Monday , 21 May 2018
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कर्नाटक चुनाव के बाद मिलेगा नया प्रदेशाध्यक्ष!

शाह-वसुंधरा मुलाकात के बाद भी तय नहीं प्रदेश अध्यक्ष

जयपुर। राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष कौन होगा, इस बात पर पार्टी के अंदर ही बवाल मचा हुआ है। गौर हो कि इसी साल नवंबर-दिसंबर में राजस्थान में विधानसभा चुनाव होने हैं और पिछले 16 अप्रैल से राजस्थान भाजपा में पार्टी की कमान संभालने वाला कोई नहीं है।
शुक्रवार को वसुंधरा राजे और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की मुलाकात के बाद राजे मंत्रिमंडल के सिपहसालार और भाजपा के वसुंधरा समर्थक विधायक वापस जयपुर लौट आए हैं, लेकिन अभी तक साफ नहीं हो पाया है कि पार्टी का अगला प्रदेश अध्यक्ष कौन होगा।
भाजपा मुख्यालय से निकलते वक्त दिल्ली में वसुंधरा राजे ने पत्रकारों से इशारे में कहा कि ‘‘आप मेरे चेहरे पर खुशी देख सकते हो’’। वसुंधरा के इस बात को लेकर राजस्थान में तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। इधर, जिस तरह से केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत का प्रदेश अध्यक्ष के लिए नाम तय करने के बावजूद भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व नाम की घोषणा नहीं कर पा रहा है, उसे देखकर लगता है कि वसुंधरा इस बार भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व पर भारी पड़ गई हैं।
यह पहला मौका है जब भाजपा आलाकमान खुद के फैसले को लागू कराने में नाकाम रहा है। वसुंधरा राजे ने इस तरह से चुनौती दी है कि इसे लागू किया गया तो राजस्थान में होने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा की लुटिया डूब सकती है। राजस्थान भाजपा में राजपूत अध्यक्ष न बने इसके लिए वसुंधरा राजे ने अपने राजपूत मंत्री और विधायकों को आगे कर दिया।
देवी सिंह भाटी ने तो खुलेआम गजेंद्र सिंह शेखावत पर आरोप लगा दिए। लेकिन अनुशासन का डंडा चलाने के लिए माने जाने वाला पार्टी का राष्ट्रीय नेतृत्व इस बार वसुंधरा के आगे बौना है। माना जा रहा था कि अमित शाह से मुलाकात के बाद मामला सुलझ जाएगा लेकिन हुआ कुछ भी नहीं। कौन अध्यक्ष बनेगा इसे लेकर अभी भी अटकलों का दौर जारी है। ऐसा कहा जा रहा है कि शेखावत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पसंद हैं, ऐसे में अमित शाह अब यह फैसला नहीं ले सकते (शेष पेज 8 पर)

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