Saturday , 23 June 2018
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अरूणाचल सीमा पर बड़े पैमाने पर खनन में जुटा चीन

भारत के साथ बढ़ सकता है तनाव

पेइचिंग। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग की मुलाकात को अभी एक महीना भी नहीं हुआ हैं, उधर अरूणाचल सीमा पर चीन की गतिविधियों से फिर से तनाव बढऩे का खतरा पैदा हो गया है। दरअसल, चीन ने अरूणाचल प्रदेश के साथ लगती सीमा पर अपने इलाके में बड़े पैमाने पर खनन कार्य शुरू कर दिया है। इस क्षेत्र में सोना, चांदी और दूसरे कीमती खनिजों का विशाल भंडार पाया गया है, जिसकी कीमत करीब 60 अरब डॉलर आंकी गई है।
हॉन्ग कॉन्ग स्थित साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय सीमा से लगे हुए चीन के लुंझ काउंटी में माइन प्रॉजेक्ट चल रहा है। चीन अरूणाचल प्रदेश को दक्षिणी तिब्बत बताकर इस पर अपना दावा करता रहा है, ऐसे में सीमा से लगे हुए इस इलाके में उसके प्रॉजेक्ट से डोकलाम के बाद एक बार फिर दोनों देशों में तनाव पैदा हो सकता है।
अरूणाचल पर बुरी नजर? : रिपोर्ट में इस माइनिंग ऑपरेशंस को चीन द्वारा अरूणाचल प्रदेश को अपने कब्जे में लेने की उसकी रणनीति के हिस्से के तौर पर बताया गया है। इसके मुताबिक, प्रॉजेक्ट की जानकारी रखनेवाले लोगों का कहना है कि माइन्स पेइचिंग के एक महत्वाकांक्षी प्लान का हिस्सा है, जिससे वह दक्षिण तिब्बत क्षेत्र पर अपना दावा मजबूत कर सके।
डोकलाम के बाद हुई थी तनाव घटाने की पहल : यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब कुछ हफ्ते पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वुहान शहर में चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग से अनौपचारिक बैठक की। इस मुलाकात का मकसद डोकलाम सैन्य गतिरोध के बाद दोनों देशों में पैदा हुए तनाव को कम करना बताया गया था। हालांकि चीन के इस कदम से तनाव एक बार फिर बढ़ सकता है। 73 दिनों तक चले गतिरोध के बाद भारत और चीन के संबंध काफी तनावपूर्ण हो गए थे। पिछले साल अक्टूबर में डोकलाम के करीब दो महीने के बाद लुंझ का इलाका खबरों में रहा था, जब शी चिनफिंग ने लुंझ काउंटी के एक परिवार के पत्राचार का जवाब देते हुए क्षेत्र पर पेइचिंग का दावा दोहराया था। यह परिवार अरूणाचल प्रदेश की सीमा से लगे आबादी के लिहाज से चीन के सबसे छोटे कस्बे युमई में रहता है।दूसरा ‘दक्षिण चीन सागरÓ बन सकता है इलाकारिपोर्ट में कहा गया है, स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों पर चीन के दावा जताने की उसकी कोशिश और तेजी से निर्माण कार्य करने के चलते यह इलाका दूसरा साउथ चाइना सी बन सकता है। रिपोर्ट में स्थानीय अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि चीन के भूवैज्ञानिक और सामरिक मामलों के विशेषज्ञों ने हाल ही में इस इलाके का दौरा किया।

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