Tuesday , 24 April 2018
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अयोध्या : भूमि विवाद की तरह चलेगा मामला

14 मार्च को अगली सुनवाई

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में गुरूवार को अयोध्या में विवादित राम जन्मभूमि मामले की सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस अब्दुल नजीर की पीठ में सभी पक्षों ने दस्तावेजों के जरिए अपना पक्ष रखा। सुनवाई के दौरान जस्टिस दीपक मिश्रा ने साफ किया कि वह इस मामले को जमीन विवाद के तौर पर देखेंगे। कोर्ट ने सभी पक्षों को दो हफ्ते में दस्तावेज तैयार करने का आदेश दिया। कोर्ट ने साथ ही साफ किया कि इस मामले में अब कोई नया पक्षकार नहीं जुड़ेगा। मामले की अगली सुनवाई अब 14 मार्च को होगी।अयोध्या टाइटल विवाद 6 साल से है पेंडिंग
अयोध्या मामले में टाइटल विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट में तमाम पक्षकारों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की हुई थी। अयोध्या के विवादास्पद ढांचे को लेकर हाई कोर्ट ने जो फैसला दिया था उसके बाद तमाम पक्षों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर की गई थी और याचिका सुप्रीम कोर्ट में 6 साल से लंबित है। पिछले साल 26 फरवरी को भाजपा नेता सुब्रमण्यन स्वामी को इस मामले में पक्षकार बनाया गया था। स्वामी ने राम मंदिर निर्माण के लिए याचिका दायर की थी। स्वामी का दावा है कि इस्लामिक देशों में किसी सार्वजनिक स्थान से मस्जिद को हटाने का प्रावधान है और उसका निर्माण कहीं और किया जा सकता है। मामले में मुख्य पक्षकार हिंदू महासभा, सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड आदि हैं। सुनवाई के दौरान जजों ने क्या कहाखबरों के अनुसार कोर्ट ने प्रक्रियात्मक जरूरतों को पूरा करने के लिए सभी पक्षों को दो हफ्ते का समय दिया गया है। अब 14 मार्च से कोर्ट में मामले की फुल सुनवाई शुरू होगी।
> सुनवाई की शुरूआत करते हुए चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा कि वह इस मामले को आस्था नहीं बल्कि जमीन विवाद की तरह देखेंगे।
> सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह इस मामले में पहले मुख्य पक्षकारों निर्मोही अखाड़ा, रामलला विराजमान और सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की दलीलें सुनेगा।
> सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राजनीतिक और भावनात्मक दलीलें नहीं सुनी जाएंगी। एक पक्ष ने कहा था कि कोर्ट 100 करोड़ हिंदुओं की भावनाओं का ध्यान रखें।
> गीता और रामायण की किताबें दस्तावेजों के तौर पर पेश की गईं।
> सुप्रीम कोर्ट में दस्तावेजों को लेकर भी बहस हुई।
> कोर्ट ने साफ किया कि राम मंदिर विवाद पर अब कोई नया पक्ष नहीं जुड़ेगा।
> कोर्ट ने कहा कि केस से जुड़े मृत लोगों के नाम हटाए जाएं। हाशिम अंसारी का नाम हट जाएगा।
> कोर्ट ने सुनवाई के दौरान गीता और रामायण का अंग्रेजी अनुवाद मांगा।
> दो हफ्ते में सभी पक्षों से कोर्ट ने दस्तावेज तैयार करने को कहा।गौरतलब है कि 11 अगस्त को 3 जजों की स्पेशल बेंच ने इस मामले की सुनवाई की थी। सुप्रीम कोर्ट में 7 साल बाद अयोध्या मामले की सुनवाई हुई थी। कोर्ट ने कहा था कि 7 भाषा वाले दस्तावेज का पहले अनुवाद किया जाए। कोर्ट ने साथ ही कहा कि वह इस मामले में आगे कोई तारीख नहीं देगा। उल्लेखनीय है कि इस मामले से जुड़े 9,000 पन्नों के दस्तावेज और 90,000 पन्नों में दर्ज गवाहियां पाली, फारसी, संस्कृत, अरबी सहित विभिन्न भाषाओं में हैं, जिस पर सुन्नी वक्फ बोर्ड ने कोर्ट से इन दस्तावेजों को अनुवाद कराने की मांग की थी। यह है पूरा मामला
राम मंदिर के लिए होने वाले आंदोलन के दौरान 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद को गिरा दिया गया था। इस मामले में आपराधिक केस के साथ-साथ दीवानी मुकदमा भी चला। टाइटल विवाद से संबंधित मामला सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 30 सितंबर 2010 को अयोध्या टाइटल विवाद में फैसला दिया था। फैसले में कहा गया था कि विवादित लैंड को 3 बराबर हिस्सों में बांटा जाए। जिस जगह रामलला की मूर्ति है उसे रामलला विराजमान को दिया जाए। सीता रसोई और राम चबूतरा निर्मोही अखाड़े को दिया जाए जबकि बाकी का एक तिहाई लैंड सुन्नी वक्फ बोर्ड को दी जाए। इसके बाद ये मामला सुप्रीम कोर्ट के सामने आया। अयोध्या की विवादित जमीन पर रामलला विराजमान और हिंदू महासभा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। वहीं, दूसरी तरफ सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने भी सुप्रीम कोर्ट में हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ अर्जी दाखिल कर दी। इसके बाद इस मामले में कई और पक्षकारों ने याचिकाएं लगाई। सुप्रीम कोर्ट ने 9 मई 2011 को इस मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाते हुए मामले की सुनवाई करने की बात कही थी। सुप्रीम कोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट में इसके बाद से यह मामला पेंडिंग है।सुप्रीम कोर्ट में रखी गईं गीता-रामायणनई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में गुरूवार को बहुप्रतीक्षित राम जन्मभूमि मामले की सुनवाई शुरू हुई तो हिंदुओं के पवित्र धर्मग्रंथ गीता और रामायण को भी सामने रखा गया। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता में तीन जजों की बेंच ने साफ कर दिया कि अदालत में कोई भावनात्मक दलीलें न रखी जाएं। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने साक्ष्य के तौर पर गीता और वाल्मिकी रामायण का अंग्रेजी में अनुवाद करने को भी कहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि अयोध्या केस को विवादित जमीन की तरह ही देखा जाएगा। गौर करने वाली बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट के सामने कुल 42 किताबों को रखा गया है। बताया जा रहा है कि ज्यादातर किताबों का अनुवाद हो चुका है। अब केवल गीता और रामायण का अनुवाद होना बाकी है। पुस्तकों के अनुवाद के लिए कोर्ट ने समय भी दे दिया है। कोर्ट ने केस से जुड़े विडियो कैसेट भी सभी पक्षों को देने को कहा गया है।
बताया जा रहा है कि एएसआई की खुदाई के समय के विडियो भी अदालत में रखे जाएंगे। भारतीय पुरात्तव सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) की ओर से 1970, 1992 और 2003 में विवादित भूमि की खुदाई की गई थी। इसके साथ ही गुरूवार को राम मंदिर केस की सुनवाई फिर टल गई। अब 34 दिन बाद 14 मार्च को फिर सुनवाई होगी। राम मंदिर केस में कोई नया पक्ष नहीं जोड़ा जाएगा।

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