Thursday , 23 November 2017
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50 हजार करोड़ का राहत पैकेज देगी सरकार

नई दिल्ली। इकनॉमिक ग्रोथ में तेजी लाने के लिए मोदी सरकार ने कमर कस ली है। सरकार जल्द ही 50 हजार करोड़ रुपए के राहत पैकेज का ऐलान कर सकती है, हालांकि इससे वित्तीय घाटा का लक्ष्य हासिल करना उसके लिए संभव नहीं होगा। वित्त मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार सरकार मार्च 2018 तक अतिरिक्त 50 हजार करोड़ रूपए (7.7 अरब डॉलर) खर्च कर सकती है। राहत पैकेज की घोषणा जल्द की जाएगी। इससे वित्तीय घाटा 0.5 फीसदी बढ़ सकता है।
गौरतलब है कि वित्त मंत्री अरूण जेटली ने बुधवार को संकेत दिए थे कि इकनॉमिक रिवाइवल के लिए सरकार राहत पैकेज का ऐलान कर सकती है। उन्होंने कहा था कि इकॉनमी को बूस्ट करने के लिए अतिरिक्त उपायों पर विचार किया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, सरकार आर्थिक सुस्ती को दूर करने के लिए ऐक्शन प्लान तैयार करेगी। अलग-अलग मंत्रालयों के साथ हाई लेवल डिस्कशन किया जा रहा है। जिस सेक्टर में तेजी लाने के लिए जितनी राहत पैकेज की जरूरत होगी, उस हिसाब से राशि दी जाएगी। मुख्य तौर पर जोर उन सेक्टरों में होगा, जिनसे ज्यादा रोजगार पैदा होने की संभावनाएं हैं। इसमें प्रमुख रूप से मैन्युफैक्चरिंग, पावर, इंफ्रास्ट्रक्चर और आईटी विभाग शामिल है। राहत पैकेज के तहत सरकार, टैक्स में छूट भी दे सकती है और इसका भार खुद उठा सकती है। गौरतलब है कि मोदी सरकार ने इस साल वित्तीय घाटे का लक्ष्य, जीडीपी की तुलना में 3.2 फीसदी रखा है। वित्तीय घाटा के मायने है कि आमदनी और खर्च के बीच का अंतर।
वित्त मंत्रालय के एक उच्चाधिकारी के अनुसार इस वक्त अर्थव्यवस्था में सुस्ती का माहौल है। ऐसे में जरूरी है कि सबसे पहले अर्थव्यवस्था को ठीक किया जाए। यही कारण है कि इसके लिए वित्तीय घाटे में बढ़ोतरी से समझौता करने की मजबूरी है। जून तिमाही में जीडीपी ग्रोथ रेट घटकर 5.7 फीसदी पर आ गया। अगले तिमाही में जीडीपी ग्रोथ को 7 से 7.5 फीसदी नहीं किया तो फिर चालू वित्त वर्ष में आर्थिक विकास की दर 6 फीसदी से कम पर आ सकती है। इधर एसबीआई रिसर्च ने हाल ही अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अगर सरकार ने इकॉनमी रिफॉर्म की प्रक्रिया तेज नहीं की तो देश की आर्थिक विकास दर 6 फीसदी से कम पर आ सकती है। ऐसे में ग्रोथ के मामले में चीन इससे आगे बढ़ जाएगा।

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