Monday , 16 January 2017
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आईएस के खिलाफ तालिबान को खड़ा करने से भारत का इंकार

is_talibanमॉस्को। मॉस्को में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक के दौरान पाकिस्तान, चीन और रूस तालिबान को यूएन की लिस्ट से हटवाने पर सहमत हो गए हैं। इस बैठक में तीनों देशों ने अफगानिस्तान की ‘बिगड़तीÓ सुरक्षा स्थिति और युद्ध प्रभावित देश में आईएसआईएस जैसे कट्टरपंथी संगठनों की बढ़ती गतिविधियों पर भी चर्चा की।
इस अभियान में तीनों देशों ने आईएस के खिलाफ तालिबान को इस्तेमाल करने का फैसला किया है। भारत हमेशा से ही कहता रहा है कि अफगानिस्तान में सबसे बड़ा खतरा तालिबान से है। ऐसे में भारत किसी भी हाल में इस घटनाक्रम को सहमति नहीं देगा। इस सबके बीच जहां अफगानिस्तान में पाकिस्तान के मजबूत होने की संभावना बढ़ गई है, वहीं इसके कारण भारत और रूस की दोस्ती पर काफी गंभीर असर पड़ सकता है।अफगानिस्तान ने किया कड़ा विरोध
अफगानिस्तान सरकार ने ऐसे किसी कदम का कड़ा विरोध किया है, लेकिन इसके बावजूद ये तीनों देश अफगानिस्तान के लिए अपनी रणनीति तैयार करने में जुट गए हैं। वार्ता के बाद हालांकि तीनों देशों ने यह कहा कि अगली बार ऐसी किसी बातचीत में वे अफगानिस्तान को भी शामिल करेंगे। उधर, ईरान को भी इस समूह में शामिल करने की तैयारी शुरू हो गई है।अगर रूस और चीन अपने इस रूख पर कायम रहते हैं और अगर अमेरिका सुरक्षा परिषद में उनके इस फैसले के खिलाफ वीटो नहीं करता है, तो इसका नतीजा यह होगा कि कुछ टॉप तालिबानी नेताओं का नाम संयुक्त राष्ट्र संघ की प्रतिबंधित सूची से निकाल दिया जाएगा।रूस का ये रूख भारत के साथ बिगाड़ सकता है संबंध
एक अंग्रेजी वेबसाइट में छपी खबर के मुताबिक, ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन में रूस के विश्लेषक नंदन उन्नीकृष्णन ने कहा, भारत और रूस के बीच वर्तमान में बातचीत बहुत कम हो गई है। ऐसे में रूस का ये रुख संबंधों को और बिगाड़ सकता है। भारत ने हाल ही में रूस से लगभग 6 खरब रुपयों की खरीद रक्षा सौदे में करने का ऐलान किया था। इसके बावजूद रूस के साथ उसके संबंधों में सुधार आने के संकेत नहीं मिल रहे हैं।
भारत के लिए काफी परेशानी का कारण बन सकता है पूरा घटनाक्रम
उधर अफगानिस्तान ने तालिबान के नए प्रमुख का नाम भी इस प्रतिबंधित सूची में डालने की मांग की है। यह पूरा घटनाक्रम भारत के लिए काफी परेशानी का कारण बन सकता है। एक तो भारत को इस बैठक से दूर रखा गया और दूसरा यह कि भारत शुरू से लेकर अबतक तालिबान को अफगानिस्तान में सबसे बड़ा खतरा मानता आया है। भारत के अलावा अफगान सरकार और अमेरिका भी तालिबान को इसी तरह देखते हैं।

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