Tuesday , 21 November 2017
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10 साल बाद जिंदा हुआ ‘चतुर्भुज प्लान’

चीन को ‘रास्ते’ पर लाने वाला ‘चक्रव्यूह’

rectangle_plan-worldनई दिल्ली। फिलीपीन्स के मनीला में हो रहे आसियान शिखर सम्मेलन में पहुंचे भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की। इस मुलाकात में नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप ने दोनों देशों की सुरक्षा और रक्षा को लेकर बातचीत की। नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप की वार्ता चीन के लिए तनाव देने वाला हो सकता है।’जब चार यार मिलेÓ
भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के बीच एक चतुर्भुज गठबंधन होने वाला है. माना जा रहा है कि यह गठबंधन मुख्य रूप से चीन को नियंत्रित करने के लिए बनाया जा रहा है। दरअसल, इस गठबंधन की पहल दक्षिण चीन सागर में चीन की बढ़ती आक्रामकता को ध्यान में रखते हुए की गई है। सामरिक महत्व के एशिया प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका भारत के लिए बड़ी भूमिका की वकालत कर रहा है। लिहाजा, रविवार को इन चारों देशों के अधिकारियों की बैठक हुई और इस गठबंधन को अमलीजामा पहनाने को लेकर जरूरी बातचीत हुई।चतुर्भुज प्लान से घबराया चीन
भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के बीच पहली चतुर्पक्षीय बैठक से टेंशन में आए चीन ने इस पर कोई सीधी प्रतिक्रिया तो नहीं दी है, लेकिन इस समूह से उसे दूर रखे जाने पर सवाल जरूर खड़े किए हैं। साथ ही चीन ने उम्मीद जताई है कि हिंद-प्रशांत की नई संकल्पना उसके खिलाफ नहीं है। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने सोमवार को यह बात कही।
हिंद-प्रशांत संकल्पना और चतुर्पक्षीय बैठक पर सवालों का जवाब देते हुए शुआंग ने कहा, संबंधित प्रस्ताव पारदर्शी और समग्र होना चाहिए। साथ ही इसका राजनीतिकरण करने और संबंधित पक्षों को बाहर करने से बचा जाना चाहिए। यह पूछे जाने पर कि संबंधित पक्षों को बाहर करने से उनका तात्पर्य चीन को इसमें शामिल नहीं करने से है, तो गेंग ने कहा कि चीन संबंधित देशों के बीच दोस्ताना सहयोग का स्वागत करता है। उन्होंने कहा, हम उम्मीद करते हैं कि इस तरह के संबंध तीसरे पक्ष के खिलाफ नहीं होंगे और क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के अनुकूल होंगे। यह आम संकल्पना है और मेरा मानना है कि इस तरह का रूख किसी भी प्रस्ताव पर लागू होता है।

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