Monday , 21 May 2018
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‘पेट्रोल-डीजल के दाम न बढ़ाएं’

सरकार का तेल कंपनियों को निर्देश

नई दिल्ली। केंद्र ने सरकारी तेल कंपनियों से कहा है कि वे डीजल और पेट्रोल की खुदरा कीमतों को न बढ़ाएं। सूत्रों के मुताबिक सरकार ने तेल कंपनियों से यह भी कहा है कि ग्लोबल क्रूड ऑइल की कीमतों में हाल के समय में इजाफा हो रहा है और तेल कंपनियां इस नुकसान का कुछ हिस्सा उठाने को तैयार रहें। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है इंडियन ऑइल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन को डीजल और पेट्रोल की बिक्री में प्रति लीटर 1 रूपये का नुकसान उठाना होगा। इंडियल ऑइन के शेयर 7.6′ तक गिरे थे, जो नवंबर 2016 के बाद एक दिन के कारोबार में सबसे बड़ी गिरावट है। वहीं, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड के शेयरों में भी 8.3′ की गिरावट देखी गई।
सरकार इस साल कई राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों की वजह से पेट्रोल-डीजल की कीमतों को काबू में रखना चाहती है। क्रूड ऑइल की सालाना जरूरतों का 80 प्रतिशत आयात करने वाला भारत चाहता है कि क्रूड की कीमत 50 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहे, ताकि अर्थव्यवस्था बेहतर हो सके।

उम्मीद के मुताबिक जीएसटी कलेक्शन नहीं होने की वजह से इसकी संभावना बहुत कम है कि सरकार पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी कम कर आम लोगों को राहत दे सके। अगर कच्चे तेल की कीमतों में आगे चलकर और उछाल आने की सूरत में तेल मंत्रालय को सब्सिडी पेमेंट के लिए तैयार रहने को कहा गया है। हालांकि हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड का कहना है कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों को नहीं बढ़ाने से जुड़े सरकार के किसी निर्देश की उसे जानकारी नहीं है। नई दिल्ली में इंटरनेशनल एनर्जी फोरम की बैठक से इतर एचपीसीएल के चेयरमैन एम. के. सुराना ने यह बात कही।

2014 में सत्ता में आने के बाद से मोदी सरकार कच्चे तेल की कीमतों में सबसे बड़ी गिरावट के दौर को भुना चुकी है। 2016 में कच्चे तेल की कीमत 27.1 डॉलर प्रति बैरल के न्यूनतम स्तर पर पहुंच चुकी थी लेकिन अब इसमें तेजी से रिकवरी हो रही है। फिलहाल अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल है। कच्चे तेल की कीमतों में फिर से इजाफे का दौर ऐसे वक्त शुरू हुआ है जब मोदी सरकार 2019 के आम चुनावों की तैयारी में है। जाहिर है तेल की बढ़ती कीमत सरकार के लिए चिंता की बात है। तेल उत्पादक देशों को मोदी की दो टूक‘कीमतें तय करने में न करें मनमानी’नई दिल्ली। पूरी दुनिया को तेल सप्लाई करने वाले ओपेक देशों को संदेश देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कहा कि गैर वाजिब तरीकों से कच्चे तेल की कीमतों को प्रभावित करना ठीक नहीं है और इसकी वाजिब कीमत तय करने के लिए विश्व स्तर पर सहमति बननी चाहिए।
पेट्रोलियम पदार्थों का एक्सपोर्ट करने वाले देशों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में प्रधानमंत्री ने कहा कि हमें सभी को किफायती दर पर ऊर्जा उपलब्ध कराने की दिशा में काम करना चाहिए। सऊदी अरब, ईरान और कतर से आए प्रतिनिधियों की मौजूदगी में मोदी ने कहा कि जानबूझकर बाजार भाव को प्रभावित करने से उन देशों को नुकसान उठाना पड़ता जो पेट्रोलियम पदार्थों का आयात करते हैं।

ट्रांसपरेंट बाजार होना चाहिए
दिल्ली में आयोजित 16वें अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा मंच की मंत्री स्तरीय बैठक में मोदी ने कहा कि दुनिया लंबे अर्से से तेल की कीमतों को रोलर कोस्टर पर देख रही है। हमें उत्पादक और उपभोक्ता दोनों के हितों को देखते हुए इसकी कीमतों को लेकर समझदारी भरा फैसला लेना चाहिए। दुनिया को तेल और गैस के लचीले और ट्रांसपेरेंट बाजार की ओर रूख करने की जरूरत है।

दोनों पक्ष तरक्की करें
तेल उपभोग के मामले में भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश है। भारत अपनी जरूरत का 80 फीसदी तेल आयात करता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह तेल उत्पादक देशों के हित में है कि अन्य अर्थव्यवस्थाएं भी स्थिरता के साथ तरक्की करती रहें। उन्होंने कहा कि क्यों न हम इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल विश्व सहमति बनाने के लिए करें, जिसमें तेल और गैस की वाजिब कीमतें तय की जाएं।

मोदी ने कहा कि पिछले साल मैंने एक एजेंसी द्वारा बनाई गई एनर्जी रिपोर्ट को पढ़ा। इसके मुताबिक, आने वाले 25 वर्षों में ऊर्जा के क्षेत्र में भारत की भूमिका काफी महत्वपूर्ण हो जाएगी। अगले 25 साल तक भारत की ऊर्जा खपत 4.2 फीसदी की दर से बढ़ेगी। यह रफ्तार दुनिया में सबसे तेज होगी।

किफायती ऊर्जा आज की जरूरत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कहा कि अब सौर ऊर्जा पहले के मुकाबले ज्यादा किफायती हो गई है, धीरे-धीरे बिजली हासिल करने के लिए कोयले का इस्तेमाल खत्म होगा। मोदी ने कहा कि स्वच्छ और किफायती ऊर्जा आज की जरूरत है और समझदारी से इसकी कीमत तय करने की जरूरत है। प्रधानमंत्री ने कहा कि मेरा मानना है कि भारत की ऊर्जा भविष्य के चार स्तंभ हैं – ऊर्जा उपलब्धता, ऊर्जा क्षमता, ऊर्जा स्थिरता और ऊर्जा सुरक्षा।

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