Thursday , 18 January 2018
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सजा से पहले लालू समर्थकों ने जज को किया फोन

कोर्ट में खुलासे से हड़कं

परांची। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव को देवघर चारा घोटाले के मामले में गुरूवार को सजा नहीं सुनाई गई। उन्हें इस मामले में पहले ही दोषी करार दिया जा चुका है। लालू को शुक्रवार को सजा सुनाई जाएगी।
सुनवाई के दौरान सीबीआई के विशेष जज शिवपाल सिंह ने कहा कि लालू के समर्थक उन्हें फोन कर पूछते हैं कि क्या होगा। इस पर राजद नेता शिवानंद तिवारी ने कहा है, अगर ऐसा है तो जज को इस मामले की शिकायत करनी चाहिए। रांची की विशेष सीबीआई कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान गुरूवार को लालू प्रसाद भी मौजूद रहे। जज शिवपाल सिंह और लालू प्रसाद यादव के बीच हुए सवाल-जवाब :1) जज ने लालू प्रसाद यादव से कहा, मुझे आपके शुभचिंतकों ने दूर-दूर से फोन किया। मैं उनसे कह देता हूं कि मुझे भी नहीं पता कि केस में क्या फैसला आएगा।
2) लालू ने अपनी सफाई दी कि सब जगदीश शर्मा ने रफा-दफा किया, मैं इस मामले में निर्दोष हूं।
3) जज ने लालू से कहा, आपने त्वरित कार्रवाई नहीं की। मामले को लटका कर रखा। आप वित्त मंत्री और मुख्यमंत्री थे।
4) जज ने कहा, हाई कोर्ट के आदेश का पालन होता तो बात कुछ और होती।
5) लालू ने कोर्ट की अवमानना पर अनुरोध किया। कोर्ट ने कहा सब लोगों ने बदजुबानी की है।
5) कोर्ट ने कहा, हम सर्वे-सर्वा नहीं हैं।
6) कोर्ट ने लालू से कहा, यहां कोई जात-पात नहीं होता।
7) इस पर लालू ने चुटकी ली, अब तो इंटरकास्ट मैरिज भी होती है।
8) लालू ने कहा, हम वकील भी हैं तो जज ने कहा, आप डिग्री ले लीजिए लोगों को प्रेरणा मिलेगी।
9) लालू ने फिर से आग्रह किया कि मामले की जल्द सुनवाई हो।
10) लालू ने कहा कि रांची में बहुत ठंड होती है। शुक्रवार से इस मामले में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग होगी। लालू ने कहा, हम कोर्ट आ जाएंगे। इस पर जज ने कहा कि कल क्या होगा, कल ही देखेंगे।कितनी हो सकती है सजा
लालू के वकील चितरंजन प्रसाद ने बताया कि इस मामले में अगर लालू और अन्य को दोषी ठहराया जाता है तो उन्हें अधिकतम 7 साल और न्यूनतम 1 साल की कैद की सजा होगी। हालांकि, सीबीआई अधिकारियों के मुताबिक, इस मामले में गबन की धारा 409 के तहत 10 साल और धारा 467 के तहत आजीवन कारावास की भी सजा हो सकती है। लालू को अगर 3 साल से कम की सजा सुनाई जाती है तो उन्हें तुरंत बेल मिल सकती है जबकि इससे अधिक सजा पर वकीलों को बेल के लिए हाईकोर्ट का रूख करना पड़ेगा।

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