Tuesday , 28 February 2017
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वर्चस्व की लड़ाई में आमने-सामने हुए एबीवीपी और सुविवि अध्यक्ष

abvpउदयपुर। मोहनलाल सुखाडिय़ा विश्वविद्यालय में एबीवीपी और छात्रसंघ अध्यक्ष के बीच मेे वर्चस्व को लेकर विवाद शुरू हो गया। रविवार रात्रि को एबीवीपी की ओर से एकस्ट्रा कक्षाओं के लिए लिए जा रहे शुल्क को माफ करने के लिए आमरण अनशन शुरू किया गया तो सोमवार को छात्रसंघ अध्यक्ष मयूरध्वजसिंह के नेतृत्व में छात्र कल्याण अधिष्ठाता को हटाने की मांग पर जोरदार प्रदर्शन किया गया। छात्रों ने अद्र्धनग्रावस्था में विवि के प्रशासनिक भवन के सामने प्रदर्शन किया। इस दौरान दोनों गुट आमने-सामने हो गए और जोरदार नारेबाजी की गई। मौके पर मौजूद भारी पुलिस बल ने दोनों गुटों को अलग रखा। शाम को विवि प्रशासन ने मांग मानते हुए एकस्ट्रा कक्षाओं के शुल्क में आंशिक कमी की और आमरण अनशन पर बैठे छात्रों का अनशन तुड़वाया।
जानकारी के अनुसार विवि प्रशासन ने कुछ समय पूर्व उपस्थिति कम रहने पर छात्रों के लिए अतिरिक्त कक्षाएं लगाकर उपस्थिति पूरी की जा रही है। जिसमें विवि प्रशासन की ओर से नियमित छात्रों से दो हजार रूपए और स्वयंपाठी छात्रों से 5 हजार रूपए फिस ली गई है। इसी के विरोध में और शुल्क को माफ करने की मांग को लेकर रविवार रात्रि को ही एबीवीपी के कार्यकर्ताओं ने आमरण अनशन शुरू कर दिया। एबीवीपी की ओर से हिमांशु बागड़ी, धु्रव श्रीमाली, गौरव शर्मा, जितेन्द्रसिंह, धीरेन्द्र चौधरी और पद्मसिंह विवि के प्रशासनिक भवन के बाहर आमरण अनशन पर बैठे गए और शुल्क माफी करने की मांग पर अड़ गए।
इधर इस बारे में अन्य संगठनों को पता चलने पर सोमवार को छात्रसंघ अध्यक्ष मयूरध्वजसिंह चौहान के नेतृत्व में जोरदार प्रदर्शन किया गया। मयूरध्वजसिंह चौहान के नेतृत्व में कामर्स कॉलेज अध्यक्ष भवानीशंकर बोरीवाल, साईंस कॉलेज अध्यक्ष प्रवीणसिंह, रौनक गर्ग, गजेन्द्रसिंह रावल सहित दर्जनों की संख्या में छात्र प्रशासनिक भवन पहुंचे और नारेबाजी करनी शुरू कर दी। इस दौरान अधिकांश छात्रों ने शर्ट उतारकर जोरदार प्रदर्शन किया। छात्रसंघ अध्यक्ष मयूरध्वजसिंह ने बताया कि उनकी सबसे प्रमुख मांग छात्र कल्याण अधिष्ठाता आनंद पालीवाल को हटाने की है।
मयूरध्वजसिंह चौहान ने बताया कि छात्र कल्याण अधिष्ठाता छात्रों के हितों के लिए होता है, परन्तु पालीवाल द्वारा छात्रों के हितों के लिए नहीं सोचा जा रहा हैै। विवि के किसी भी कार्यक्रम में अध्यक्ष को नही बुलाया जाता है और ना ही सूचना दी जाती है। किसी भी कार्ड पर अध्यक्ष का नाम नहीं लिखा जाता है। इसके साथ ही ऑन लाईन परीक्षा के आवेदन की समय सीमा बढ़ाई जाए। इसके साथ ही हॉस्टलों में बुनियादी सुविधाओं को दिया जाए और अतिरक्त कक्षाओं के लिए जो शुल्क लिया जा रहा है। वह समाप्त कर दिया जाए। इसके साथ ही बैडमिंटन कोर्ट को नया बनाने, नेहरू हॉस्टल में भौतिक सुविधाओं को बनाने, वाणिज्य, एफएमएस और साईंस कॉलेज में कैंटीन शुरू करने, कामर्स कॉलेज में पार्किंग विकसित करने जैसी कई मांगों को लेकर ज्ञापन दिया गया।
इधर दोनों गुटों के एक साथ विवि में आने की जानकारी पर आमने-सामने होने की आशंका पर विवि में भारी पुलिस जाब्ता पहुुंच गया। नारेबाजी के दौरान दोनों गुट आमने-सामने हो गए और एक-दूसरे के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। इस दौरान छात्रों के आपस में भिडऩे की नौबत आ गई, परन्तु पुलिस के बीच में आने के कारण मामला केवल नारेबाजी तक ही सीमित हो गया। बाद में समझाईश कर मामले को निपटाया गया।
इधर आमरण अनशन पर बैठे एबीवीपी के कार्यकर्ताओं को देखकर विवि के रजिस्ट्रार के साथ-साथ उपकुलपति के बीच में मिटिंग हुई। जिसमें निर्णय लिया गया कि 60 प्रतिशत उपस्थिति वाले नियमित छात्र से 2 हजार के बजाए 1500 रूपए और स्वयं पाठी छात्र से 5 की बजाए चार हजार रूपए फिस ली जाएगी। इसके बाद आमरण अनशन पर बैठे एबीवीपी के कार्यकर्ता माने। रजिस्ट्रार हिम्मतसिंह भाटी ने इन छात्रों का आमरण अनशन तुड़वाया। गौरतलब है कि वर्तमान में छात्र कल्याण अधिष्ठाता आनंद पालीवाल है जो एबीवीपी के प्रदेश अध्यक्ष है। ऐसे में सुविवि के वर्तमान अध्यक्ष मयूरध्वजसिंह और एबीवीपी का आपस में विवाद चल रहा है और कुछ दिनों पूर्व ही एबीवीपी ने मयूरध्वजसिंह के हिन्दू जागरण मंच के कार्यक्रम में जाने का जोरदार विरोध किया था।

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