Thursday , 23 November 2017
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80 की उम्र में नौकरी चाहते सिन्हा

नई दिल्ली। आर्थिक नीति पर सवाल उठाने वाले पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा पर वित्त मंत्री अरूण जेटली ने पलटवार किया है । जेटली ने सिन्हा को 80 साल की उम्र में नौकरी चाहने वाला करार देते हुए कहा कि वह वित्त मंत्री के रूप में अपने रिकॉर्ड को भूल गए हैं । एक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में जेटली ने कहा कि सिन्हा नीतियों की बजाय व्यक्तियों पर टिप्पणी कर रहे हैं ।
उन्होंने आरोप लगाया कि यशवंत सिन्हा वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम के पीछे-पीछे चल रहे हैं. वह भूल चुके हैं कि कैसे कभी दोनों एक-दूसरे के खिलाफ कड़वे बोल का इस्तेमाल करते थे । हालांकि, जेटली ने सीधे-सीधे सिन्हा का नाम नहीं लिया, लेकिन कहा कि उनके पास पूर्व वित्त मंत्री होने का सौभाग्य नहीं है, न ही उनके पास ऐसा पूर्व वित्त मंत्री होने का सौभाग्य है जो आज स्तंभकार बन चुका है, इसमें जेटली का पहला उल्लेख सिन्हा के लिए और दूसरा चिदंबरम के लिए था ।
उन्होंने कहा कि पूर्व वित्त मंत्री होने पर मैं आसानी से यूपीए दो में नीतिगत शिथिलता को भूल जाता । मैं आसानी से 1998 से 2002 के एनपीए को भूल जाता । उस समय सिन्हा वित्त मंत्री थे । मैं आसानी से 1991 में बचे 4 अरब डॉलर के विदेशी मुद्रा भंडार को भूल जाता । मैं पाला बदलकर इसकी व्याख्या बदल देता । जेटली ने सिन्हा पर तंज कसते हुए कहा कि वह इस तरह की टिप्पणियों के जरिये नौकरी ढूंढ रहे हैं । सिर्फ पीछे-पीछे चलने से तथ्य नहीं बदल जाएंगे ।
जेटली ने सिन्हा पर तंज कसते हुए कहा कि अभी मेरी ऐसी स्थिति नहीं है कि मैं पूर्व वित्त मंत्री की हैसियत में लेख लिखूं, स्तंभकार बन जाऊं। जेटली ने कहा कि शुरूआत में उनकी आलोचना इसलिए की गई क्योंकि उन्होंने बदलाव जल्दी किए। उन्होंने कहा, जीएसटी के बाद सबसे बड़ी आलोचना यह हुई कि मैंने नोटबंदी के तुरंत बाद जल्दबाजी में जीएसटी लागू क्यों किया। महंगाई पर अपनी सरकार की तारीफ करते हुए जेटली ने कहा, हमें विरासत में महंगाई दर 9 से 10 प्रतिशत के पास मिली थी जो अब 3.6 प्रतिशत तक आ चुकी है। वित्त मंत्री नई दिल्ली में इंडियाञ्च70 मोदीञ्च3.5 किताब की लॉन्चिंग पर बोल रहे थे।
जेटली ने आगे कहा, हमारी सरकार ने निर्णायक कदम उठाए हैं और हमने नोटबंदी कर ब्लैक मनी पर हमला किया है। जीएसटी के सभी फैसले आम सहमति के साथ लिए गए हैं। जेटली ने कहा कि डायरेक्ट टैक्स पिछले साल की तुलना में 15.7 प्रतिशत ज्यादा आया है। राजनीतिक चंदे को पारदर्शी बनाने पर जेटली ने कहा, इस पर हम काम कर रहे हैं और यह आखिरी चरणों में है।
उन्होंने कहा कि उदारीकरण के बाद 2000 से 2003 तक वित्त मंत्री के तौर पर यशवंत सिन्हा का कार्यकाल बदतर था और तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को उन्हें हटाना पड़ा था । अरूण जेटली ने सिन्हा के साथ-साथ कांग्रेस नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी.चिदंबरम पर भी निशाना साधा । यशवंत सिन्हा के लेख लिखने के बाद चिदंबरम ने भी उसका हवाला देते हुए मोदी सरकार और जेटली पर अर्थव्यवस्था को चौपट करने का आरोप लगाया था ।
जेटली ने कहा कि शायद ये दोनों नेता एक-दूसरे के बारे में बोले गए कड़वे बोल भूल गए हैं । उन्होंने याद दिलाया कि एक ने दूसरे के बारे में कहा था कि चिदंबरम को वित्त मंत्री के तौर पर उनके रिकॉर्ड की बराबरी करने के लिए दूसरा जन्म लेना पड़ेगा ।
अपने संबोधन के दौरान अरूण जेटली ने यशवंत सिन्हा का नाम नहीं लिया, लेकिन बहुत ही तीखे हमले किए । हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि उनके पूर्ववर्ती चाहे वो प्रणब मुखर्जी हो या मनमोहन सिंह या उनकी पार्टी के वरिष्ठतम नेता लालकृष्ण आडवाणी, उन्होंने इन सभी से यही सीखा है कि मुद्दों पर बात करनी चाइए, व्यक्तियों पर नहीं । उन्होंने 1999 की एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि बोफोर्स विवाद के समय आडवाणी जी ने उन्हें ये बात कही थी ।
जाहिर है वित्त मंत्री अरूण जेटली के इस तीखे हमले से भाजपा के भीतर का ये विवाद बढ़ता हुआ दिख रहा है । यशवंत सिन्हा के आलेख के बाद उनके बेटे और केंद्र में मंत्री जयंत सिन्हा ने सरकार की प्रशंसा में समाचार पत्र में आलेख लिखा । बात यहीं खत्म नही हुई, यशवंत सिन्हा ने गुरूवार को न्यूज 18 इंडिया से बात करते हुए अपना आरोप एक बार फिर दोहराया। उन्होंने यहां तक कहा कि सरकार के प्रवक्ताओं को ये बताना चाहिए कि जयंत अर्थशास्त्र में इतने ही काबिल थे कि उनसे आलेख लिखवाया गया, तो उन्हें वित्त राज्यमंत्री के पद से क्यों हटाया था।

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