Friday , 25 May 2018
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ई-वे बिल 1 अप्रैल से : जेटली

मौजूदा व्यवस्था 3 महीने बढ़ी

नई दिल्ली। उद्योग और व्यवसाय जगत के लिए गुड्स ऐंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) रिटर्न भरने की मौजूदा व्यवस्था जून तक जारी रहेगी। जीएसटी काउंसिल ने शनिवार को हुई अपनी बैठक में रिटर्न दर्ज करने की मौजूदा जीएसटीआर- 3 बी व्यवस्था को 3 महीने के लिए बढ़ा दिया है। वित्त मंत्री अरूण जेटली ने यहां जीएसटी काउंसिल की बैठक के बाद संवाददाताओं को यह जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि एक राज्य से दूसरे राज्य में माल की आवाजाही के लिए इलेक्ट्रॉनिक- वे बिल यानी ई- वे बिल को 1 अप्रैल से लागू किया जाएगा। हालांकि, उन्होंने कहा कि किसी राज्य के भीतर ई- वे बिल को 15 अप्रैल से चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा और एक जून तक सभी राज्यों में इसे लागू कर दिया जायेगा।
जीएसटी काउंसिल शनिवार की बैठक में जीएसटी के सरल फार्म के बारे में किसी निर्णय पर नहीं पहुंच सकी। काउंसिल ने इस संबंध में बिहार के उप- मुख्यमंत्री सुशील मोदी की अध्यक्षता वाली समिति को एक पन्ने का फार्म तैयार करने को कहा है जो कि सरल हो और टैक्स चोरी से निजात दिलाने वाला हो। जेटली ने कहा कि जीएसटी रिटर्न दाखिल करने की मौजूदा व्यवस्था जीएसटीआर-3 बी को ही 3 महीने के लिए बढ़ा दिया गया है। इसके साथ ही निर्यातकों को दी गई कर छूट को भी 6 महीने यानी सितंबर तक जारी रखने का फैसला किया गया है।
रिवर्स चार्ज आधार पर कर अदा करने की अनिवार्यता को भी 30 जून तक टालने का फैसला किया गया है। इस दौरान मंत्रियों का एक समूह इसे लागू करने के तरीकों पर विचार करेगा ताकि व्यापारियों और उद्योग जगत को कोई परेशानी न हो।
स्रोत पर कर लगाने और कर संग्रह के प्रावधानों को भी 30 जून तक टाल दिया गया है। इस दौरान केंद्र तथा राज्य सरकारों की लेखा प्रणालियों को जीएसटी नेटवर्क से जोड़ने के तौर-तरीकों पर विचार किया जायेगा जिससे जिन व्यापारियों ने स्रोत पर कर अदा कर दिया है उन्हें उसका क्रेडिट बिना किसी परेशानी के अपने-आप मिल जाये।
जेटली ने बताया कि को आईटी की समस्याओं के कारण हो रही परेशानियों और तत संबंधी शिकायतों के निपटान की जिम्मेदारी जीएसटी क्रियान्वयन समिति को सौंपी गयी है। (शेष पेज 8 पर)

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