Monday , 24 July 2017
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एसबीसी आरक्षण में सरकार को छह सप्ताह की राहत

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courtजयपुर। राजस्थान उच्च न्यायालय ने विशेष पिछडा वर्ग आरक्षण पर राज्य सरकार को इस प्रकरण को उच्चतम न्यायालय में पैरवी के लिये आगामी छह सप्ताह तक का समय दिया है।
न्यायाधीश एम एन भंडारी और जे के रांका की खंडपीठ ने राज्य सरकार की ओर से विशेष पिछडा वर्ग के आरक्षण पर दिये गये न्यायालय के पूर्व के आदेशों में चार सप्ताह की छूट देने संबंधी याचिका पर सुनवाई करते हुये यह आदेश दिये। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि इस संबंध में पूर्व में की गयी नियुक्तियों के साथ किसी तरह की छेडछाड़ नहीं की जायेगी और नयी नियुङ्क्षक्तया नहीं की जा सकेगी।
राज्य सरकार की ओर से इस प्रकरण की मजबूती से पैरवी के लिये गुजरात के अतिरिक्त सोलिसिटर जनरल तुषार मेहता विशेष रूप से जयपुर आये । उनके साथ महाधिवक्ता नरपत मल लोढा, राजदीप देसाई सहित कई अन्य अधिवक्ता भी अदालत में मौजूद थे। राज्य सरकार की ओर से न्यायालय में अपील दाखिल कर न्यायालय द्वारा पूर्व में आरक्षण को रद्द करने में छूट देने का आग्रह किया था।
राजस्थान उच्च न्यायालय द्वारा गुरूवार को दिये गये आदेशों से राज्य सरकार के साथ ही प्रभावित जातियों को राहत मिली है और सरकार को इस मामले को उच्चतम न्यायालय में पैरवी करने का मौका मिल गया है।
उल्लेखनीय है कि राजस्थान उच्च न्यायालय ने गत नौ दिसम्बर को राजस्थान आरक्षण अधिनियम 2015 के तहत गुर्जर सहित पांच जातियों को दिये गये पांच प्रतिशत विशेष पिछड़ा वर्ग आरक्षण को गैर कानूनी असंवैधानिक बताते हुये इसे निरस्त कर दिया था। न्यायालय के इस निर्णय के बाद प्रदेश में गुर्जर सहित बंजारा, गाडिया लुहार, राइका और गडरिया समूह के लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त हो गया था।
राज्य सरकार ने सितम्बर, 2015 में विधानसभा में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास किया था जिसे राज्यपाल ने भी मंजूरी दे दी थी। इस प्रस्ताव से राजस्थान में इन वर्गो के लोगों को शिक्षा एवं नौकरियों में आरक्षण दिया गया था। लेकिन कुछ वर्ग ने उच्चतम न्यायालय के 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण नहीं देने के प्रावधान का हवाला देते हुये उच्च न्यायालय में अपील दाखिल की थी।

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