Tuesday , 20 February 2018
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मेजर आदित्य के खिलाफ एफआईआर पर रोक

केंद्र और जम्मू कश्मीर सरकार को नोटिस

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने ‘शोपियां फायरिंग’ मामले में गढवाल राइफल के मेजर आदित्य कुमार के खिलाफ पुलिस कार्रवाई पर अगले आदेश तक रोक लगाते हुए केंद्र एवं जम्मू-कश्मीर सरकार को सोमवार को नोटिस जारी किये।
मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मेजर आदित्य के पिता ले. कर्नल करमवीर सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी करते हुए दो सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया।
न्यायालय ने अगले आदेश तक मेजर आदित्य के खिलाफ किसी तरह की कोई कानूनी कार्रवाई न करने को कहा है।
ले. कर्नल सिंह की ओर से पेश वकील ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि न्यायालय ने एटर्नी जनरल कार्यालय को याचिका की एक प्रति सौंपने का भी आदेश दिया है।
गौरतलब है कि याचिकाकर्ता ने जम्मू-कश्मीर के शोपियां में गोलीबारी की घटना में पुलिस द्वारा सेना के मेजर आदित्य कुमार पर दर्ज की गयी प्राथमिकी को खारिज करने की मांग करते हुए उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।
ले. कर्नल सिंह ने कहा था कि 10 गढ़वाल राइफल्स में मेजर उनके बेटे को प्राथमिकी में ‘गलत और मनमाने ढंग से’ नामजद किया गया है, क्योंकि यह घटना अफस्पा वाले एक क्षेत्र में सैन्य ड्यूटी पर जा रहे सैन्य काफिले से जुड़ी है। इस सैन्य काफिले को घेरकर भीड़ ने उस पर पथराव किया, जिससे कई सैन्य वाहन क्षतिग्रस्त हो गये।
याचिकाकर्ता का कहना है कि उनके बेटे का इरादा केवल सैन्यकर्मियों और संपत्ति को बचाना था तथा हिंसक भीड़ से बचने के वास्ते ही गोलियां चलायी गयी थी। भीड़ से चले जाने और सेना के काम में बाधा नहीं डालने तथा सरकारी संपत्ति को नुकसान नहीं पहुंचाने का अनुरोध किया गया, लेकिन जब स्थिति नियंत्रण के बाहर चली गयी तब चेतावनी जारी की गयी। ऐसे में जब हिंसक भीड़ ने एक जूनियर कमीशन अधिकारी को पकड़ लिया और उसे पीट-पीटकर मार डालने पर उतर आई तो भीड़ को तितर-बितर करने के लिए गोलियां चलायी गयीं।
याचिकाकर्ता ने जम्मू-कश्मीर की स्थिति से शीर्ष अदालत को अवगत करने के लिए पिछले साल भीड़ द्वारा डीएसपी मोहम्मद अयूब पंडित की पिटाई का भी हवाला दिया। उन्होंने यह बताना चाहा कि सेना के अधिकारी कश्मीर में हिंसक भीड़ को नियंत्रित करने के लिए किस स्थिति में काम कर रहे हैं। अर्जी में कहा गया है कि याचिकाकर्ता को जमीनी स्तर पर प्रतिकूल स्थिति के मद्देनजर सीधे इस अदालत में यह रिट याचिका दायर कर प्राथमिकी रद्द कराने की मांग करनी पड़ी। राज्य में नेता और प्रशासनिक अधिकारी प्राथमिकी को जिस तरह पेश कर रहे हैं वह राज्य की बिल्कुल प्रतिकूल स्थिति को परिलक्षित करता है। ऐसे में याचिकाकर्ता के पास अपने बेटे के मौलिक अधिकारों की रक्षा के वास्ते संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत इस अदालत में आने के सिवाय कोई रास्ता नहीं बचता। मेजर कुमार समेत सेना की 10 गढ़वाल यूनिट के कर्मियों पर हत्या और हत्या के प्रयास के तहत प्राथमिकी दर्ज की गयी है। दरअसल शोपियां के गनोवपोरा गांव में जब सैन्यकर्मियों ने पथराव कर रही भीड़ पर गोलियां चलायी थीं तब दो नागरिक मारे गये थे। उसके बाद मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने इस घटना की जांच का आदेश दिया था।

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