Thursday , 18 January 2018
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पाक के साथ आतंक पर वार्ता हो सकती

भारत के रूख में बड़ा बदलाव

नई दिल्ली। पाकिस्तान के प्रति भारत के रूख में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। भारत ने कहा है कि पड़ोसी देश के मामले में हम कहते रहे हैं कि बातचीत और आतंक दोनों साथ-साथ नहीं चल सकते, लेकिन आतंक पर बातचीत निश्चित रूप से आगे बढ़ सकती है। भारत ने माना है कि हाल में दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मिले थे।
भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार नसीर खान जंजुआ ने 26 दिसंबर को थाइलैंड की राजधानी बैंकॉक में दो घंटे तक मुलाकात की थी। इस मुलाकात की मीडिया में आई रिपोर्ट पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने तब कोई बयान नहीं जारी किया था।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने गुरूवार को यहां कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत की प्रक्रिया पर हम यह कहते रहे हैं कि बातचीत और आतंक दोनों साथ नहीं चल सकते, लेकिन ऐसी कई व्यवस्थाएं हैं जिनके तहत भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत जारी है। मसलन दोनों देशों की सेनाओं के डीजीएमओ आपस में बातचीत करते रहते हैं। बीएसएफ और पाकिस्तान के रेंजर्स भी आपस में बातचीत करते रहते हैं। इसी तरीके से दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक हुई थी। हम कहते रहे हैं कि बातचीत और आतंक दोनों साथ साथ नहीं चल सकते लेकिन आतंक पर बातचीत निश्चित रूप से आगे बढ़ सकती है। इस बातचीत में हमने सीमा पार से आतंकवाद का मुद्दा उठाया। बातचीत पूरी तरह से इस मुद्दे पर फोकस रही। हम यह सुनिश्चित करना चाहेंगे कि आतंक पूरे क्षेत्र को प्रभावित ना करे।
मुलाकात से एक दिन पहले पाकिस्तान में कैद भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव की मुलाकात उनकी मां और पत्नी से कराई गई थी। इस मुलाकात के दौरान पाकिस्तान के रूख को भारत में अपमानजनक माना गया था। प्रवक्ता से पूछा गया कि क्या मुलाकात में कुलभूषण जाधव के परिवार के साथ हुई बदसलूकी का मुद्दा भी उठाया गया। इस पर प्रवक्ता ने कहा कि बातचीत की तारीख पहले ही तय हो गई थी और जाधव के परिवार के साथ जो हुआ, वह उस वक्त का मामला था।
दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की अगली बैठक कब होगी, इस बारे में पूछे जाने पर प्रवक्ता ने कहा कि इस तरह की बातचीत पहले से घोषित नहीं की जाती है क्योंकि यह ऑपरेशनल लेवल बातचीत है। गौरतलब है कि दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार 2015 में भी मिले थे। इसके तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चौंकाने वाले अंदाज में लाहौर पहुंचे थे।

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