Friday , 24 November 2017
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फंसे लोन पर आरबीआई सख्त, बड़ी चोट की तैयारी

नई दिल्ली। बैंकिंग नियमन (संशोधन) अध्यादेश से ताकत मिलने के बाद भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) मार्च, 2019 तक करीब 8 लाख करोड़ रूपये के डूबे कर्ज (एनपीए) के निपटान के लिए सख्त कदम उठा सकता है। उद्योग मंडल एसोचैम की एक स्टडी में कहा गया है कि इस कदम से बैंकों का एनपीए कम होगा और उनकी वित्तीय सेहत सुधारने में मदद मिलेगी।
‘एसोचैम की स्टडी एनपीए रेजॉलूशन: लाइट एट द एंड ऑफ टनल बाय मार्च 2019Ó में कहा गया है कि यह मानना अधिक सुरक्षित होगा कि नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स की समस्या वित्त वर्ष 2019-20 की पहली तिमाही तक काफी हद तक निपट जाएगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि इसमें कई कारकों मसलन आर्थिक चक्र में बदलाव और सरकार व रिजर्व बैंक द्वारा कुछ मजबूत कदमों से मदद मिलेगी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि समूचे एनपीए को दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता कार्रवाई के तहत लाया जा सकता है, लेकिन देखने वाली बात यह होगी कि कितना और कितनी तेजी से यह वास्तव में बैंकों के बैलेंस सीट से हटता है। फिलहाल बैंकों पर एनपीए का काफी ज्यादा दबाव है।
यह किसी से छिपा नहीं है कि एनपीए से विशेष रूप से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की वित्तीय सेहत खराब हो रही है। उदाहरण के लिए वित्त वर्ष 2016-17 में 27 सरकारी बैंकों का सामूहिक परिचालन लाभ 1.5 लाख करोड़ रूपये रहा। लेकिन इसमें डूबे कर्ज के लिए प्रावधान को लेने के बाद उनका शुद्ध मुनाफा घटकर मात्र 574 करोड़ रूपये पर आ गया।

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