Thursday , 23 November 2017
Breaking News
Home » International » ‘खून बहाने वाले इन्सानियत न समझाएं’

‘खून बहाने वाले इन्सानियत न समझाएं’

न्यूयॉर्क। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन में दुनिया के सामने पाकिस्तान को एक बार फिर एक्सपोज कर दिया। पाकिस्तान के पीएम की तरफ से लगे आरोपों को सुषमा ने न केवल खारिज किया, बल्कि दुनियाभर के सामने पाकिस्तान को जमकर लताड़ लगाई। सुषमा ने कहा कि हैवानियत की हदें पार करने वाला पाकिस्तान आज भारत को इंसानियत सिखाने चला है। सुषमा ने तंज कसा, ‘हमने आईआईटी और आईआईएम बनाए वहीं पाकिस्तान ने लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठन बनाए।Ó
संयुक्त राष्ट्र में सुषमा स्वराज के निशाने पर पाकिस्तान के अलावा चीन और अमेरिका भी रहे। सुषमा स्वराज ने अपनी बात की शुरूआत तो प्रधानमंत्री मोदी द्वारा उठाए गए विकास कार्यों को बताने से किया, लेकिन आतंकवाद के मसले पर आते-आते विदेश मंत्री ने पाकिस्तान की जमकर क्लास लगानी शुरू कर दी। सुषमा स्वराज ने कहा, सभापति जी, हम तो गरीबी से लड़ रहे हैं, लेकिन पाकिस्तान हमसे लड़ रहा है। पाकिस्तान के पीएम ने हम पर आरोप लगाए। हम पर आतंकवाद और मानवाधिकार उल्लंघन का आरोप लगाया। जिस समय वह बोल रहे थे उस समय लोगों ने कहा कि देखो कौन बोल रहा है।
‘पीएम मोदी ने दिखाई थी शांति और दोस्ती की नीयतÓ
सुषमा स्वराज ने कहा, पाकिस्तान के पीएम ने कहा था कि जिन्ना ने पाकिस्तान को शांति और दोस्ती की नीति विरासत में दी थी। यह तो इतिहास जानता है कि जिन्ना ने कैसी विरासत दी थी लेकिन मैं याद दिलाना चाहती हूं कि पीएम मोदी ने शांति और दोस्ती की नीयत जरूर दिखाई थी। कहानी बदरंग किसने की, अब्बासी साहब इसका जवाब दें। सुषमा स्वराज ने शिमला समझौता और लाहौर घोषणापत्र का जिक्र करते हुए कहा कि हर मामले को द्विपक्षीय सुलझाने की बात हुई थी, लेकिन पाकिस्तान ने हमेशा इसका उल्लंघन किया।
सुषमा ने पूछा ऐसा सवाल, चारों खाने चित्त हुआ पाकिस्तान
सुषमा स्वराज ने अपने संबोधन में पाकिस्तान से ऐसे सवाल पूछे जिसका जवाब शायद ही पड़ोसी मुल्क के पास हो। सुषमा ने कहा कि हैवानियत की हदें पार कर सैकड़ों मासूमों को मौत के घाट उतारने वाला आज यहां (यूएन में) खड़ा होकर हमे मानवता सिखा रहा है। सुषमा ने कहा, सभापति जी मैं पाकिस्तान से एक सवाल पूछना चाहती हूं कि क्या कभी सोचा कि भारत और पाकिस्तान एक साथ आजाद हुए थे लेकिन आज भारत की पहचान आईटी के सुपर पावर के रूप में बनी जबकि पाकिस्तान की दहशतगर्द मुल्क के रूप में। इसकी एक ही वजह थी कि पाकिस्तान से मिलने वाली आतंकवाद की चुनौतियों के बावजूद भारत में आने वाली विभिन्न दलों की सरकारों ने विकास किया।
सुषमा ने कहा कि हमने आईआईटी, आईआईएम, एम्स, बनाए पाकिस्तान ने लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और आतंकवादी ठिकाने बनाए। विदेश मंत्री यहीं नहीं रूकीं। सुषमा ने कहा कि हमने स्कॉलर्स पैदा किए, साइंटिस्ट पैदा किए, इंजिनियर पैदा किए, डॉक्टर पैदा किए, पाकिस्तान वालों आपने दहशतगर्त पैदा किए।
चीन के लिए भी सुषमा के तरकश से निकले बाण
पाकिस्तान को आतंकवाद पर घेरने के साथ-साथ सुषमा स्वराज ने चीन पर भी निशाना साधा। सुषमा स्वराज ने कहा कि पहले जब हम आतंकवाद शब्द का इस्तेमाल करते हैं तो विश्व के बड़े-बड़े देश इसे कानून व्यवस्था का मामला बता खारिज कर देते थे। अब इस समस्या से सभी पीडि़त हैं। सुषमा ने कहा कि द्विपक्षीय वार्ता या संयुक्त वार्ता में हम सभी आतंकवाद के खिलाफ बयान जारी करते हैं लेकिन यह केवल रस्म बनकर रह गई है, जब उस संकल्प को पूरा करने का समय आता है तो सारे देश अपना-अपना हित देखने लगते हैं।
