Friday , 24 November 2017
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कुछ पल के विराम के बाद महागठबंधन में फिर असंतोष

पटना। बिहार में सत्तारूढ़ महागठबंधन के बड़े घटक राष्ट्रीय जनता दल और जनता दल यूनाइटेड के बीच सियासी घमासान पर कुछ पल के लिए लगे विराम के बाद एक बार फिर से दोनों दलों में असंतोष नजर आ रहा है ।
महागठबंधन के प्रमुख घटक जदयू के प्रदेश प्रवक्ता एवं विधान परिषद के सदस्य नीरज कुमार ने गुरूवार को कहा कि महागठबंधन बनाने के लिए उनकी पार्टी ने कुर्बानी दी है। उन्होंने पूर्व मंत्री शिवानंद तिवारी की ओर इशारा करते हुए कहा कि राजद बचाव के लिए दूसरे दलों के नेताओं की आउटसोर्सिंग करना बंद करे। तिवारी कौन होते हैं जवाब देने वाले। राजद को आरोपों पर स्वयं ही सफाई देनी होगी।
कुमार ने कहा कि न्यूनतम साझा कार्यक्रम के आधार पर ही महागठबंधन को जनादेश मिला है, जिसमें भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति रही है । आरोप के बचाव के लिए सरकार नहीं होती । उन्होंने कहा कि राजद का यह कहना कि 27 अगस्त को पार्टी की होने वाली रैली में आरोप का जवाब दिया जायेगा, यह उचित नहीं है क्योंकि रैली में राजनीतिक जवाब ही होगा। बिहार के लोगों को जवाब चाहिए और उनकी पार्टी राजद से ङ्क्षबदुवार तथ्यपरक जवाब की उम्मीद रखती है।
जदयू के मुख्य प्रवक्ता एवं विधान परिषद के सदस्य संजय ङ्क्षसह ने पूर्व मंत्री तिवारी को ‘आस्तीन का सांपÓ बताया और कहा कि राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव को भी उन्होंने ‘नटवर लालÓ कहा था। उन्होंने कहा कि तिवारी महागठबंधन में दरार पैदा करना चाहते हैं। वैसे तिवारी किस दल में हैं उन्हें स्पष्ट करना चाहिए।
जदयू के ही प्रदेश प्रवक्ता अजय आलोक ने कहा कि उनकी पार्टी साजिश नहीं करती बल्कि सीधा सवाल पूछती है । तथ्यपरक जवाब नहीं मिलना महागठबंधन की सेहत के लिए ठीक नहीं है। उन्होंने पूर्व मंत्री तिवारी को ‘दुर्लभ मूर्खÓ बताया और कहा कि उन्होंने (तिवारी) राजद अध्यक्ष यादव और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दोनों से ही विश्वासघात किया है।
वहीं, महागठबंधन की सरकार में राजद कोटे से वित्त मंत्री अब्दुलबारी सिद्दीकी ने कहा कि पार्टी विधायक दल की बैठक में यह निर्णय लिया जा चुका है कि उप मुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव इस्तीफा नहीं देंगे । पार्टी महत्वपूर्ण है चाहे यादव हों या राजद का कोई विधायक।
वहीं, दूसरी ओर महागठबंधन के अन्य घटक कांग्रेस के विधायक शकील खान ने पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी को पत्र लिखकर बिहार विधान मंडल के मानसून सत्र से पूर्व महागठबंधन में चल रहे विवाद को समाप्त कराने की मांग की है । वर्तमान समय में कांग्रेस का रूख स्पष्ट होना चाहिए तथा राजद और जदयू का विवाद बैठकर हल किया जा सकता है।

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