Monday , 21 May 2018
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मुस्लिम महिलाएं भी घरेलू हिंसा अधिनियम में

बॉम्बे हाईकोर्ट का फैसला

मुंबई। बॉम्बे हाई कोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि घरेलू हिंसा ऐक्ट के तहत सुरक्षा मांग रही मुस्लिम महिलाओं को प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता है। जस्टिस भारती डांगरे ने मुंबई निवासी मुस्लिम युवक की याचिका खारिज करते हुए उसे अपनी पत्नी और दो बच्चों के लिए 1.05 लाख रूपये का मासिक भत्ता और घर का किराया देने का आदेश दिया। हाई कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के फैसले का समर्थन किया है।
युवक का दावा था कि दंपती इस्लामिक अलवी बोहरा समुदाय के ताल्लुक रखते हैं जो मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के अधीन है इसलिए विशेष घरेलू हिंसा निषेध कानून उन पर लागू नहीं होता। इसके जवाब में हाई कोर्ट का कहना है कि घरेलू हिंसा अधिनियम मुस्लिम महिलाओं को इसके दायरे से अलग नहीं करता।
जस्टिस भारती ने कहा, यह ऐक्ट घरेलू हिंसा की शिकार महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करता है और इसमें कहीं ऐसा नहीं कहा गया है कि वह मुस्लिम महिलाओं को इसके दायरे में नहीं रखता है। जज ने कहा कि यह कानून महिलाओं के लिए उपलब्ध दूसरे कानूनों से जुड़ा हुआ है और अधिनियम के प्रावधानों में किसी विशेष धर्म से संबंधित महिला को इसके नियमों से प्रतिबंधित नहीं करता है। कोर्ट ने कहा कि शख्स के पत्नी को तीन तलाक देने का दावा करने व दूसरा निकाह कर लेने से वह जिम्मेदारियों से मुक्त नहीं हो जाता है। जज ने कहा (शेष पेज 8 पर)

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