Thursday , 14 December 2017
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वेतन पॉलिसी को मंजूरी, जजों की भी बढ़ेगी सैलरी

नई दिल्ली। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों की वेतन पॉलिसी को मंजूरी दे दी है। केंद्रीय कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए वित्त मंत्री अरूण जेटली ने कहा कि 15वें वित्त आयोग के गठन को मंजूरी दे दी गई है। यह आयोग अप्रैल 2020 से लेकर अप्रैल 2025 तक लागू होगा। फाइनैंस मिनिस्टर ने कहा कि इन्सॉल्वेंसी और बैंकरप्सी कोड में भी कुछ बदलाव किए गए हैं, लेकिन उनकी जानकारी अभी नहीं दी जा सकती है। इसके साथ ही केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट और 24 उच्च न्यायालयों के जजों की सैलरी को रिवाइज करने का फैसला लिया है। फिलहाल तमाम तरह के भत्तों को हटाने के बाद जजों की सैलरी 1.5 लाख रूपये प्रति महीना है।
केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी के लिए 8वें वेतन आयोग पर यह वित्त आयोग काम करेगा। पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट मीटिंग में कहा गया कि केंद्र सरकार के स्वामित्व वाले संस्थानों का प्रबंधन 5 या 10 साल की वेतनमान में बदलाव की सीमा खत्म होने के बाद इस पर मोलभाव कर सकेंगे। हालांकि सरकार की ओर से बजट में इसका कोई प्रावधान नहीं किया जाएगा और संस्थानों को अपने स्तर से ही इसका बोझ उठाना होगा।
बता दें कि पिछले ही दिनों सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा था कि क्या सरकार जजों का वेतन बढ़ाना भूल गई है? कोर्ट ने कहा था कि जजों का वेतन सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद नौकरशाहों से भी कम है। अदालत ने सर्वोच्च न्यायालय के स्टाफ और अधिकारियों को वॉशिंग अलाउंस देने संबंधी याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने यह टिप्पणी की। ईबीआरडी का सदस्य बनेगा भारत
नई दिल्ली। सरकार ने यूरोपीयन बैंक फॉर रिकंस्ट्रक्शन एंड डेवलपमेंट (ईबीआरडी) की सदस्यता हासिल करने के लिए बुधवार को मंजूरी दे दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की यहां हुई बैठक में इसकी मंजूरी दी गई। बैठक के बाद वित्त मंत्री अरूण जेटली ने यहां संवाददाताओं को बताया कि आरंभ में भारत ईबीआरडी 100 शेयर लेगा और फिर शेयरों की संख्या बढ़ाने पर विचार किया जायेगा। इन 100 शेयरों की कीमत 10 लाख यूरो (तकरीबन 7.60 करोड़ रूपये) होगी। बाद में हिस्सेदारी बढ़ाने पर भारत का योगदान भी बढ़ेगा। ईबीआरडी का सदस्य बनने से भारत को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी साख मजबूत करने और अपने आर्थिक हितों को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी। इससे देश में निवेश का अवसर और माहौल बेहतर होगा।

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