Sunday , 27 May 2018
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मोदी का दुनिया को संदेश ‘स्वास्थ्य, समृद्धि, शांति के लिए भारत आएं’

दावोस। वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम के उद्घाटन भाषण में पीएम नरेंद्र मोदी ने दुनिया की चुनौतियों को गिनाया तो इनसे निपटने के लिए कई उपाय भी सुझाए। ‘‘क्लाइमेंट चेंज, आतंकवाद और संरक्षणवाद’’ को दुनिया के सामने 3 सबसे बड़ी चुनौती बताते हुए प्र.म. ने नाम लिए बिना दुनिया की बड़ी ताकतों को आईना दिखाया। उन्होंने अच्छे और बुरे आतंकवाद को लेकर अमेरिका और पश्चिमी देशों को घेरा तो संरक्षणवाद को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने यह कहकर चीन को भी लपेटा कि भारत किसी दूसरे देश की भूमि पर नजर नहीं रखता है। पीएम ने दुनिया की दरारों और दूरियों को पाटने के लिए शास्त्रों, उपनिषद, गौतम बुद्ध, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के विचारों का सहारा लिया। उन्होंने दुनिया को भारत में निवेश के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि अच्छे स्वास्थ्य और समृद्धि और शांति के लिए भारत आएं।
‘‘भारत ने हजारों साल पहले कहा- पूरी दुनिया परिवार’’
मोदी ने कहा, भारत, भारतीयता और भारतीय विरासत का प्रतिनिधि होने के नाते मेरे लिए इस फोरम का विषय जितना समकालीन है उतना ही समयातीत भी है। समयातीत इसलिए क्योंकि भारत में अनादिकाल से हम मानव मात्र को जोड़ने में विश्वास करते आए हैं, उसे तोड़ने में नहीं उसे बांटने में नहीं। हजारों साल पहले संस्कृत भाषा में लिखे गए ग्रंथों में भारतीय चिंतकों ने कहा, ‘‘वसुधैवकुटुम्बकम्’’। यानी पूरी दुनिया एक परिवार है। यह धारणा निश्चित तौर पर आज दरारों और दूरियों को मिटाने के लिए ज्यादा सार्थक है।
‘क्लाइमेंट चेंज सबसे बड़ी चुनौती’
प्र.म. ने क्लाइमेंट चेंज को दुनिया की सबसे बड़ी चुनौती बताया। उन्होंने कहा, मैं दुनिया की सिर्फ तीन प्रमुख चुनौतियों का जिक्र करूंगा जो मानव सभ्यता के लिए सबसे बड़े खतरे पैदा कर रही हैं। पहला खतरा है क्लाइमेंट चेंज का। ग्लेशियर पीछे हटते जा रहे हैं। आर्कटिक की बर्फ पिघलती जा रही है। बहुत से द्वीप डूब रहे हैं या डूबने वाले हैं। बहुत गर्मी और बहुत ठंड, बेहद बारिश और बाढ़ या बहुत सूखा। अतिवादी मौसम का प्रभाव दिन-ब-दिन बढ़ रहा है। हर कोई कहता है कि कार्बन उत्सर्जन को कम करना चाहिए। लेकिन ऐसे कितने देश या लोग हैं जो विकासशील देशों और समाजों को उपयुक्त तकनीक उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक संसाधन मुहैया कराने में मदद करना चाहते हैं।
‘‘भारतीय शास्त्रों की सीख’’
प्र.म. ने कहा, हजारों साल पहले भारत में लिखे गए प्रमुख उपनिषद ‘‘इशोपनिषद’’ की शुरुआत में तत्वद्रष्ट्रागुरू ने अपने शिष्यों से परिवर्तनशील जगत के बारे में कहा- तेनत्यक्तेनभुन्जीथा यानी संसार में रहते हुए उसका त्यागपूर्वक भोग करो। ढाई हजार साल पहले भगवान बुद्ध ने अपरिग्रह यानी आवश्यकता के अनुसार इस्तेमाल को अपने सिद्धांतों में प्रमुख स्थान दिया। भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का टस्ट्रीशिप का सिद्धांत भी आवश्यकता यानी नीड के अनुसार उपयोग और उपभोग करने के पक्ष में था। लालच पर आधारित शोषण का उन्होंने सीधा विरोध किया। भारतीय परंपरा में प्रकृति के साथ गहरे तालमेल के बारे में। हजारों साल पहले शास्त्रों में मनुष्यमात्र को बताया गया कि हम सब मानव पृथ्वी की संतान हैं।
‘‘आतंकवाद से भी ज्यादा खतरनाक- अच्छे-बुरे आतंकवाद का फर्क’’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद को दूसरा सबसे बड़ा खतरा बताते हुए कहा कि आतंकवाद जितना खतरनाक है उससे भी ज्यादा खतरनाक है अच्छे और बुरे आतंकवाद का फर्क पैदा करना। उन्होंने कहा कि यह भी काफी दुखद है कि पढ़े-लिखे और संपन्न युवा भी चरमपंथ की ओर जा रहे हैं।
‘आत्मकेंद्रित हो रहे हैं कुछ देश’
पीएम नरेंद्र मोदी ने संरक्षणवाद पर निशाना साधते हुए कहा, तीसरी चुनौती मैं यह देखता हूं कि बहुत से समाज और देश ज्यादा से ज्यादा आत्मकेंद्रित होते जा रहे हैं। ऐसा लगता है कि ग्लोबलाइजेशन अपने नाम के विपरीत सिकुड़ रहा है। इस प्रकार की मनोवृत्तियों और गलत प्राथमिकताओं के दुष्परिणाम को क्लाइमेट चेंज या आतंकवाद के खतरे से कम नहीं आंका जा सकता। हालांकि हर कोई इंटरकनेक्टेड विश्व की बात करता है, लेकिन ग्लोबलाइजेशन की चमक कम हो रही है। ग्लोबलाइजेशन के विपरीत संरक्षणवाद की ताकतें सिर उठा रही हैं। इसका परिणाम है कि नए-नए प्रकार के टैरिफ और नॉन टैरिफ बैरियर देखने को मिलते हैं। द्विपक्षीय और बहुपक्षीय व्यापार समझौते रूक गए हैं।
‘‘दुनिया की बड़ी ताकतों में हो सहयोग’’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि विश्व की बड़ी ताकतों के बीच सहयोग और संबंध की जरूरत है। उन्होंने कहा, साझा चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए हमें अपने मतभेदों को दरकिनार करके एक व्यापक दृष्टि बनानी होगी। दूसरी आवश्यकता है कि नियमों पर आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का पालन करना पहले से भी ज्यादा जरूरी हो गया है।
विश्व में तमाम तरह के फैक्चर और तमाम तरह की दरारों को देखते हुए, यह आवश्यक है कि हमारे साझा भविष्य के लिए हम कई दिशाओं पर ध्यान दें।
‘‘शांति के लिए भारत का योगदान सबसे बड़ा’’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया की शांति में भारत के योगदान पर रोशनी डाली और कहा, पिछली शताब्दी में जब विश्व दो विश्वयुद्धों के संकटों से गुजरा तब अपना कोई निजी स्वार्थ न होते हुए भी भारत शांति और मानवता के उच्च आदर्शों की सुरक्षा के लिए खड़ा हुआ। डेढ़ लाख से भी अधिक भारतीय सैनिकों ने अपनी जान दी। ये वही आदर्श हैं जिनके लिए संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना के बाद से भारत ने यूएन पीस कीपिंग ऑपरेशंस में सैनिकों का सबसे बड़ी संख्या में योगदान किया है।

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