Thursday , 21 June 2018
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अफसर-नेताओं को बचाने वाला बिल वापस

जयपुर। सोमवार को मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने विधानसभा के बजट सत्र में लोकसेवकों के खिलाफ केस दर्ज कराने से पहले सरकार से मंजूरी लेने संबंधी बिल को वापस ले लिया।

विधानसभा के पिछले सत्र में ये बिल टेबल किया गया था, लेकिन भारी विरोध के कारण इसे प्रवर समिति को सौंप दिया गया था।
बिल को वापस लेते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस बिल को हमने लेप्स होने दिया, जब यह कानून ही नहीं बना तो काले कानून की बात करना गलत है। सीएम ने कहा कि वे इस बिल को वापस ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि ये राजस्थान दंड विधियां संशोधन विधेयक बना ही नहीं था, इसलिए इसे सरकार वापस लेती है।कौन-कौन था बिल के दायरे मेंबिल के दायरे में अफसरों के साथ ही नेता भी हैं। सरकार ने इस बिल से पहले जारी किए अध्यादेश में लोकसेवक का दायरा बढ़ा दिया। इसके तहत किसी भी कानून के तहत लोकसेवक कहलाने वाले इसमें शामिल कर दिए। यानी कि पंच-सरपंच से लेकर विधायक तक पर सरकार की मंजूरी के बिना केस दर्ज नहीं हो पाएगा।

  • नाबालिगों के दुष्कर्मियों को मृत्युदंड का प्रावधान
  • बजरी के लिए नई नीति बनेगी : वसुंधरा

जयपुर। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने नाबालिग बालिकाओं के साथ दुष्कर्म करने वालों के लिये मृत्युदंड का प्रावधान करने और बजरी के लिये नई नीति बनाने की घोषणा करते हुये कहा कि राज्य के नवनिर्माण के लिये सरकार प्रतिबद्ध है।
श्रीमती राजे ने सोमवार को विधानसभा में वर्ष 2018-19 के बजट पर हुई चर्चा का जवाब देते हुये कांग्रेस पर आरोप लगाया कि सरकार द्वारा पेश बजट पर कहने के लिये कुछ नहीं होने के कारण विपक्ष शोर शराबा कर सदन का समय बर्बाद कर रहे है।

अपने जवाब के दौरान उन्होंने शेरों शायरी करते हुये कहा
‘काम करो ऐसे ही पहचान बन जाये, हर कदम चलो ऐसे कि निशान बन जाये।
राजनीति तो सब करते है पर राजधर्म ऐसे करों कि मिसाल बन जाये ।।’
शून्यकाल में दो बार स्थगन के बाद सायं 4 बजे कार्यवाही शुरू होते ही नेता प्रतिपक्ष को स्पष्टीकरण देने का पूरा मौका दिये जाने की मांग को लेकर कांग्रेसी सदस्य वैल में आ गये ओर आसन से नेता प्रतिपक्ष को अपनी बात कहने देने का समय देने की मांग करते रहे और वैल में आकर नारेबाजी करने लगे। कांग्रेसी सदस्य लोकतंत्र में तानाशाही नहीं चलेगी नहीं चलेगी और झूठी घोषणाएं बंद करो बंद करो के नारे लगाते रहे। मुख्यमंत्री के जवाब के दौरान सत्ता पक्ष के सदस्य बार बार मेजें थपथपाकर स्वागत करते रहे।

आसन की ओर से पहले नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी को बजट पर वक्तव्य देने का मौका दिया लेकिन डूडी द्वारा अपना स्पष्टीकरण देना शुरू करने के कारण विधानसभा अध्यक्ष कैलाश मेघवाल ने इसको कार्यवाही में शामिल नहीं करने के निर्देश देते हुये मुख्यमंत्री को जवाब देने के निर्देश दिये। सदन में पूरे समय विपक्ष द्वारा किये जा रहे हंगामा और शोर शराबे के बीच श्रीमती राजे ने कहा कि सरकार द्वारा किसानों की 50 हजार रूपये तक के कर्जा माफी के लिये पहली बार किये गये प्रावधानों से विपक्ष

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