Thursday , 23 November 2017
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‘चुनौती है पर चिंता की बात नहीं’

नई दिल्ली। गिरती विकास दर को थामने और उसे फिर से पटरी पर लाने की कोशिश कर रहे वित्त मंत्री अरूण जेटली ने माना है कि राजकोषीय अनुशासन को बनाए रखना एक चुनौती है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा है कि फिलहाल ऐसी स्थिति नहीं है जिसे लेकर चिंतित हुआ जाए।
वित्त मंत्री ने कहा, आप अर्थव्यवस्था में खर्च जारी रखने, बैंकों को समर्थन देते रहने के साथ-साथ राजकोषीय समझदारी के साथ संतुलन कैसे बनाते हैं? जेटली ने कहा कि मुझे लगता है कि फिलहाल हम राजकोषीय समझदारी बनाए रखने की चुनौती का सामना कर रहे हैं।
ब्लूमबर्ग इंडिया इकनॉमिक फोरम में बोलते हुए जेटली ने कहा कि सरकार अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के उपायों पर विचार कर रही है। हालांकि उन्होंने इस सवाल का जवाब नहीं दिया कि सरकार अर्थव्यवस्था के लिए पैकेज का ऐलान करेगी या नहीं।
उल्लेखनीय है कि चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर 5.7 प्रतिशत रही जो तीन साल का न्यूनतम स्तर है। ऐसी संभावना जताई जा रही है कि अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए सरकार 40,000-50,000 करोड़ रुपये का राहत पैकेज दे सकती है।
हालांकि सार्वजनिक खर्च में बढ़ोतरी से महंगाई बढऩे का खतरा रहता है। साथ ही राजकोषीय घाटे को कम करने का सरकार का लक्ष्य भी प्रभावित होता है। अक्सर रेटिंग एजेंसियां भी सार्वजनिक खर्च बढऩे के उपायों का समर्थन नहीं करती दिखती हैं। वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार इस तरह के परस्पर विरोधी पहलुओं को समझती है।
अरुण जेटली ने कहा कि वैश्विक कारकों के प्रतिकूल रहने के बावजूद सरकार ने मोटे तौर पर अर्थव्यवस्था को पटरी पर रखा है। वित्त मंत्री ने कहा, हमें प्रतिकूल वैश्विक माहौल का सामना करना पड़ रहा था और इसके बावजूद मैं यह संतोष के साथ कहूंगा कि हमने मोटे तौर पर अर्थव्यवस्था को पटरी पर रखा है।
उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि सुधार की दिशा में आगे बढऩे, अधिक पारदर्शी एवं अधिक वास्तविक राजकोषीय अनुशासन बनाये रखने के साथ वृद्धि दर को बनाये रखने के मामले में पूर्व की तुलना में बेहतर रहे और आगे बढऩे में कामयाब रहे। गौरतलब है कि जीडीपी वृद्धि दर में गिरावट के साथ निर्यात के समक्ष भी कई चुनौतियां हैं। औद्योगिक वृद्धि भी पांच साल में सबसे कम है। चालू खाते का घाटा भी वित्त वर्ष की पहली तिमाही में बढ़कर 2.4 प्रतिशत तक पहुंच गया है।

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