Friday , 24 March 2017
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बारुड़ा रखवाळी म्हारी शीतळा ए मां

उदयपुर। शीतला सप्तमी और शीतला अष्टमी का पर्व शहर में सोमवार को पूरी श्रद्धा के साथ मनाया गया। शीतला पूजन के बाद घरों में गर्म खाद्यों का उपयोग नहीं कर खट्टे मीठे ओलिये, लपसी, मीठे ढोकले, चरखी-मीठी पुडिय़ां व तली वस्तुओं की दावत दिनभर चलती रही। एक दूसरे के घर ओलिया खाने और खिलाने का दौर चला।
रविवार रात को रांदा पौआ करने के बाद सोमवार अल सुबह महिलाएं हाथों में पूजा की थाल सजाकर ‘मैं तो पांवा पड़ती आऊंए म्हारी माय…, बारुड़ा रखवाळी म्हारी शीतळा ए मां…Ó जैसे गीत गाती हुई निकल पड़ी। नए वस्त्र और आभूषणों से सजी संवरी महिलाओं ने माता को शीतल जल अर्पित कर दही, चावल, लपसी और ठण्डे व्यंजनों का भोग लगाया और परिवार में सबके निरोगी रहने की कामना की। शहर के रंगनिवास रोड, गुलाबबाग, गंगुकुंड, सुंदरवास सहित कई मंदिरों पर महिलाओं ने पूजन किया। कई बार महिलाओं को पूजन के लिए इंतजार भी करना पड़ा। मंदिर से बाहर आने के बाद पथवारी का पूजन किया और कहानियां सुनी। घड़ी में रात के ढाई बजने के साथ ही पूजन का क्रम शुरू हुआ जो सुबह सात बजे तक जारी रहा। इस बार सप्तमी और अष्टमी एक ही दिन पूजे जाने से मंदिरों में महिलाओं की भीड़ ज्यादा रही। पूजन के बाद महिलाओं ने बड़े बुजुर्गों के पैर छूकर सौभाग्य का आशीर्वाद लिया। इसके बाद एक दूसरे के घर दावत उड़ाने का क्रम शुरू हुआ जो रात के खाने तक जारी रहा।
कई जगह खेले रंग
मेवाड़ में कई जगह पर अष्टमी पर रंग खेलने की परंपरा है। इसके तहत कपासन, गिलूण्ड, रेलमगरा, गंगरार, गंगापुर, आकोला, फतहनगर, आमेट सहित राजसमंद, भीलवाड़ा और चित्तौडग़ढ़ जिलों के कई गांवों में होली खेली गई। फतहनगर में बादशाह की सवारी निकाली गई, जो सनवाड़ स्थित रावला चौक में जाकर सम्पन्न हुई। सिटी पैलेस में लवाजमे के साथ निकली शीतलामाता की सवारीउदयपुर। शीतला अष्टमी पर सोमवार को पारंपरिक रूप से लवाजमे के साथ शीतला माता मंदिर तक सवारी पहुंची। विधिवत पूजा-अर्चना कर नैवेद्य चढ़ाया गया। महिलाएं माताजी के गीत गाती चलीं।
बैंड की धुन के साथ त्रिपोलिया से शीतलामाता मंदिर पहुंचे तथा वहां पुरोहितों ने माताजी की पूजा-अर्चना कर नैवेद्य चढ़ाया गया।

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