Saturday , 26 May 2018
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विश्व को संकट से बचाने बुद्ध के संदेश पर अमल जरूरी : मोदी

बुद्ध जयंती समारोह में बोले प्र.म.

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हिंसा, जातिवाद और आतंकवाद जैसे संकट से विश्व को बचाने के लिए भगवान बुद्ध के करुणा के संदेश पर अमल की सोमवार को सलाह दी।
मोदी ने यहां बुद्ध जयंती समारोह के उद्घाटन भाषण में कहा कि दुनिया के देशों ने जातिवाद और आतंकवाद जैसी विषमतायें खुद तैयार की हैं, लेकिन यदि विश्व को इन संकटों पर पार पाना है तो भगवान बुद्ध का करूणा और सेवाभाव के संदेश पर अमल करना जरूरी है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भगवान बुद्ध ने अपने उपदेश में अष्टांग मार्ग का परिपादन किया था और इस मार्ग पर जाये बिना विश्व के समक्ष तमाम चुनौतियों से नहीं निपटा जा सकता। उन्होंने कहा, भगवान बुद्ध ने सम्यक दृष्टि, सम्यक संकल्प, सम्यक वाणी, सम्यक आचरण, सम्यक आजीविका, सम्यक प्रयत्न, सम्यक चेतना और सम्यक ध्यान- ये अष्टांग मार्ग हमारे लिए सूचित किये हैं। आज हम जिन संकटों से जूझ रहे हैं, उसका समाधान बुद्ध के रास्ते पर चलते हुए ही संभव है।
प्रधानमंत्री ने भगवान बुद्ध को उद्धृत करते हुए कहा कि किसी के दुख को देखकर दुखी होने से ज्यादा बेहतर है कि उस व्यक्ति को उसके दुख को दूर करने के लिए तैयार किया जाये, उसे सशक्त बनाया जाये और केंद्र की मौजूदा सरकार भगवान बुद्ध के बताये करूणा और सेवाभाव के रास्ते पर चल रही है।
मोदी ने कहा, भगवान बुद्ध कहते थे कि किसी के दुख को देखकर दुखी होने से ज्यादा बेहतर है कि उस व्यक्ति को उसके दुख को दूर करने के लिए तैयार करो, उसे सशक्त करो। मुझे प्रसन्नता है कि हमारी सरकार करूणा और सेवाभाव के उसी रास्ते पर चल रही है जिस रास्ते को भगवान बुद्ध ने हमें दिखाया था।
उन्होंने कहा कि समानता, न्याय, स्वतंत्रता और मानवाधिकार आज के लोकतांत्रिक विश्व के मूल्य हैं, लेकिन आज से ढाई हजार वर्ष पहले ही भगवान बुद्ध ने यह संदेश दे दिया था। भारत में तो ये मूल्य पुरखों से रचे-बसे हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार इस सवाल का जवाब खोजने की दिशा में प्रयत्नशील है कि आखिर लोगों के जीवन की कठिनाइयां कैसे दूर हो, लोग आसान जीवन कैसे जीयें? मौजूदा सरकार ने गरीब को सशक्त बनाने के लिए कई प्रयास किये हैं, जिनमें जन-धन योजना, उज्ज्वला योजना और मुद्रा योजना आदि प्रमुख हैं।
उन्होंने परोक्ष रूप से पूर्ववर्ती सरकारों पर सांस्कृतिक विरासत की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए कहा, गुलामी के कालखंड के बाद अनेक वजहों से हमारे यहां अपनी सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का कार्य (शेष पेज 8 पर)

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