Saturday , 25 November 2017
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गरीबों के लिए 1.2 लाख करोड़ की सोशल सिक्यॉरिटी स्कीम

2019 चुनाव जीतने मोदी की बंपर योजना

नई दिल्ली। सरकार ने देश की सबसे ज्यादा गरीब आबादी को 1.2 लाख करोड़ रूपये सालाना की यूनिवर्सल सिक्यॉरिटी कवरेज देने की महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है। यह सरकार की उस योजना का हिस्सा है जिसके जरिए देश के सभी नागरिकों को व्यापक सुरक्षा के दायरे में लाने पर काम चल रहा है। यूनिवर्सल सिक्यॉरिटी कवरेज की अनिवार्य योजना का खाका श्रम मंत्रालय ने खींचा है। वह जल्द इसके मसौदे को वित्त मंत्रालय के पास भेजेगा। वित्त मंत्रालय इसे अगले साल आम चुनाव से पहले लागू करने के लिए फंडिंग पर काम करेगी। जानें, योजना के बारे में ये सात अहम बातें :1. गरीबों की तीन श्रेणियां
इस योजना में तीन कैटिगरी के सब्सक्राइबर्स होंगे। पहली कैटिगरी सबसे गरीब लोगों की होगी जिनका पूरा कॉन्ट्रिब्यूशन सरकार देगी। दूसरी कैटिगरी में वैसे गरीब होंगे, जिन्हें अपनी जेब से कॉन्ट्रिब्यूट करना होगा। तीसरी कैटिगरी उन लोगों की होगी, जिन्हें अपनी सैलरी का तय हिस्सा इसके लिए देना होगा।
2. क्या-क्या मिलेगा ?
स्कीम दो टियर में होगी। पहले में अनिवार्य पेंशन, इंश्योरेंस (मृत्यु और विकलांगता) और मातृत्व कवरेज होगा और दूसरा स्वैच्छिक चिकित्सा, बीमारी और बेरोजगारी कवरेज होगा।
3. सरकार को उम्मीद, रंग लाएगी योजना
एक वरिष्ठ सरकारी सूत्र ने कहा, यूनिवर्सल सोशल सिक्यॉरिटी स्कीम के तहत जमा की जाने वाली रकम को सब-स्कीमों में बांटा जाएगा और योगदान के हिसाब से लाभ तय करके उनको सुरक्षित बनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस स्कीम में स्वैच्छिक कवरेज इस बात पर निर्भर करेगा कि अनिवार्य योजना के तहत कितना निवेश हुआ है। सरकार को लगता है कि इस स्कीम में बड़ी संख्या में लोग होंगे, इसलिए इसे आर्थिक रूप से मजबूती मिलेगी और सैलरी का एक हिस्सा देनेवालों के लिए भी यह स्कीम अट्रैक्टिव होगी।
4. 2019 चुनाव की चिंता ?
सरकार के लिए इस स्कीम के लिए फंड जुटाना बड़ा मुश्किल होगा क्योंकि बजट का बड़ा हिस्सा वह पहले ही खर्च कर चुकी है। हालांकि, इससे 2019 में आम चुनाव से पहले भाजपा की अगुवाई वाले एनडीए को थोड़ी बढ़त और राहत मिलेगी।
5. बड़ी योजना का एक हिस्सा
नई पॉलिसी उन 4 कोड में एक सोशल सिक्यॉरिटी कोड का हिस्सा होगी, जिन्हें फिलहाल श्रम मंत्रालय अंतिम रूप देने में जुटा है। यह पॉलिसी देश में लागू सोशल सिक्यॉरिटी कवरेज के कानूनों के दायरे में आने वाली 17 मौजूदा स्कीमों की जगह ले लेगी।
6. असगंठित क्षेत्र के कामगारों पर नजर
देश में इस समय 45 करोड़ की वर्कफोर्स है जिसमें सिर्फ 10 प्रतिशत संगठित क्षेत्र में है। इन्हें किसी-न-किसी तरह की सोशल सिक्यॉरिटी हासिल है। हर साल एक करोड़ से ज्यादा लोग इस वर्कफोर्स का हिस्सा बनते हैं लेकिन इनमें से ज्यादातर को न्यूनतम वेतन नहीं मिलता और ज्यादातर के ऑर्गनाइज्ड सेक्टर में होने के चलते इनकी किसी तरह की सोशल सिक्यॉरिटी भी नहीं होती।
7. 1.2 लाख करोड़ रूपये का खर्च
आधिकारिक सूत्र ने बताया कि स्श्वष्टष्ट 4 कैटिगरी में आने वाले सबसे गरीब लोगों (देश की कुल आबादी का लगभग 20′) को सोशल सिक्यॉरिटी के दायरे में लाने पर हर साल 1.2 लाख करोड़ रूपये खर्च होने का अनुमान है।

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