Tuesday , 21 November 2017
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समाज में बदलाव के वाहक बनें राज्यपाल: मोदी

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरूवार को सभी राज्यपालों से कहा कि वे संविधान की शुचिता बनाये रखते हुए समाज में बदलाव के वाहक बनें।
मोदी ने गुरूवार को यहां राष्ट्रपति भवन में आयोजित राज्यपालों के सम्मेलन में कहा कि सरकार ने वर्ष 2022 तक नये भारत के निर्माण का लक्ष्य रखा है और इसे जनांदोलन बनाकर ही हासिल किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि राज्यपाल भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। वे संविधान की शुचिता को बरकरार रखते हुए समाज में बदलाव के वाहक बन सकते हैं।
उन्होंने कहा कि राज्यपाल इस संबंध में छात्रों तथा शिक्षकों के साथ व्यापक विचार-विमर्श करें। सरकार द्वारा हाल ही में आयोजित हैकाथन का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि इसमें छात्र प्रौद्योगिकी की मदद से समस्याओं का समाधान कर सकते हैं और इसके लिए विश्वविद्यालयों को नवाचार का केन्द्र बनाया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री ने स्वच्छता के मुद्दे पर भी राज्यपालों से दूसरों के लिए मिसाल बनने को कहा। भारत को खुले में शौच से मुक्त बनाने के लिए उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को प्रेरणा का बड़ा स्रोत बताया। वर्ष 2019 में महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती के आयोजन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि त्यौहार तथा वर्षगांठ बदलाव की दिशा में ऊर्जा तथा प्रेरणा के स्रोत बन सकते हैं।
मोदी ने कहा कि राज्यपाल अपनी ओर से आदिवासियों, दलितों तथा महिलाओं को मुद्रा योजना के तहत रिण देने के लिए भी बैंको को प्रोत्साहित कर सकते हैं। इसके लिए संविधान दिवस 26 नवम्बर और अंबेडकर महापरिनिर्वाण दिवस 6 दिसम्बर के बीच अभियान चलाया जायेगा। प्रधानमंत्री ने केन्द्र शासित प्रदेशों के उप राज्यपालों से सौर ऊर्जा, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण तथा केन्द्र शासित प्रदेशों को केरोसिन मुक्त बनाने से संबंधित उत्तम योजनाओं का अनुसरण करने को कहा। उन्होंने कहा कि सभी केन्द्र शासित प्रदेशों में इन उपलब्धियों का लाभ पहुंचना चाहिए।राज्यपाल की अहम भूमिका : कोङ्क्षवद
नई दल्ली। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने केन्द्र और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल बनाने में राज्यपालों की बड़ी भूमिका का जिक्र करते हुए उनसे विकास कार्यों को प्राथमिकता देने तथा युवाओं को राष्ट्रनिर्माण से जोडऩे का आह्वान किया है। राष्ट्रपति गुरूवार को यहां राज्य के राज्यपालों और उप राज्यपालों के एक सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जबकि सहकारी संघवाद तनाव के दौर से गुजर रहा है राज्यपालों और उपराज्यपालों की भूमिका और भी अहम हो जाती है। उन्होंने कहा कि राज्यपाल केन्द्र और राज्यों के बीच एक सेतु हैं। केन्द्र के साथ राज्यों का बेहतर तालमेल बना रहे इसमें उनकी बड़ी भूमिका होती है।

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