Sunday , 24 September 2017
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भारत को यूं ‘बड़ी शक्ति’ बनाना चाहते ट्रंप

वॉशिंगटन। ट्रंप प्रशासन ने कहा है कि वह एफ-18 और एफ-16 लड़ाकू विमानों की भारत को बिक्री का मजबूती से समर्थन करता है। साथ ही ट्रंप प्रशासन ने जोर देकर कहा कि इन प्रस्तावों में भारत-अमेरिकी रक्षा संबंधों को अगले स्तर पर ले जाने की क्षमता है। प्रशासन ने भारत को खतरनाक पड़ोसियों से घिरा हुआ भी बताया।
दक्षिण और मध्य एशिया मामलों की कार्यवाहक सहायक और उप विदेश मंत्री ऐलिस वेल्ज ने लिखित बयान में कांग्रेस की उपसमिति को बताया, भारत के साथ रक्षा सहयोग द्विपक्षीय संबंधों के लिए एक महत्वपूर्ण स्तंभ साबित होगा, और अमेरिका चाहता है कि भारत-प्रशांत क्षेत्र में भारत वास्तविक सुरक्षा प्रदाता बने। ट्रंप प्रशासन ने कांग्रेस को बताया कि वह बोइंग और लॉकहीड मार्टिन के लड़ाकू विमानों एफ-18 और एफ-16 की बिक्री के प्रस्ताव का जोरदार समर्थन करता है।
वेल्ज ने कहा कि यह क्षेत्र वैश्विक व्यापार और वाणिज्य का प्रमुख बिंदू है जहां विश्वभर के 90 हजार कमर्शल जहाजों में से करीब आधे गुजरते हैं और इनमें से कई अमेरिका से हैं। तेल की वैश्विकखरीद-बिक्री के मालवहन का दो-तिहाई हिस्सा इस क्षेत्र से गुजरता है। वेल्ज ने कहा कि भारत-एशिया प्रशांत क्षेत्र में धरती की आधी आबादी रहती है और यहां दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से कुछ हैं। भारत जैसे समान सोच वाले साझेदारों के साथ काम करना, जिसमें अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को बनाए रखने की रणनीतिक और आर्थिक क्षमता है हमारे लिए फायदेमंद है, इस व्यवस्था ने बीते 7 दशक में मानवता की काफी सेवा की है। अपनी सुरक्षा साझेदारी में हम अब जो निवेश करेंगे उसका फायदा हमें आने वाले दशकों में मिलेगा।
वेल्ज ने जोर देते हुए कहा कि लोकतांत्रिक देश होने के नाते भारत और अमेरिका दोनों की अहम प्राथमिकता आतंकवाद से मुकाबला करना है। ऐलिस वेल्ज ने बताया कि विदेश विभाग के आतंकरोधी सहायता कार्यक्रम (एटीए) के तहत साल 2009 से अब तक 1100 से अधिक भारतीय सुरक्षाकर्मियों को ट्रेनिंग दी गई है। उन्होंने कहा, भारत खतरनाक पड़ोसियों के बीच है जहां आतंकी हमलों में भारतीय और अमेरिकी दोनों ही मारे जा रहे हैं। अपने आतंकरोधी सहयोग के विस्तार के लिए संयुक्त प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण जरूरी हैं। वेल्ज ने कहा कि भारत-प्रशांत क्षेत्र में भारत अमेरिका के सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदारों में से एक है। राष्ट्रपति डॉनाल्ड ट्रंप के शब्दों में भारत और अमेरिका के बीच संबंध कभी भी इतने मजबूत और इससे बेहतर नहीं रहे।

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