Monday , 27 March 2017
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ट्रेन में मनोरंजन का पूरा होगा इंतजाम

नई दिल्ली। अगले महीने से रेल यात्रा के दौरान आप टीवी धारावाहिक, फिल्में, छोटे वीडियो, बच्चों के शो, आध्यात्मिक शो, फिल्मी गीत, क्षेत्रीय गीत और आध्यात्मिक संगीत, इलेक्ट्रॉनिक अखबार, गेम और शैक्षिक सामग्री आदि की फरमाइश कर पाएंगे। दरअसल, गैर-किराया मद से आमदनी बढ़ाने की जुगत में लगे रेल मंत्रालय सफर के दौरान या रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों की मांग पर मनोरंजक सामग्री मुहैया कराने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
मंत्रालय ने कॉन्टेंट ऑन डिमांड (सीओडी) और रेल रेडियो सर्विसेज मुहैया कराने के लिए टेंडर मंगवाए गए हैं और उम्मीद है कि अप्रैल से यह सेवा शुरू की जाएगी। बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (बीसीजी) की एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रेनों और स्टेशनों पर सीओडी के जरिए रेलवे का कुल इन्फोटेनमेंट मार्केट अगले तीन साल में 2,277 करोड़ रूपये पहुंच सकता है। इसमें रेडियो, ऑडियो, डिजिटल म्यूजिक और डिजिटल गेमिंग शामिल है। रिपोर्ट कहती है कि इसमें कॉन्टेंट का मालिकाना हक रखने वाली कंपनियां एरोस इंटरटेनमेंट, बालाजी प्रॉडक्शंज और शेमारू एंटरटेनमेंट तथा कंटेंट ऐग्रीगेटर रेडियो मिर्ची, फीवर एफएम, हंगामा और बिंदास जैसी पार्टियां इसमें दिलचस्पी ले सकती हैं।
साथ ही प्रमुख टेलिकॉम कंपनियों, इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर कंपनियों और ऑफलाइन स्ट्रीमिंग बाजार की कंपनियों जैसे वोडाफोन, आइडिया, एयरटेल, प्रेसप्ले टीवी, मूविंग टॉकीज, द्विंगलू, फ्रॉपकॉर्न, टूरिंगटॉकीज, माईफ्रीटीवी, जोंक और क्लाउडप्ले के भी इसमें आगे आने की उम्मीद है। इस गतिविधि से वाकिफ एक अधिकारी ने कहा, सीओडी जैसी गैर-किराया पहल के लिए निविदा आमंत्रित की जाएगी। हम इस उद्योग की सभी बड़ी कंपनियों के इसमें हिस्सा लेने की उम्मीद कर रहे हैं। यह अनुबंध 10 साल का होगा। यात्रियों के लिए ऐप आधारित कैब सेवाओं के लिए भी मई में टेंडर मंगाया जाएगा।
रेल मंत्रालय ने पिछले साल कार्यकारी निदेशक आरपी ठाकुर की अगुआई में एक गैर-किराया राजस्व निदेशालय गठित किया था। रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने इस साल जनवरी में गैर किराया राजस्व नीति जारी की थी। इसमें स्टेशनों और ट्रेनों में वाईफाई के जरिये रेडियो और वीडियो कॉन्टेंट मुहैया कराने, एटीएम के लिए प्लेटफॉर्मों पर पट्टे पर जगह देने, विज्ञापन होर्डिंग और बिलबोर्ड लगाने के लिए आउटडोर स्पॉट किराये पर देने, ट्रेनों और स्टेशनों पर ब्रैंडिंग के अधिकार एफएमसीजी और अन्य कंपनियों को बेचने के अधिकार शामिल हैं।
रेलवे को किराए के इतर गतिविधियों से अगले 10 साल में 16,000 से 20,000 करोड़ रूपये की कमाई होने की उम्मीद है। उसकी योजना पहले साल 30 प्रतिशत ट्रेनों में सीओडी और रेल रेडियो सेवा देने की है। दूसरे साल में इसे 60 प्रतिशत ट्रेनों में और तीसरे साल सभी ट्रेनों में मुहैया कराया जाएगा। रेलवे के मुताबिक सभी स्टेशनों पर चरणबद्घ तरीके से ऑडियो और विडियो कॉन्टेंट सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
बीसीजी रिपोर्ट के मुताबिक ऑफलाइन कॉन्टेंट मुहैया कराने पर प्रति कोच करीब 38,000 रुपये खर्च आएगा। दूसरी तरफ इंटरनेट के जरिए कॉन्टेंट मुहैया कराने के लिए बुनियादी ढांचा स्थापित करने पर प्रति कोच 25 लाख रूपये की लागत आएगी। इस परियोजना पर नजर रखने के लिए रेलवे गैर-किराया मूल्यांकन समिति का भी गठन करेगी।

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