Monday , 19 February 2018
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आयात पर निर्भरता कम करेगी सेना

नई दिल्ली। चीन से मिल रही युद्ध की धमकियों और पाकिस्तान के साथ तनावपूर्ण संबंधों के मद्देनजर भारतीय सेना ने अब तय किया है कि वह युद्ध की तैयारी के लिए आयात पर निर्भर नहीं रहेगी। दरअसल, महत्वपूर्ण उपकरणों और कलपुर्जों के आयात में काफी देरी होती है इसलिए सेना ने फैसला लिया है कि वह लड़ाकू टैंकों और अन्य सैन्य प्रणालियों के महत्वपूर्ण उपकरणों और कलपुर्जों को तेजी से स्वदेशी तरीके से विकसित करेगी। सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि देश की 41 आयुध फैक्ट्रियों के संगठन ‘दि ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्डÓ ने कलपुर्जों और अन्य वस्तुओं के आयात को वर्तमान 60 प्रतिशत से घटाकर अगले तीन वर्षों में 30 फीसदी करने का फैसला किया है।
सीमावर्ती चौकियों पर तोपखाना और अन्य महत्वपूर्ण सैन्य सामग्री की आपूर्ति के लिए जिम्मेदार आयुध महानिदेशक ने टैंकों और अन्य आयुध प्रणाली के लिए महत्वपूर्ण कलपुर्जे स्वदेशी तरीके से विकसित करने की रणनीति बनाने के लिए देश के रक्षा फर्मों से बातचीत शुरू कर दी है। अधिकारी ने कहा कि आयुध महानिदेशक और बोर्ड प्रतिवर्ष 10,000 करोड़ रूपये कीमत के कलपुर्जे खरीदते हैं।
सैन्य बलों की यह बहुत पुरानी शिकायत है कि रूस से महत्वपूर्ण कलपुर्जों और उपकरणों की आपूर्ति में बहुत देरी होती है, जिससे खरीदे गए सैन्य उपकरणों की देखरेख प्रभावित होती है। भारत को सैन्य उपकरणों का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता रूस है। विस्तृत समीक्षा के दौरान 13 लाख सैन्य शक्ति वाली सेना के अभियानों की तैयारियों में खामियां मिलने के बाद सरकार ने कलपुर्जों को स्वदेशी तरीके से विकसित करने का फैसला लिया है ताकि युद्ध संबंधी तैयारियों को बेहतर बनाया जा सके।

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