Saturday , 23 June 2018
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रोहिंग्या संकट हसीना ने मोदी से मांगी मदद

कोलकाता। पश्चिम बंगाल के शांतिनिकेतन में विश्व भारती विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, प्रदेश की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने शिरकत की। शेख हसीना ने कहा कि बांग्लादेश चाहता है कि अब जितना जल्द हो सके रोहिंग्या शरणार्थी अपने देश वापस लौट जाएं और भारत भी म्यांमार से बात करवाने में मदद करे।
रोहिंग्या शरणार्थियों की बात उठाते हुए बांग्लादेशी प्रधानमंत्री शेख हसीना ने भारत की मदद मांगी। उन्होंने कहा, रोहिंग्या मुसलमानों ने बांग्लादेश में आसरा लिया हुआ है। हमने उन्हें इंसानियत के नाते जगह दी। हम चाहते हैं कि जितनी जल्द हो सके, वे अपने देश लौट जाएं। मैं चाहती हूं कि आप (भारत) म्यांमार से हमारी बातचीत करवाने में मदद करे ताकि वे रोहिंग्या शरणार्थियों को वापस अपने देश ले जा सकें।
बता दें कि दीक्षांत समारोह के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शेख हसीना ने 25 करोड़ रूपये की लागत से बने बांग्लादेश भवन का भी उद्घाटन किया। प्रधानमंत्री ने इस मौके पर कहा कि शायद यह पहला मौका है, जब किसी दीक्षांत समारोह में दो देशों के प्रधानमंत्री पहुंचे हैं। भारत और बांग्लादेश एक दूसरे से बहुत कुछ सीख सकते हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने मांगी माफी
इससे पहले शांतिनिकेतन में विश्व भारती विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में प्रधानमंत्री मोदी ने असुविधा के लिए छात्रों से क्षमा मांगी। बांग्ला में अपने संबोधन की शुरूआत करने के बाद उन्होंने कहा कि मैं चांसलर होने के नाते यहां हुई असुविधाओं के लिए क्षमा मांगता हूं। जब वह आ रहे थे तो रास्ते में कुछ बच्चे इशारों में कह रहे थे कि यहां पीने का पानी भी नहीं है। मैं आप सबसे इसके लिए क्षमा मांगता हूं।
मोदी ने टैगोर को याद किया
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मैं जब मंच की तरफ आ रहा था, तो ये सोच रहा था कि कभी इसी भूमि पर गुरूदेव के कदम पड़े होंगे। यहां कहीं आसपास बैठकर उन्होंने शब्दों को कागज पर उतारा होगा, कभी कोई धुन, कोई संगीत गुनगुनाया होगा, कभी महात्मा गांधी से लंबी चर्चा की होगी, कभी किसी छात्र को जीवन का मतलब समझाया होगा।
इस दौरान उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि ये मेरा सौभाग्य है कि गुरूदेव रबिन्द्रनाथ टैगोर की इस पवित्र भूमि में इतने आचार्यों के बीच मुझे आज कुछ समय बिताने का मौका मिला है। यहां हमारे बीच में बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना जी भी मौजूद हैं। भारत और बांग्लादेश दो राष्ट्र हैं, लेकिन हमारे हित एक-दूसरे के साथ समन्वय और सहयोग से जुड़े हुए हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मैं जब तजाकिस्तान गया था, तो वहां गुरूदेव की एक मूर्ति का लोकार्पण करने का अवसर मिला था। गुरूदेव के लिए लोगों में जो आदरभाव मैंने देखा था, वो आज भी याद है। गुरूदेव मानते थे कि हर व्यक्ति का जन्म किसी ना किसी लक्ष्य की प्राप्ति के लिए होता है। प्रत्येक बालक अपनी लक्ष्य-प्राप्ति की दिशा में बढ़ सके, इसके लिए उसे योग्य बनाना शिक्षा का महत्वपूर्ण कार्य है। वो कहते थे कि शिक्षा केवल वही नहीं है जो विद्यालय में दी जाती है।

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