Thursday , 23 November 2017
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‘मेरे लिए राष्ट्र पहले, वोट बैंक बाद में’

शहंशाहपुर (वाराणसी)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) तथा आधार कार्ड से ईमानदारी को बढ़ावा मिलने का दावा करते हुए शनिवार को कहा कि उनके लिए राष्ट्र पहले हैं और वोट बैंक बाद में।
मोदी ने यहां एक रैली को सम्बोधित करते हुए कहा कि बेईमान, ईमानदारों को लूट रहे हैं। इन लुटेरों को ठीक किया जा रहा है। जीएसटी से छोटे-छोटे व्यापारी जुड़ रहे हैं। आधार कार्ड से भी काफी संख्या में लोग जुड़ रहे हैं। कुछ लोग ऐसे हैं जो गरीबों के सारे पैसे निगल जाते थे। उन्हें अब जनता की भलाई के लिए लगना होगा। बेईमान को ईमानदारी का रास्ता अपनाना ही होगा। वह विकास का मंत्र लेकर चल रहे हैं।
वर्ष 2022 तक देश के हर गरीब को घर दिलाने का संकल्प दोहराते हुए उन्होंने कहा कि इसके लिए वह पूरी तन्मयता से काम कर रहे हैं। राज्य की योगी सरकार भरपूर सहयोग दे रही है। ये मुश्किल काम है। ये मुश्किल काम मोदी नहीं करेगा तो कौन करेगा। उत्तर प्रदेश की पूर्ववर्ती सरकार को कई चि_ियां लिखकर उन्होंने पूछा था कि कितने गरीबों के पास घर नहीं है,लेकिन उस सरकार के पास गरीबों के घर बनाने के लिए कोई सोच ही नहीं थी। बहुत दबाव डालने पर दस हजार की सूची भेजी गयी थी,लेकिन योगी सरकार ने तो लाखों लोगों का रजिस्ट्रेशन करवा दिया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वच्छता, बिजली, शौचालय, गांव को खुले में शौचमुक्त जैसी बातों के लिए पहले उदासीनता थी। उन्होंने कहा कि वह गरीबों और मध्यम वर्गीय लोगों की ङ्क्षजदगी बदलना चाहते हैं।
उन्होंने कहा कि यहां पशु आरोग्य मेले का आयोजन किया गया है। पशुओं की सेवा का संदेश दिया जा रहा है। पशु तो वोट बैंक होता नहीं, उसे कहीं वोट तो देना नहीं है। यह जानने के बावजूद वह पशुओं की सेवा में भी लगे हुए हैं,क्योंकि उनके लिए देश पहले हैं और वोट बैंक बाद में।
मोदी ने कहा कि वोट की संभावना से काम करना राजनीति का स्वभाव होता है। आमतौर पर राजनीतिक वही काम करते हैं जिससे वोट बैंक बढ़े लेकिन उनका चरित्र अलग है, उनके लिए देश सबसे बड़ा है, इसलिए उनकी प्राथमिकता में वोट नहीं है। उनका कहना था कि यह सबको पता है कि पशु वोट नहीं देते, लेकिन उनके लोग पशु सेवा में लगे हैं। इस तरह का अभियान पहले कभी नहीं चला।
अपने करीब 20 मिनट के भाषण में प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कामों की कम से कम तीन बार सराहना की। उन्होंने कहा कि पशुधन आरोग्य मेले में 1700 से अधिक पशु अलग-अलग क्षेत्रों से आये हैं। किसानों को अपनी आय बढ़ाने के लिए पशुपालन में भी आगे आना होगा। प्रति पशु दूध का औसत दुनिया की अपेक्षा यहां कम है। दूध उत्पादन के जरिये नई आर्थिक क्रांति को बल मिलेगा, इसलिए दूध उत्पादन में रूचि बढ़ानी होगी।
उन्होंने कहा कि गुजरात में दूध के क्षेत्र में आई सहकारी क्रांति ने वहां के किसानों को काफी मदद पहुंचाई। उसी तर्ज पर लखनऊ और कानपुर में भी दूध खरीदने का काम शुरू हुआ है। वहां दूध का दाम ठीक मिल रहा है। अब काशी के किसानों का भी दूध खरीदा जायेगा, इससे किसानों और पशुपालकों को मदद मिलेगी।

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