Saturday , 26 May 2018
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उ.प्र. के सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों से छिनेगा बंगला

सुप्रीम कोर्ट का फैसला

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उत्तर प्रदेश सरकार के उस कानून को रद्द कर दिया, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्रियों को ताउम्र सरकारी बंगला देने का प्रावधान किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री ताउम्र सरकारी आवास में रहने के हकदार नहीं हैं। ऐमिकस क्यूरी (न्यायमित्र) गोपाल सुब्रमण्यम ने भी पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी आवास दिए जाने को गलत बताया था। उनका कहना था कि यह जनता के पैसों का दुरूपयोग है।
शीर्ष अदालत के इस फैसले के बाद यूपी के 8 पूर्व मुख्यमंत्रियों को अपने बंगले खाली करने होंगे। इनमें समाजवादी पार्टी के पूर्व अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव, मौजूदा गृहमंत्री राजनाथ सिंह, बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती, राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह, पूर्व सीएम नारायण दत्त तिवारी और अखिलेश यादव शामिल हैं।
अखिलेश सरकार में पास हुए इस कानून को रद्द करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश के मंत्रियों की सैलरी, भत्ते व अन्य प्रावधानों से जुड़ा सेक्शन 4 (3) असंवैधानिक है। कोर्ट ने कार्यकाल समाप्ति के बावजूद पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी आवास में बने रहने की अनुमति देने वाले उत्तर प्रदेश के संशोधित कानून को रद्द करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश के कानून में संशोधन मनमाना, पक्षपातपूर्ण है और यह समानता की संवैधानिक अवधारणा का उल्लंघन करता है।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 1 अगस्त को फैसला सुनाया था कि मुलायम सिंह यादव समेत राज्य के सभी 6 पूर्व मुख्यमंत्रियों को दो महीने के भीतर सरकारी बंगला खाली करना होगा। कोर्ट ने कहा था कि 1997 के जिन नियम के तहत उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री को जिंदगी भर के लिए सरकारी बंगला दिया गया है उसका कोई कानूनी आधार नहीं है। जिसके बाद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में फैसला लिया गया कि पूर्व मुख्यमंत्रियों को बंगला देने के लिए जो नियमावली है उसे विधानसभा से पास कराकर कानूनी रूप दिया जाएगा। इसके बाद इसे विधानसभा में भी पारित कर दिया गया। एनजीओ लोक प्रहरी ने 1997 में (शेष पेज 8 पर)

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