Saturday , 26 May 2018
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‘कैदियों को जेल में ठीक से रख नहीं सकते तो छोड़ दें’

सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कैदियों को जानवरों की तरह जेल में नहीं रखा जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने ये टिप्पणी तब की जब अदालत को बताया गया कि देश भर में 1300 जेलों में कैदियों की संख्या ज्यादा है। कोर्ट को बताया गया कि कई जगह तो तय क्षमता से 600 फीसदी ज्यादा कैदी रहते हैं। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस मदन बी लोकूर की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि अगर कैदियों को सही तरह से रखा नहीं जा सकता तो उन्हें सुधारने की क्या बात की जाए। अगर उन्हें सही तरह से जेल में रखा नहीं जा सकता तो उन्हें छोड़ दिया जाना चाहिए।
अदालत ने राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के खिलाफ ये सख्त टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है। तमाम राज्यों के डीजी और केंद्र शासित प्रदेश के डीजी को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर पिछले आदेश का सही तरह से पालन नहीं किया गया तो कंटेप्ट नोटिस जारी किया जाएगा। पिछले आदेश में कैदियों की भीड़ को डील करने के लिए क्या एक्शन प्लान है ये सुझाने को कहा गया था। अदालत ने कहा कि ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि जेलों में कैदियों की भारी भीड़ है। अदालत ने कहा कि कैदियों का भी मानवाधिकार है उन्हें जानवरों की तरह बंद करके नहीं रखा जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट को कोर्ट सलाहकार ने बताया कि कई जेलों में 150 फीसदी ज्यादा कैदी हैं और एक में तो तय क्षमता से 609 फीसदी ज्यादा कैदी बंद हैं। अदालत ने कहा कि इससे जाहिर होता है कि राज्य सरकार अपने दायित्व के प्रति बेहद लापरवाह है। कई कैदी तो जमानत पा चुके हैं लेकिन मुचलका नहीं भरने के कारण जेल में बंद हैं।

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