Tuesday , 21 November 2017
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सुप्रीम कोर्ट का दखल से इंकार गेंद अब सेंसर बोर्ड के पाले में

padmavati_release_supremecourtनई दिल्ली। विवादों के बीच घिरी संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘पद्मावतीÓ के लिए अच्छी खबर आई है। सुप्रीम कोर्ट ने इस फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने के लिए दायर की गई याचिका को खारिज कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि फिल्म प्रमाणन के लिए सेंसर बोर्ड के पास पर्याप्त दिशा-निर्देश हैं। इस याचिका में फिलहाल फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की मांग की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अभी तक सेंसर बोर्ड ने फिल्म को सर्टिफिकेट नहीं दिया है। नियमों व गाइडलाइन्स के मुताबिक सेंसर बोर्ड को इस पर फैसला करना है। इसलिए सुप्रीम कोर्ट सेंसर बोर्ड के अधिकार से पहले इसमें सुनवाई नहीं करेगा। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद इस फिल्म की तकदीर की गेंद अब सेंसर बोर्ड के पाले में चली गई है। इस फिल्म को लेकर राजपूत समाज से लेकर कई जगह से विरोध के स्वर उठ रहे हैं।
याचिकाकर्ता सिद्धराज सिंह चूडास्मा ने इस बात की आशंका जताई कि फिल्म में अलाउद्दीन खिलजी और पद्मावती के चरित्र को जिस तरह दिखाया गया है वो राजपूत समाज को आहत करने वाला हो सकता है। ऐसे में समाज के लोगों को इस बात का मौका मिलना चाहिए कि वो फिल्म को रिलीज से पहले देख सकें। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट पहले एक स्क्रीनिंग कमेटी बनाए जो फिल्म को देखे।
इस याचिका में ये भी आरोप लगाया गया था कि डायरेक्टर ने इसे बनाने में कुछ ज्यादा ही स्वतंत्रता ली है और तथ्यों के साथ छेड़छाड़ किया है। याचिका में कहा गया कि फिल्म के गाने में रानी पद्मावती घूमर डांस करती नजर आ रही हैं, जबकि राजघराने की रानियां घूमर और ठुमके नहीं लगाती थीं। इसके साथ ही दीपिका के कॉस्टयूम पर भी सवाल उठाया गया है। इस याचिका में कहा गया है कि पद्मावती के बारे में पूरी जानकारी हासिल कर लेने के बाद ही फिल्म को रिलीज किया जाए। भाजपा विधायक राज पुरोहित ने भी केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) और केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी को पत्र लिखकर ‘पद्मावतीÓ पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है।

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