Tuesday , 21 November 2017
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‘दो महान लोकतंत्रों की सेनाएं भी होनी चाहिए शानदार’

मोदी-ट्रंप का संकल्प

modi_trumph_manilaमनीला/वॉशिंगटन। ‘दुनिया के दो महान लोकतंत्रों के पास दुनिया की सबसे शानदार सेनाएं भी होनी चाहिए।Ó भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के बीच सोमवार को हुई मुलाकात के बाद दोनों देशों ने यह अभूतपूर्व और ‘सबका ध्यान खींचनेÓ वाला संकल्प लिया। फिलीपींस के मनीला में दोनों नेताओं की मुलाकात आसियान सम्मेलन से इतर हुई।
अमेरिका की सत्ता पर काबिज प्रशासन (डेमोक्रैटिक और रिपब्लिकन) ने ग्लोबल शक्ति के रूप में भारत के उभार का समर्थन किया है, लेकिन इसके पहले कभी भी इतने साफ तौर पर सैन्य सहयोग को लेकर बातें नहीं कही जाती थीं। हालांकि ट्रंप अमेरिका के मित्र देशों और सहयोगियों को सैन्य सामग्री बेचने के हमेशा से इच्छुक रहे हैं, लेकिन जिस तरह ट्रंप प्रशासन लगातार ‘एशिया-प्रशांतÓ की जगह ‘हिंद-प्रशांतÓ शब्द का इस्तेमाल कर रहा है, उससे यह साफ लग रहा है कि वह भू-रणनीतिक वजहों से चीन के मुकाबले भारत की सैन्य क्षमता को बढ़ाने में मदद करना चाहता है। सामरिक महत्व के हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका भारत के लिये बड़ी भूमिका की वकालत कर रहा है।
वाइट हाउस की ओर से जारी बयान में कहा गया, दोनों नेताओं ने भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक सहयोग पर विस्तार से बात की और मुक्त व खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र को लेकर अपनी प्रतिबद्धता साझा की। उन्होंने बड़े रक्षा सहयोगियों के तौर पर अपना सहयोग बढ़ाने का यह कहते हुए संकल्प लिया कि दुनिया के दो महान लोकतंत्रों के पास दुनिया की सबसे शानदार सेनाएं भी होनी चाहिए। जाहिर है कि वाइट हाउस से जारी यह बयान भारत की सहमति के बाद ही आया होगा। इसका सीधा मतलब यह है कि भारत का रूख भी इससे अलग नहीं है। खास तौर पर इस बात को ध्यान में रखते हुए कि भारत, अमेरिका की पहल पर चार देशों (भारत-अमेरिका-जापान-ऑस्ट्रेलिया) के गठजोड़ का हिस्सा बन चुका है।
अमेरिका के बयान में कहा गया है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने इस बात की तारीफ की कि हाल के महीनों में भारत ने अमेरिका से 10 मिलियन बैरल से ज्यादा तेल खरीदा है। ट्रंप ने उम्मीद जाहिर की है कि मजबूत ऊर्जा सहयोग दोनों देशों के लिए इकनॉमिक गेम चेंजर साबित होगा।
भारत ने हाल ही में आधी दुनिया दूर अमेरिका से तेल खरीदना शुरू किया है। जबकि पारंपरिक रूप से भारत अब तक खाड़ी क्षेत्र से ही तेल का आयात करता आया है। इस कदम ने ना सिर्फ वॉशिंगटन और अमेरिकी सांसदों को खुश कर दिया है बल्कि एक क्षेत्र पर (जहां स्थिरता और विश्वसनीयता हमेशा संदिग्ध रही है) भारत की निर्भरता भी कम हुई है।
ट्रंप-मोदी मुलाकात पर वाइट हाउस के बयान में किसी भी द्विपक्षीय दौरे का जिक्र नहीं था। इवांका ट्रंप का नाम लिए बगैर बयान में कहा गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि वह आगामी वैश्विक उद्यमी सम्मेलन (जीइएस) में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की अगवानी करने के लिए उत्सुक हैं। इस दौरान भारत और अमेरिका के बीच इनोवेशन और सहयोग पर बात होगी। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की बेटी इवांका ट्रंप इसी महीने के आखिर में हैदराबाद में आयोजित होने वाले सम्मेलन में हिस्सा लेंगी। इस इवेंट में इवांका ही आकर्षण का केन्द्र रहने वाली हैं। माना जा रहा है कि इस यात्रा से अगले साल ट्रंप के भारत दौरे का मार्ग प्रशस्त होगा।

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