Monday , 21 May 2018
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‘प्राइवेट नंबर’ के लिए कॉल आए तो रहें सावधान

नई दिल्ली। क्या आपको भी टेलिकॉम प्रोवाइडर की ओर से ‘प्राइवेट नंबर’ ऑफर किए जाने के कॉल आते हैं? ऐसा है तो सावधान रहें! दिल्ली पुलिस ऐसे ठगों की जांच में जुटी है, जो इस तरह की कॉल कर कई कारोबारियों को चूना लगा चुके हैं। हाल ही में एक कारोबारी के बेटे से 12 लाख रूपये की ठगी का मामला सामने आने के बाद पुलिस जांच में जुटी है। ठग ने फोन पर टेलिकॉम कंपनी के मुंबई स्थित हेडऑफिस से कॉल करने का दावा किया था।
ठगी का शिकार हुए चेतन ने अपनी शिकायत में बताया कि उसे कुछ समय पहले एक नंबर से कॉल आई थी, जिसकी आखिरी 4 डिजिट 4441 थीं। कॉलर ने बताया था कि सर्विस प्रवाइडर कंपनी निश्चित कस्टमर्स को 300 वीआईपी नंबर ऑफर कर रही है। चेतन ने कहा, कॉल करने वाले शख्स ने मुझे बताया कि जब भी आप किसी को कॉल करेंगे तो रिसीवर के मोबाइल पर आपका नंबर ‘प्राइवेट नंबर’ के तौर पर फ्लैश करेगा।
ठगी करने वाले कॉलर ने चेतन को झांसा देते हुए कहा कि वह इस नंबर को बिटकॉइन के जरिए खरीद सकता है और बाद में ऊंचे दाम पर बेच भी सकता है। यही नहीं ठग ने दावा किया कि मुंबई पुलिस कमिश्नर ने भी ऐसा एक नंबर 5 लाख रूपये में खरीदा था और बाद में इसे 57 लाख में रूपये में बेच दिया। इसके अलावा चेतन को उस शख्स ने बायबैक ऑफर भी दिया। 2 लाख रूपये में बुक हुआ एक नंबर
कॉलर ने एक नंबर 4 लाख रूपये में देने का ऑफर दिया। इसके बाद दोनों के बीच 2 लाख रूपये में एक नंबर का सौदा हुआ। इसे बेहतर डील समझते हुए चेतन ने 6 लाख रूपये खर्च करते हुए तीन नंबर बुक करा लिए। इसके बाद चेतन ने कॉलर के बताए बैंक अकाउंट में रकम ट्रांसफर कर दी। लेकिन ठग ने चेतन को दोबारा कॉल करते हुए कहा कि पेमेंट में कुछ गड़बड़ी हो गई है, इसलिए उसे दोबारा रकम ट्रांसफर करनी होगी और पिछली रकम वापस आ जाएगी। इस पर चेतन ने 6 लाख रूपये की रकम दोबारा आरटीजीएस से ट्रांसफर कर दी।
रकम ऐंठने के बाद कहा, नंबर के लिए करो इंतजार
इतनी रकम ऐंठने के बाद चेतन से कहा गया कि वह नंबर रिसीव करने के लिए कुछ दिनों का इंतजार करे। कुछ दिन बीतने के बाद कॉलर तरह-तरह के बहाने बनाने लगा और फिर अपना फोन ही स्विच ऑफ कर लिया। इसके बाद चेतन ने अपने परिवार के सदस्यों को इस बारे में बताया और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। फिलहाल मामले की जांच जारी है।
जानें, क्या होता है प्राइवेट नंबर
ऐसे नंबरों को टेलिकॉम कंपनी की ओर से मास्क किया जाता है। ऐसा करने यह रिसीवर की स्क्रीन पर प्राइवेट नंबर के तौर पर फ्लैश करता है और मोबाइल नंबर नहीं दिखता। पहचान छिपाने के लिए इस सुविधा का इस्तेमाल किया जाता है। राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय और राज्य स्तर के मंत्रियों को ऐसे नंबरों की सुविधा मिलती है। इसके अलावा खुफिया एजेंसियों और टॉप सरकारी अफसरों को यह सुविधा दी जाती है। जानलेवा हमले जैसे खतरों का सामना कर रहे लोग भी इसके लिए अप्लाई कर सकते हैं।

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