Saturday , 23 June 2018
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शाहनीति पर गहलोत की ट्रिक पड़ी भारी

गुजरात के बाद कर्नाटक की बारी

नई दिल्ली। कांग्रेस ने कर्नाटक के विधानसभा चुनावों में बैकसीट पर आना स्वीकार करके भाजपा को हार का स्वाद चखा दिया है। कांग्रेस के जिस रणनीतिकार ने भाजपा के लिए हार की कहानी तैयार की, वह भाजपा के लिए नया नहीं है। इससे पहले भी वह भाजपा को मात दे चुका है। कांग्रेस के यह रणनीतिकार राजस्थान के पूर्व सीएम और पार्टी महासचिव अशोक गहलोत हैं।
निकाला जेडीएस के साथ जाने का रास्ता
कर्नाटक में जेडीएस के साथ गठबंधन में जाने की बात कहने वाले सबसे पहले नेता गहलोत ही थे। कांग्रेस को कर्नाटक में अकेले दम पर सरकार बनाने की उम्मीद थी। लेकिन 15 मई को मतगणना से पहले जैसे ही कांग्रेस को अपने नंबर कम पड़ते लगे गहलोत मीडिया के सामने आए और उन्होंने राजनीति में विकल्प खुले होने की बात कही। गहलोत ने मतगणना पूरी होने से पहले ही जेडीएस नेताओं के साथ मुलाकात शुरू भी कर दी थी।
नया नहीं है विधायकों को ‘बचानेÓ का अनुभव
अशोक गहलोत मतगणना से पहले से लेकर येदियुरप्पा के इस्तीफा देने तक करीब एक हफ्ते से कर्नाटक में जमे थे और उन्होंने कांग्रेसी विधायकों को भाजपा के पाले में जाने से बचाया। उनका यह अनुभव नया नहीं है। इससे पहले उन्होंने अपने व्यवहार और कुशलता से गुजरात में तीन राज्यसभा सीटों के चुनाव के दौरान विधायकों को टूटने से बचाया था। यही नहीं, उनके निर्दलीय विधायकों से भी अच्छे संबंध देखने को मिले थे।
मोदी-शाह के गढ़ में दी थी उनको मात
गहलोत ने गुजरात में चर्चित राज्यसभा सीट के चुनाव में अहमद पटेल को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी। तब भी गुजरात के कांग्रेसी विधायक कर्नाटक के ईगलटन रिजॉर्ट में जाकर रूके थे। उन्हें चुनाव से एक दिन पहले ही गुजरात ले जाया गया था। भाजपा के चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह ने कांग्रेसी नेता अहमद पटेल को हराने के लिए पूरा जोर लगा दिया था, लेकिन गहलोत और पटेल की चालों के आगे वह भी फेल हो गए थे।
गुजरात विधानसभा चुनावों में दिखाया था दम
गहलोत की रणनीतिक सफलता गुजरात विधानसभा चुनावों में सामने आई थी। चुनाव प्रचार से पहले कांग्रेस के 25-35 सीटों तक सिमटने की उम्मीद लगाई जा रही थी, लेकिन गहलोत ने राहुल गांधी को सॉफ्ट हिंदुत्व का मंत्र देकर सारे कयासों को गलत साबित कर दिया था। उनकी रणनीति का ही कमाल था कि भाजपा 115 से 99 सीटों पर अटक गई थी और वह कांग्रेस को 61 से 77 सीटों पर ले आए थे।
कांग्रेस में ऐसे बढ़ा अशोक गहलोत का कद
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के करीबी होने के साथ ही अशोक गहलोत का ट्रैक रिकॉर्ड खासा सफल भी रहा है। मूल रूप से राजस्थान के गहलोत पहले सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिद्वंद्वी और भाजपा की सीएम वसुंधरा राजे सिंधिया पर ही निशाना साधते दिखते थे। इन दिनों वह प्र.म. मोदी को उनकी नीतियों के खिलाफ घेरते हैं। कर्नाटक चुनाव के बाद मोदी के नेपाल के मंदिर में जाकर पूजा करने पर उन्होंने ही सवाल उठाए थे और कहा था कि मोदी को ऐसे अप्रत्यक्ष चुनाव प्रचार बंद करने चाहिए। गहलोत कांग्रेस में अहम भूमिका निभा रहे हैं और वह गुजरात के प्रभारी होने के साथ ही राहुल के करीबी भी हैं। राजस्थान के विधानसभा चुनावों में भी कांग्रेस उनकी रणनीति पर भरोसा करेगी।

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