Monday , 21 May 2018
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‘नेपाल के बिना हमारे राम अधूरे’

जनकपुर में बोले प्र.म. मोदी

जनकपुर (नेपाल)। प्र.म. नरेंद्र मोदी नेपाल की अपनी दो दिन की यात्रा पर शुक्रवार सुबह ‘सीता के मायकेÓ जनकपुर पहुंचे। दोनों देशों के रिश्तों में ‘रामायण कनेक्शनÓ के जरिए गर्मजोशी भरने की पहल मानी जा रही इस यात्रा की शुरूआत मोदी ने ऐतिहासिक जानकी मंदिर से की। इस दौरान वह पूरी तरह से राम-सीता के रंग में रंगे नजर आए। सिर पर मिथिला में प्रचलित पाग पहना, तो मंजीरे के साथ सीता-राम का जाप भी किया। इसके साथ ही विशेष पूजा-अर्चना भी की। मोदी ने कहा कि यह उनका सौभाग्य है कि उन्हें एकादशी के मौके पर जनकपुर आने का सौभाग्य मिला।
जानकी मंदिर में प्र.म. ओली ने की अगवानी
मोदी के नेपाल पहुंचने पर रक्षा मंत्री ईश्वर पोखरेल और प्रांत-2 के मुख्यमंत्री लालबाबु राउत ने हवाईअड्डे पर पहुंचकर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। प्र.म. मोदी इसके बाद सीधे ऐतिहासिक राम जानकी मंदिर पहुंचे। नेपाल के तीसरे दौरे पर गए मोदी का स्वागत करने के लिए प्रधानमंत्री केपी ओली खुद मौजूद थे। ओली जानकी मंदिर में मोदी के साथ रहे और मंदिर के धार्मिक महत्व के बारे में जानकारी दी।
प्र.म. नरेंद्र मोदी ने नागरिक अभिनंदन समारोह में जनकपुर की जनता को संबोधित किया। इस दौरान प्र.म. ने भारत और नेपाल के संबंधों को युगों पुराना बताया। प्र.म. ने कहा कि नेपाल के बिना भारत के धाम भी अधूरे हैं और राम भी। मोदी ने कहा कि दोनों देशों की दोस्ती किसी रणनीति या कूटनीति की मोहताज नहीं है।
मोदी ने कहा, लगता है सीता जी ने ही भद्रकाली एकादशी का दिन मुझे दर्शन देने के लिए तय किया था। आज जानकी मंदिर में दर्शन कर सालों पुरानी मनोकामना पूरी हुई। प्र.म. ने कहा कि भारत और नेपाल की मित्रता आज की नहीं बल्कि त्रेता युग की है। राजा दशरथ और राजा जनक ने जनकपुरी और अयोध्या को ही नहीं बल्कि नेपाल और भारत को भी एक बंधन में बांधा था।
हर घड़ी में साथ रहे दोनों देश
मोदी ने कहा कि नेपाल और भारत मित्रता रामचरितमानस की चौपाइयों से समझ सकते हैं। भारत और नेपाल ने हर मुश्किल घड़ी में एक दूसरे का साथ दिया है। उन्होंने कहा, ‘नेबर फस्र्टÓ नीति में हमारे लिए नेपाल सबसे आगे आता है। इस साझेदारी को नई ऊर्जा देने के लिए मुझे नेपाल आने का मौका मिला। मोदी ने कहा कि विकास के लिए लोकतंत्र का रास्ता चुनना पड़ता है। नेपाल के नौजवानों ने बुलेट छोड़कर बैलट का रास्ता चुना है। इसे लेकर प्र.म. मोदी ने खुशी जताई। भारत और नेपाल 5 टी पर टिके हैं। ये हैं, ट्रेडिशन, ट्रेड, टूरिजम, टेक्नॉलजी और ट्रांसपोर्ट।
मोदी ने कहा, हाल ही में नेपाल के प्र.म. का स्वागत करने का मौका मुझे नई दिल्ली में मिला। प्र.म. ओली ने ‘समृद्ध नेपाल और सुखी नेपालीÓ के सपने संजोए हैं। उनके सपने को पूरा करने के लिए मैं भारत की तरफ से ओलीजी को शुभकामनाएं देता हूं। मोदी ने कहा, हमने भारत में न्यू इंडिया का संकल्प लिया है। 2022 तक भारत की आजादी के 75 वर्ष पूरे हो रहे हैं। इस मौके पर देश ने यह संकल्प लिया है। नेपाल बगैर भारत की आस्था अधूरी
प्र.म. ने कहा कि भारत और नेपाल किसी परिभाषा से नहीं बल्कि उस भाषा से बंधे हैं, जो भाषा विश्वास की है, रोटी-बेटी की है। मोदी ने कहा, हमारी प्रकृति भी एक है और संस्कृति भी, दृष्टि भी समान है और सृष्टि भी, चाह और राह भी समान है। नेपाल के बिना भारत की आस्था भी अधूरी है। नेपाल के बिना हमारे धाम भी अधूरे हैं और राम भी। मोदी ने कहा, जनकपुर धाम आकर ऐसा नहीं लगा कि किसी दूसरे देश आया हूं। यहां सब अपने ही तो हैं। नेपाल अध्यात्म और दर्शन का केंद्र रहा है। लुंबिनी में ही बुद्ध का जन्म हुआ था। ये वह धरती है, जिसने बताया कि बेटियों को कैसे सम्मान दिया जाता है।

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