सुषमा स्वराज ने कहा कि भारत संयुक्त राष्ट्र में सीसीआईटी (कॉम्प्रिहेन्शिव कन्वेंशन ऑन इंटरनैशनल टेररेजम) लेकर आया था, जिस पर कोई निर्णय नहीं हो पाया। इसकी सभी धाराओं पर सहमति बन गई पर आतंकवाद की परिभाषा पर एक राय नहीं हो पाई। सुषमा ने कहा कि अगर परिभाषा पर एकराय नहीं बनी तो एकजुट होकर कैसे लड़ेंगे। अगर सुरक्षा परिषद में आतंकवाद की लिस्टिंग पर एकराय नहीं होगी तो एकजुट होकर कैसे लड़ेंगे। हम स्वीकार करें कि आतंकवाद मानवता के लिए बड़ा खतरा है। हम एकजुटता से लडऩे का संकल्प लें और इसे अमली जामा भी पहनाएं। जाहिर तौर पर सुषमा चीन पर निशाना साध रही थीं और ऐसा कहते वक्त संदर्भ में मसूद अजहर का मामला था जिस पर चीन भारत का विरोध करता रहता है।
जलवायु परिवर्तन पर बोलते हुए ट्रंप को भी घेरा
सुषमा ने अपने संबोधन में किसी को नहीं छोड़ा। जलवायु परिवर्तन पर बोलते हुए सुषमा ने अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप का भी जवाब दिया। सुषमा ने कहा कि भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि हम पैरिस समझौते के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह प्रतिबद्दता हमारी 5000 साल की परंपरा से जुड़ी है। हम किसी लालच के लिए इस समझौते के साथ नहीं है। गौरतलब है कि पेरिस समझौते से अमेरिका के हटने की घोषणा करते हुए ट्रंप ने निर्णयों के लिए कई कारण गिनाए थे। उन्होंने कहा था, विकसित देशों से अरबों-अरब डॉलर हासिल होने के कारण भारत ने इसमें हिस्सेदारी की थी। हालांकि सुषमा इससे पहले भी इन आरोपों का जवाब दे चुकी हैं, लेकिन उन्होंने फिर एक बार दुनिया के सर्वाधिक प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय मंच का इस्तेमाल कर अपनी बात रखी।
सुषमा ने कहा कि भारतीय परंपरा है कि जब हम शांति की कामना करते हैं तो केवल प्राणी नहीं बल्कि प्रकृति की शांति की भी कामना करते हैं। प्रकृति की शांति नहीं हुई तो वह रौद्र रूप धारण कर विनाश करती है। सुषमा ने हाल में आए हार्वे और इरमा जैसे तूफान और यूएन के सम्मेलन के दौरान ही मेक्सिको में आए भूकंप का जिक्र करते हुए कहा कि हम इन चेतावनी को समझें। विकसित देश गरीबों की मदद के लिए तकनीक ट्रांसफर और ग्रीन टेक्नॉलजी देने की अपनी प्रतिबद्धता पर कायम रखें।
सुषमा ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार के प्रयास तेजी से करने की बात कही। इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र की शांति सेना को लेकर भी सुषमा ने सुधार की वकालत की। सुषमा ने कहा कि मेरे देश की संस्कृति पूरे विश्व के लोगों के सुख की कामना करती है। वसुधैव कुटुंबकम में हम सबके सुख की कामना करते हैं। सुषमा स्वराज ने संस्कृत का एक मंत्र पढ़ अपनी बात पूरी की। सुषमा ने पढ़ा, ‘सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वे सन्तु निरामया,सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद् दुख भागभवेत। ऊँ शांति: शांति: शांति:Ó यानी सभी सुखी होवें, सभी रोगमुक्त रहें, सभी मंगलमय घटनाओं के साक्षी बनें और किसी को भी दुख का भागी न बनना पड़े।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*