Tuesday , 24 April 2018
Breaking News
Home » Entertainment » सुप्रीम कोर्ट ने दी ‘पद्मावत’ को हरी झंडी

सुप्रीम कोर्ट ने दी ‘पद्मावत’ को हरी झंडी

कहा- कानून-व्यवस्था बनाए रखना राज्यों की जिम्मेदारी

नई दिल्ली। काफी हंगामे के बाद आखिरकार ‘पद्मावती’ से ‘पद्मावत’ हुई फिल्म को रिलीज के लिए अनुमति मिली है। संजय लीला भंसाली की विवादित फिल्म ‘पद्मावत’ पर गुरूवार को अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने रिलीज की तारीख 25 जनवरी मुकर्रर कर दी है। कोर्ट ने चार राज्यों में फिल्म पर लगे प्रतिबंध को खारिज कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि फिल्म दिखाए जाने के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखना राज्यों की जिम्मेदारी है। इस मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी से जुड़ा एक ऐसा जिक्र भी आया जिस पर कोर्ट में मौजूद लोग हंस पड़े।

फिल्म के प्रोड्यूसर और डायरेक्टर की ओर से वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे और पूर्व एजी मुकुल रोहतगी ने मामले की पैरवी की। वहीं फिल्म को बैन करने वाले राज्यों की ओर से एएसजी तुषार मेहता ने कानून व्यवस्था की दुहाई देते हुए इस पर बैन की मांग की। हरीश साल्वे ने दलील दी कि सेंसर बोर्ड ने इस फ़िल्म को पूरे देश में रिलीज के लिए सर्टिफिकेट दिया है, कोई राज्य इस पर बैन कैसे लगा सकता है।

25 जनवरी को देशभर में होगी रिलीजआप गांधी को व्हिस्की पीते नहीं दिखा सकते
राज्यों की तरफ से पेश हुए एएसजी तुषार मेहता ने कहा कि इस फिल्म में ऐतिहासिक तथ्यों से छेड़छाड़ की गई है। इस पर हरीश साल्वे ने फिल्म में दिखाए जाने वाले डिस्क्लेमर को कोर्ट के सामने पढ़कर सुनाया, जिसमें कहा गया है कि ‘यह एक काल्पनिक कहानी पर आधारित है’, इतिहास से इसका कोई लेना देना नहीं। साल्वे ने तो कोर्ट में यहां तक कहा कि एक दिन मैं चाहूंगा कि मैं इस बात पर दलील दूं कि कलाकारों को इतिहास से छेड़छाड़ का अधिकार भी होना चाहिए। इस पर तुषार मेहता ने कहा कि ऐसा नहीं हो सकता। आप महात्मा गांधी को व्हीस्की पीते हुए नहीं दिखा सकते। इस पर साल्वे ने कहा, लेकिन यह इतिहास से छेड़छाड़ नहीं होगी। इस पर कोर्ट में मौजूद सभी लोग हंस पड़े। फिल्म पर बैन

संघीय ढांचे का उल्लंघन होगा : साल्वे
सेंसर बोर्ड का सर्टिफिकेट दिखाते हुए साल्वे ने दलील दी कि सेंसर बोर्ड सेंट्रल ऐक्ट, सिनमैटग्राफ ऐक्ट 1952 के तहत फिल्मों को सर्टिफिकेट देता है। ऐसे में कोई राज्य उसे मानने से कैसे इनकार कर सकता है। साल्वे ने कहा कि अगर ऐसा होता है तो यह संघीय ढांचे का उल्लंघन होगा। साल्वे ने संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (ए) में दिए गए विचार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हवाला देते हुए कहा कि फिल्म पर बैन लगाना संविधान का उल्लंघन है। राज्यों की तरफ से दी गई

कानून-व्यवस्था की दलील
राज्यों की ओर से बैन की मांग करने वाले तुषार मेहता ने दलील दी कि कानून व्यवस्था राज्यों की जिम्मेवारी है और राज्य को यह देखना है कि कानून व्यवस्था को कोई दिक्कत न हो। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि इस फिल्म के रिलीज से कानून व्यवस्था की समस्या हो सकती है। तुषार मेहता ने सेंसर बोर्ड के सर्टिफिकेट पर दलील देते हुए कहा कि सेंसर बोर्ड फिल्म को सर्टिफिकेट देते समय इस बात पर ध्यान नहीं देता कि फिल्म की रिलीज से कानून-व्यवस्था को कोई समस्या हो सकती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*