Wednesday , 18 January 2017
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‘आर्थिक सुधारों से पीछे नहीं हटेंगे’

pm_modiगांधीनगर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आर्थिक सुधारों पर एक बार फिर अपनी प्रतिबद्धता जताई है। मोदी ने वादा किया कि उनकी सरकार आर्थिक सुधारों से पीछे नहीं हटेगी। देश को कारोबार करने के लिए सबसे सुगम स्थान बनाने की खातिर तंत्र को भ्रष्टाचार मुक्त और प्रक्रियाओं को आसान बनाया जाएगा। इस तरह राजनीति और अर्थव्यवस्था दोनों में ही आमूलचूल बदलाव देखने को मिलेगा। प्रधानमंत्री मंगलवार को यहा वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट 2017 को संबोधित कर रहे थे।
‘पूरब का दावोसÓ कहे जाने वाले इस सम्मेलन में दुनिया की प्रमुख कंपनियों के सीईओ और कई देशों के नेतागण मौजूद थे। मोदी ने कहा, हमने कारोबारी सुगमता पर सबसे ज्यादा जोर दिया है। मेरी सरकार भारतीय अर्थव्यवस्था में सुधार जारी रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। ढाई साल के दौरान सरकार ने अर्थव्यवस्था को दुरूस्त करने के लिए लगातार काम किया है। इसके नतीजे भी शानदार रहे हैं। आर्थिक विकास दर बढ़ी है। महंगाई में कमी आई है। राजकोषीय घाटा और चालू खाते का घाटा कम हुआ है। जबकि विदेशी निवेश में जोरदार बढ़ोतरी हुई है।
उनके कार्यकाल में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) बढ़कर 130 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच चुका है। यह विदेशी निवेशकों के भारतीय अर्थव्यवस्था में जबरदस्त भरोसे का प्रतीक है। यह सरकार के प्रयासों का ही प्रतिफल है कि हम विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बीच सबसे तेज रफ्तार हासिल कर सके हैं। आज विश्व अर्थव्यवस्था में यह एक चमकता सितारा है। देश में कारोबार करना आसान बनाने की खातिर कई बड़े कदम उठाए गए हैं। लाइसेंस प्रक्रियाओं को सरल बना दिया गया है। मंजूरी, रिटर्न और निरीक्षण से संबंधित प्रावधानों और प्रक्रियाओं को तर्कसंगत बनाया गया है। रेगुलेटरी फ्रेमवर्क में सुधार के इरादे से विभिन्न सेक्टरों की सैकड़ों कार्ययोजनाओं के क्रियान्वयन पर कड़ी नजर है। यह हमारे बेहतर प्रशासन और भ्रष्टाचार मुक्त भारत देने के वादे का अहम हिस्सा है।
प्रधानमंत्री ने इस सम्मेलन के दौरान कई प्रमुख कंपनियों के प्रमुखों से मुलाकात की। उनमें से ज्यादातर सीईओ ने मेक इन इंडिया, स्किल इंडिया व डिजिटल इंडिया जैसे कार्यक्रमों के लिए उनकी जमकर सराहना की। 3डी आधारित है भारत में कारोबार मोदी ने कहा कि भारत में कारोबार ‘3डीÓ यानी डेमोग्राफी, डेमोक्रेसी और डिमांड पर आधारित है। हमने पिछले ढाई साल में देखा है कि लोकतांत्रिक ढांचे में भी तुरंत परिणाम देना संभव है। विश्व बैंक की मदद से गुड गवर्नेंस के आधार पर राज्यों की रेटिंग हो रही है। इससे राज्यों के बीच प्रतिस्पर्धा की भावना बढ़ी है।
युवाशक्ति का दिखेगा कमाल
देश में 80 करोड़ युवा 35 साल से कम उम्र के हैं। भारत की इस युवाशक्ति की किसी और से तुलना नहीं की जा सकती है। हमारे पास दुनिया के दूसरे सबसे ज्यादा अंग्रेजी बोलने वाले युवा हैं। यहां भरपूर अनाज, फल, सब्जियां और तमाम चीजें पैदा होती हैं। भारत अब एक बड़ा आईटी हब बन चुका है। हम विश्व को वैज्ञानिक और इंजीनियर देने वाले दूसरे सबसे बड़े देश हैं।

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