Wednesday , 22 November 2017
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एक शख्स को बचाने कांग्रेस ने पूरे गुजरात को दांव पर लगाया?

गांधीनगर। रक्षाबंधन से एक दिन पहले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह रविवार को अहमदाबाद पहुंचे। वह 8 अगस्त को होने वाले और प्रतिष्ठा का प्रश्न बन चुके राज्यसभा चुनाव के होने तक यहां बने रहेंगे। शाह खुद भी उम्मीदवार हैं और पहली बार संसद सदस्यता के लिए दावेदारी कर रहे हैं। भाजपा अध्यक्ष ने अपने आवास पर गुजरात के पार्टी प्रभारी भूपेंद्र यादव, मुख्यमंत्री विजय रूपानी, मंत्री प्रदीप सिंह जडेजा के साथ बैठक की।
इस बीच कांग्रेस ने गुजरात कांग्रेस के अध्यक्ष भरत सिंह सोलंकी के गढ़ माने जाने वाले आणंद के पास एक रेस्ट्रॉन्ट में अपने विधायकों के ठहरने की व्यवस्था की है। ये विधायक बेंगलुरू में हफ्ते भर रहने के बाद अब राज्य लौटे हैं। अब समीकरण और संख्या कांग्रेस के राज्यसभा उम्मीदवार अहमद पटेल के पक्ष में जाते दिख रहे हैं। हालांकि अभी शह-मात का ये खेल खत्म नहीं हुआ है।
गुजरात में कांग्रेस ने अहमद पटेल को बचाने के क्रम में निश्चित तौर पर 2017 में सूबे की सत्ता में वापसी की अपनी संभावनाओं को गंभीर खतरे में डाल दिया है। अहमद पटेल के इशारे पर शंकर सिंह वाघेला की लगातार उपेक्षा ने आखिरकार उन्हें पार्टी को अलविदा कहने को मजबूर किया। दूसरी तरफ बनासकांठा में भीषण बाढ़ के वक्त अपने विधायकों को कर्नाटक भेजने से भाजपा को कांग्रेस के परंपरागत गढ़ में बढ़त का मौका दे दिया, जिसकी तलाश में शाह ब्रिगेड काफी पहले से थी और जो जमीन पर बढ़त बनाने के लिए ओवरटाइम कर रही थी।
कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के बनासकांठा दौरा और बाढ़ प्रभावित लोगों से नोटबंदी के असर के बारे में सवाल पूछना वास्तव में वहां किसी को रास नहीं आया। उन्होंने धनेरा एग्रीकल्चरल प्रॉड्यूस मार्केट कमिटी (एपीएमसी) में एक-डेढ़ मिनट बिताया और फिर दूसरे जगह के लिए रवाना हो गए। एपीएमसी बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित है और राहुल के इस तरह चले जाने से वहां यही संदेश गया कि यह एक राजनेता का दौरा है न कि शुभचिंतक का।
गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपानी पहले ही बाढ़ प्रभावित इलाकों में 5 दिन बिता चुके हैं। उन्होंने व्यक्तिगत तौर पर राहत कार्यों का निरीक्षण किया और कांग्रेस उपाध्यक्ष पर एक के बाद एक कई ट्वीट के जरिए हमले में कोई देरी नहीं की। रूपानी ने लिखा, सतत पर्यटक श्री राहुल गांधी गुजरात आए लेकिन गुजरात के लोग पूछ रहे हैं कि इस संकट के समय में हमारे कांग्रेसी विधायक कहां हैं? उन्होंने आगे लिखा, राहुल गांधी की नेतृत्व शैली पार्टी में काम कर रही है। उनके नक्शेकदम पर कांग्रेसी विधायक भी अब वकेशन मोड में हैं!
कभी कांग्रेस का मजबूत गढ़ रहा बनासकांठा अब भाजपा की तरफ खिसकता दिख रहा है, वह भी ऐसे वक्त में जब अगले कुछ महीनों में ही सूबे में विधानसभा चुनाव होने हैं। भाजपा हर हाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृह राज्य गुजरात में सत्ता बरकरार रखना चाहेगी और इसके लिए हर मुमकिन कोशिशों में लगी है।
भाजपा के पुराने कार्यकर्ता अपने अध्यक्ष पर पूरी तरह भरोसा जता रहे हैं और उनका दावा है कि उनके तीनों उम्मीदवार राज्यसभा पहुंचने में कामयाब होंगे। गुजरात भाजपा के प्रवक्ता भरत पंड्या पूरे आत्मविश्वास से कहते हैं, हमें पूरा भरोसा है कि हमारे तीनों उम्मीदवार इस बार राज्यसभा जाएंगे। लेकिन ऐसे अहम वक्त में जब लोग बाढ़ की विभिषिका झेल रहे हैं, अपने विधायकों को राज्य से बाहर भेजकर कांग्रेस ने एक व्यक्ति के लिए अपनी उम्मीदों को धो दिया। उन्होंने आगे कहा, कांग्रेस को देखकर लगता है कि पूरी पार्टी गुजरात और पूरे देश में सिर्फ एक परिवार और उनके राजनीतिक सलाहकार के लिए काम कर रही है।

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