Monday , 18 June 2018
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गीतांजलि जेम्स के पूर्व एमडी का दावा

‘सेलेब्स को भी नकली हीरे बेच देता था चौकसी’
मुंबई। गीतांजलि के पूर्व प्रेसिडेंट और एमडी संतोष श्रीवास्तव ने मेहुल चौकसी की धोखाधड़ी के बारे में सोमवार को खुलासे किए। उन्होंने बताया कि चौकसी ने सिर्फ पंजाब नेशनल बैंक के साथ ही फ्रॉड नहीं किया गया, बल्कि कस्टमर और यहां तक उसके ब्रांड के लिए अपनी सर्विस देने वाली सेलिब्रिटीज को भी ठगने से नहीं छोड़ा। संतोष ने बताया कि संगीतकार हिमेश रेशमिया को भी इस शख्स ने बेवकूफ बनाया। उन्हें एक टीवी विज्ञापन करने के एवज में कम कीमत के हीरे दिए गए। इतना ही नहीं वह 10 गुना ज्यादा कीमत पर हीरा बेचता था। बता दें कि मेहुल और नीरव मोदी पर पंजाब नेशनल बैंक में 11,356 करोड़ रूपए का फ्रॉड करने का आरोप है। फिलहाल दोनों देश से भाग गए हैं।
श्रीवास्तव ने ये खुलासे रिपब्लिक टीवी को दिए इंटरव्यू में किए। उन्होंने बताया ऐसे कई मौके उनके सामने आए जब कस्टमर को नकली हीरे दिए गए। उदाहरण के लिए एक कस्टमर को एक हीरा 50 लाख में दिया गया। असल में यह गीतांजलि के लिए इसकी लागत 2000 से 3000 रूपए रही। वह असली और नकली हीरे की मिक्सिंग कर ऐसा करता था।
उन्होंने बताया कि मैं प्राइस तय करने के मामले से सीधा नहीं जुड़ा था, लेकिन मेरी जानकारी में आता था। मैंने कई बार इन मामलों को मेहुल चौकसी के सामने उठाया, लेकिन उन्होंने कहा कि यह तुम्हारा बिजनेस नहीं है। तुम अपने काम से काम रखो।
कौन हैं संतोष श्रीवास्तव ?
संतोष ने बताया, मैंने गीतांजलि ग्रुप में 2009 से 2013 तक प्रेसिडेंट और एमडी के पद पर काम किया। इस दौरान कई संदिग्ध गतिविधि देखीं।
हिमेश रेशमिया को कैसे ठगा ?
उन्होंने बताया, हिमेश रेशमिया से टीवी कर्मिशयल के बदले 50 लाख के हीरे देने का वादा किया गया था। रेशमिया ने जब इन्हें बाहर बाजार में क्रॉस चेक कराया, तो उसकी वैल्यू काफी कम थी। ऐसा एक नहीं बल्कि कई और सेलिब्रिटीज के साथ किया गया। श्रीवास्तव ने बताया, वह विदेशों में बिना तराशे हीरे खरीदता था। फिर इन्हें भारत लाता था। यहां तराश कर वापस विदेश ले जाकर बेच देता था। यह पूरा काम वह फेक कंपनियों के जरिए करता था। बिना तराशा हीरा खरीदने के लिए लोन लेता था। फिर बेचने के लिए भी ऐसा करता था। यह काम वह टैग चेंज कर, फर्जी बिल बनाकर और लोन लेकर करता था।
बनते थे फर्जी बिल
उन्होंने बताया, कंपनी का जोर फ्रेंचाइजी बिजनेस पर था। इसमें 10 रूपए के सामान की वेल्यू 500 रूपए दिखाकर बिल जनरेट किए जाते थे। करोड़ों की राशि फर्मों से ली जाती थी। इसको लेकर मैंने वित्त मंत्रालय रजिस्ट्रार ऑफ कंपनी तक में शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
2013 में मैंने इसकी शिकायत पीएमओ में की। वहां से केस आरओसी (रजिस्ट्रार ऑफ कंपनी) में भेज दिया गया। लेकिन वहां निराशा ही हाथ लगी। कुछ समय बाद उनके साथी हरिप्रसाद को वहां से मेल आया कि शिकायत बंद कर दी गई।
मुझे कई केस में फंसाने की कोशिश की
श्रीवास्तव ने बताया कि मुझ पर 2013 से ही प्रेशर बनाया गया, कई केसों में फंसाने की कोशिश की गई चौकसी ने इकोनॉमिक ऑफेंस विंग में शिकायत की। 2014 में आई रिपोर्ट में बताया गया कि शिकायत झूठी है। वहीं, रिपोर्ट में ईओडब्लू ने गीतांजलि कंपनी की अकाउंटिंग संदिग्ध पाई गई। मुख्य दोषी मेहुल चौकसी हैं। उन्होंने घोटाले की नींव रखी। बाद में नीरव ने ज्वाइन किया।

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