Wednesday , 26 July 2017
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5 लाख तक की आय हो कर मुक्त

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income_taxनई दिल्ली। नोटबंदी के बाद इस तरह की चर्चाएं हैं कि सरकार व्यक्तिगत आयकर छूट की सीमा बढ़ा सकती है। इस बीच कुछ आर्थिक विशेषज्ञों का भी सुझाव है कि नोटबंदी के झटके से अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए सरकार को लीक से हटकर कुछ कदम उठाना चाहिए। विशेषज्ञों की राय है कि बाजार में मांग बढ़ाने के उपाय करने के साथ-साथ आयकर छूट की सीमा को दोगुना किया जाना चाहिए। इससे लोगों की क्रय शक्ति बढ़ेगी।
कुछ विश्लेषकों का मानना है कि नवंबर में नोटबंदी के असर से अर्थव्यवस्था पर थोड़े समय तक विपरीत प्रभाव रहेगा और आर्थिक वृद्धि दर एक प्रतिशत तक गिर सकती है। वर्ष 2015-16 में जीडीपी विकास दर 7.6 प्रतिशत और चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में 7.2 प्रतिशत थी।
विशेषज्ञों के अनुसार कृषि क्षेत्र का प्रदर्शन इस बार बेहतर रहने की उम्मीद है, इसलिए नोटबंदी से पडऩे वाले असर को यह कुछ कम करेगा। उद्योग मंडल एसोचैम की अप्रत्यक्ष कर समिति के अध्यक्ष निहाल कोठारी का अनुमान है कि 2016-17 में आर्थिक वृद्धि 6.5 से 7 प्रतिशत के बीच रहेगी। उन्होंने कहा कि नोटबंदी से खुदरा और लघु उद्योगों पर असर पड़ा है। बजट में उनके प्रोत्साहन के कुछ खास उपाय होने चाहिए। कोठारी मानते हैं कि व्यक्तिगत आयकर में छूट कुछ न कुछ बढ़ाई जा सकती है। यह स्लैब में वृद्धि या दरों में कमी के रूप में हो सकती है। उपभोक्ता वस्तुओं पर उत्पाद शुल्क दरों में भी कमी लाई जा सकती है। पीएचडी वाणिज्य और उद्योग मंडल के मुख्य अर्थशास्त्री एस.पी. शर्मा ने कहा, लोगों की खर्च करने लायक आय बढऩी चाहिए। 5 लाख रूपये तक की आय पर कोई कर नहीं लगना चाहिये। सालाना 5 लाख अब नया सामान्य स्तर बन गया है। शर्मा ने कहा कि कृषि क्षेत्र के लिए केंद्रीय योजना में 6 प्रतिशत हिस्सा आवंटित होना चाहिए। कृषि क्षेत्र में काफी कुछ सुधार की जरूरत है।
कृषि उत्पादक क्षेत्रों को सीधे मंडियों से जोडऩे की जरूरत है। वर्तमान में ढाई लाख रूपये तक की आय कर मुक्त है जबकि ढाई से पांच लाख रूपये की आय पर 10 प्रतिशत, पांच से दस लाख रूपये की सालाना आय पर 20 प्रतिशत और दस लाख रूपये से अधिक की आय पर 30 प्रतिशत की दर से कर लगाया जाता है।
वित्त मंत्री अरूण जेटली ने पिछले बजट में पांच लाख रूपये तक की वार्षिक आय के दायरे में आने वाले करदाताओं को विशेष छूट के तहत 2,000 रूपये की छूट को बढ़ाकर 5,000 रूपये कर दिया था। इसके अलावा किराये पर रहने वाले करदाताओं के लिए, जिन्हें नियोक्ता से किसी प्रकार का एचआरए नहीं मिलता है, उनकी सालाना कर योग्य आय में से 24,000 रूपये की कटौती को बढ़ाकर 60,000 रूपये सालाना कर दिया था। वित्त मंत्री ने पिछले बजट में कंपनी कर दरों में कमी की भी शुरूआत की थी। उन्होंने कुछ शर्तों के साथ कंपनियों को 25 प्रतिशत की निम्न दर से कर देने का विकल्प उपलब्ध कराया। गुड्स ऐंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) के मुद्दे पर निहाल कोठारी ने कहा, मौजूदा परिस्थिति में एक अप्रैल से जीएसटी लागू होना मुश्किल लगता है, लेकिन एक जुलाई से इसे लागू किया जा सकता है। जीएसटी लागू करने के लिये उद्योगों को भी तैयारी करनी होगी, उसके बाद ही यह लागू हो सकेगा।
शर्मा ने भी कहा कि जीएसटी में ज्यादा देरी नहीं होनी चाहिए। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के पूर्व अध्यक्ष आर.एस. बुटोला ने पेट्रोलियम क्षेत्र के बारे में कहा कि सरकार को कच्चे तेल पर उपकर को 8 से 10 प्रतिशत रखना चाहिये। मौजूदा 20 प्रतिशत की दर काफी ज्यादा है।
उन्होंने देश में कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ाने के लिये मौजूदा खोज क्षेत्रों में भी कंपनियों को विभिन्न प्रकार के प्रोत्साहन देने की वकालत की। बुटोला ने कहा है कि प्रधानमंत्री के देश में कच्चे तेल आयात पर निर्भरता 10 प्रतिशत कम करने के लक्ष्य को यदि हासिल करना है तो पहले आवंटित तेल क्षेत्रों में भी प्रोत्साहन मिलने चाहिये।

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