिवादी के नाम चैक या डीडी बनाकर न्यायालय में जमा कराने के आदेश दिए। आदेश की एक प्रति जिला कलेक्टर एवं कोषाधिकारी को भी जारी की जाए। अगर नियत समयावधि में पालना न करने पर जिला कोष अधिकारी व एसबीआई बैंक प्रबंधक व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी होंगे। इस मामले की अगली सुनवाई 9 फरवरी को रखी गई है।

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